शास्त्रीय गायिका डॉ स्वाति शर्मा बनी मरुधरा संस्थान की अध्यक्ष

शास्त्रीय गायिका डॉ स्वाति शर्मा बनी मरुधरा संस्थान की अध्यक्ष

  • लोक कला,संगीत और संस्कृति के संवर्धन और संरक्षण के लिए आगे आई 100 महिलाएं
  • लुप्त होती कलाओं के संरक्षण के साथ समाज सेवा में भी समर्पित रहेंगी

जोधपुर,शास्त्रीय गायिका डॉ स्वाति शर्मा बनी मरुधरा संस्थान की अध्यक्ष। राजस्थानी लोक संगीत के संरक्षण और संवर्धन के लिए पिछले 18 वर्षों से समर्पित शास्त्रीय गायिका और संगीत में गोल्ड मेडल

प्राप्त प्रोफेसर डॉ स्वाति शर्मा को मरुधरा लोक कला और संगीत सेवा संस्थान का सर्व सम्मति से अध्यक्ष चुना गया है। विधि विधान से राजस्थान सरकार के सहकारिता विभाग में संस्था का पंजीकरण भी कराया गया है।

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राजस्थान की लोक कलाओं,संगीत और संस्कृति से लेकर विभिन्न प्रकार की लुप्त होती कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ सामाजिक सरोकार निभाने के उद्देश्य से जोधपुर की 100 महिलाओं ने मिलकर संकल्प लेते हुए मरुधरा लोक कला एवं संगीत सेवा संस्थान का गठन करने के साथ कार्यकारिणी की घोषणा की है। इस संस्थान के लिए डॉक्टर स्वाति शर्मा अध्यक्ष,सुरभि शर्मा उपाध्यक्ष,सुलोचना गौड़ सचिव और डिंपल गौड़ कोषाध्यक्ष को निर्वाचित किया गया। कार्यकारिणी सदस्यों के रूप में पूनम गौड़,रश्मि शर्मा,अलापी जायसवाल,अनिता टाक और स्वाति दीपक शर्मा को चुना गया। जबकि साधारण सदस्यों के रूप में रेशमा पुरी,सुनंदा जोशी,सुमन परिहार और देवयानी पंवार को चुना गया।

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मरुधरा लोक कला और संगीत सेवा संस्थान की नवनिर्वाचित सचिव सुलोचना गौड़ ने बताया कि राजस्थान की लोक कलाओं और संस्कृति के साथ-साथ राजस्थान के संगीत और पर्यटन से लेकर विभिन्न महत्वपूर्ण आयोजनों में राजस्थान की लोक कला और संगीत,संस्कृति के जरिए यहां के कलाकार हमेशा अपना सर्वस्व योगदान देते रहे लेकिन उनके संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में राजस्थान में कोई भी ऐसा संस्थान नहीं है जो कला संस्कृति के संरक्षण के साथ इन कलाकारों को मंच देने,प्रोत्साहित करते हुए लुप्त कलाओं को भी संरक्षित करने का काम करें।

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जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के संगीत विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ स्वाति शर्मा की पहल पर 100 महिलाएं एक मंच पर आई और सभी ने एकजुट होकर एक ऐसे संस्थान के गठन की आवश्यकता पर जोर दिया जिसके चलते कला और संस्कृति के संरक्षण के साथ कलाकारों को आगे बढ़ाने के अलावा सामाजिक सरोकार के क्षेत्र में भी कुछ ऐसे नवाचार किए जाए जिससे वास्तव में जरूरतमंदों तक सेवा का लाभ पहुंच सके।

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