मोटा अनाज एवं आयुर्वेदीय जीवन शैली स्वास्थ्य-संरक्षण के लिये लाभदायी-प्रो.तोमर
‘अन्तर्राष्ट्रीय मिलेट ईयर’ के तहत आयुर्वेद विश्वविद्यालय में व्याख्यान आयोजित
जोधपुर,राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ, आयुष मंत्रालय भारत सरकार के पूर्व गुरू,बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व एडजंक्ट प्रोफेसर तथा विश्व आयुर्वेद मिशन के प्रेसिडेन्ट प्रो. जीएस तोमर ने कहा कि भारत की प्राचीन स्वास्थ्य परम्परा के अनुसार मोटे अनाज का भोजन में समावेश करना हर बीमारी से बचाव का श्रेष्ठ तरीका है। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में ऋषि-महर्षियों ने मोटे अनाज के माध्यम से न केवल स्वास्थ्य- संरक्षण में अपितु ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं सुरक्षित कृषिकरण के क्षेत्र को समुन्नत किया था। प्रो.तोमर ने कहा कि भारत में अनेक जीवन शैलीजन्य बीमारियों के फैलाव की चुनौती से मोटे अनाज के उपयोग एवं आयुर्वेदीय प्राचीन जीवन शैली अपनाकर निपटा जा सकता है। प्रो. तोमर आयुर्वेद विश्वविद्यालय के सुश्रुत सभागार में अन्तर्राष्ट्रीय मिलेट्स ईयर पर आयोजित कार्यक्रम को मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुऐ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने कहा कि आज बीमारियों के प्रकोप का कारण हमारा मोटा अनाज के उपयोग की परम्परा से हटना भी है। अतः जब पूरे विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष के आयोजन के माध्यम से मोटे अनाज के उपयोग का प्रचार-प्रसार हो रहा है, भारत वर्ष की इस मूल परम्परा को पुनः अपनाकर व्यक्ति को बीमारियों से बचाने की मुहिम शुरू करते हुए समाज में जागरूकता पैदा करनी चाहिए।
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कार्यक्रम के पहले प्रातः डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर के करवड़ स्थित चिकित्सालय में बाल रोग विभाग में सेरेब्रल पाल्सी एवं ऑटिज्म केयर यूनिट तथा बाल पंचकर्म यूनिट, का चिकित्सा विभाग में जेरियाट्रिक केयर यूनिट तथा पंचकर्म यूनिट एवं अगद तंत्र विभाग की नशामुक्ति ईकाई में पंचकर्म यूनिट का शुभारंभ कुलपति प्रो.(वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व एडजंक्ट प्रोफेसर प्रो.जीएस तोमर तथा राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान मानित विश्वविद्यालय जयपुर की डीन रिसर्च प्रो.निशा ओझा तथा कुलसचिव सीमा कविया के साथ किया।
शुभारंभ समारोह को सम्बोधित करते हुए कुलपति प्रो.प्रजापति ने कहा कि सेरेब्रल पाल्सी,ऑटिज्म व एडीएचडी इत्यादी जटिल बाल रोगो में जहां आधुनिक पीडियाट्रिक मेडिसिन में सीमित उपाय है,वहीं आयुर्वेद में इन जटिल बाल-स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान व्यापक रूप में उपलब्ध है और इनके प्रभावी उपचार-प्रबंधन में विशिष्ट आयुर्वेद औषधि,पंचकर्म इत्यादि के द्वारा विशेष बच्चों के स्वास्थ्य में पर्याप्त सुधार देखा गया है। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व एडजंक्ट प्रोफेसर प्रो जीएस तोमर ने कहा कि बाल स्वास्थ्य में प्रभावी विशिष्ट आयुर्वेदीय विधाओं का अधिकाधिक उपयोग किया जाना चाहिए।
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इस अवसर पर प्राचार्य प्रो.महेन्द्र शर्मा,डीन रिसर्च एवं बालरोग विभागाध्यक्ष प्रो.प्रेमप्रकाश व्यास, डीन एकेडमिक प्रो.राजेश शर्मा,पूर्व प्राचार्य एवं रसशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. गोविन्द शुक्ला,चिकित्सालय अधीक्षक प्रो.प्रमोद मिश्रा,परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजाराम अग्रवाल,अगद तंत्र विभागाध्यक्ष एवं नशामुक्ति इकाई प्रभारी डॉ.ऋतु कपूर,चिकित्सालय उपाधीक्षक डॉ.ब्रह्यानन्द शर्मा,डॉ. संजय श्रीवास्तव,बालरोग विभाग के एसोसिएट प्रोफसर डॉ.हरीश कुमार सिघल,सेरेब्रल पाल्सी यूनिट प्रभारी डॉ.दिनेश कुमार राय,शल्य तंत्र विभागाध्यक्ष प्रो.राजेश गुप्ता,मानव संसाधन विकास केन्द्र के निदेशक डॉ. राकेश शर्मा,डॉ.रश्मि शर्मा,डॉ.राजीव सोनी,डॉ.निधि अवस्थी,डॉ.प्रवीण प्रजापति सहित पीजीआईए के शिक्षक चिकित्सक तथा रेजिडेंट डॉक्टर्स उपस्थित थे।
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