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  •  लोकसभा में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दी अधिसूचना की जानकारी
  •  राज्‍यों के मुख्‍य सचिवों को भेजा गया है पत्र
  •  जिले के प्रोजेक्‍ट में सुझाव शामिल नहीं करने का कारण फाइल में लिखना होगा

नई दिल्‍ली, जल जीवन मिशन के प्रोजेक्‍ट या गांव में नल कनेक्‍शन संबंधित प्राथमिकता तय करने, प्रोजेक्‍ट में सांसदों की तरफ से दिए गए सुझाव को शामिल करने से लेकर भूमि पूजन या उद्घाटन में राज्‍य सरकार सांसदों की अनदेखी नहीं कर सकेगी। केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय ने प्रोटोकॉल के तहत जिला स्‍तर की योजनाओं की समिति की बैठक से लेकर अन्‍य स्‍तर पर सांसदों को तवज्‍जो देने वाली अधिसूचना जारी कर राज्‍य के मुख्‍य सचिवों को भेजी है। जोधपुर के सांसद केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत ने गुरुवार को संसद में महाराष्ट्र के नन्दूरबार से सांसद डॉक्टर हीना वी. गवित के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अधसिूचना में कहा गया है कि जिला स्‍तरीय योजना बनाते समय सांसदों से आवश्‍यक रूप से सहमत‍ि ली जाए। जब जिला स्‍तर योजना बनकर तैयार हो तो उसकी कॉपी सांसदों को भेजी जाए। 15 दिन में सांसद जो सुझाव देते हैं, उसे शामिल करें। अगर सुझाव को शामिल नहीं करते हैं तो फाइल में ये दर्ज करेंगे कि आखिर दिक्‍कत क्‍या है और सांसद के सुझाव को जिला स्‍तर की योजना में शामिल क्‍यों नहीं किया जा रहा है? उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन की किसी भी स्‍कीम का भूमि पूजन या शुभारंभ सांसदों की उपस्थिति में ही होगा। उन्‍हें प्रोटोकॉल के तहत बुलाया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि कई सांसदों ने जानकारी दी थी कि राज्‍य सरकार कार्यक्रमों की जानकारी नहीं देती। अब ऐसा नहीं कर पाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिले की समिति दिशा की बैठकों में भी सांसद समीक्षा कर सकेंगे। सांसदों का पूरी भागीदारी उसमें रहे, इसकी व्‍यवस्‍था की गई है। शेखावत ने कहा कि जल जीवन मिशन में गांवों में उपयोग के बाद बचने वाले पानी के शोधन की प्रणाली विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। एक अन्‍य सवाल के जवाब में शेखावत ने कहा कि जल राज्‍य का विषय है, जिसमें योजना को लागू करना भी राज्‍य का काम है। मैंने 18 राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों के साथ बात करके जल जीवन मिशन योजना वर्ष 2024 तक पूरी हो, इस पर चर्चा की है। निश्चित रूप से जो कार्यक्रम हमने लिया है, उसे तय समय से पहले पूरा करेंगे। ऐसे जिलों को प्राथमिकता देना अपने दिशा-निर्देशों में लिखा है कि पहाड़ी, रेगिस्‍तानी या दुर्गम क्षेत्रों में मजबूती से काम करें। अब नई अधिसूचना से सांसद इसमें जुड़ेंगे तो गति और बढ़ेगी।
जल जीवन मिशन शहरी से अगले पांच साल में मिलेगा हर घर को उचित मात्रा में गुणवत्‍ता वाला पानी
केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि 2.86 लाख करोड़ रुपए का बजट प्रावपधान जल जीवन मिशन शहरी में किया गया है। अगले पांच साल में कोई भी घर बिना पानी के नहीं रहे। अभी तक पुरानी सरकारों ने जो जल के कार्यक्रम लिए हैं, उसमें सिर्फ इस बात को शामिल किया कि लोगों को पानी मिलना चाहिए, लेकिन हमारी सरकार ने इसे आगे ले जाकर कहा कि उचित मात्रा और उचित गुणवत्‍ता वाला पानी लोगों के घर में मिलना चाहिए। पानी की सतत उपलब्‍धता को भी शामिल किया है। रसोई और स्नानघर में निकलने वाला पानी रि-साइकिल करके इस्‍तेमाल हो, इसकी व्‍यवस्‍था की है। पानी ट्रीट करके ग्राम पंचायत के लिए आय का साधन भी बन सकता है। गांव की पानी समिति के पास मालिकाना हक होगा, इससे एक नई जल क्रांति का सूत्रपात होगा। सांसद डॉक्टर हीना वी. गवित ने संसद में बताया कि महाराष्‍ट्र के औरंगाबाद में कई जगह 5 दिन, 7 दिन या 9 दिन तक के अंतराल में पानी मिलता है। इस योजना में इस शहर को मॉडल बनाएं। हर दिन पानी मिल सके। इसके जवाब में शेखावत ने कहा कि 2019 में प्रधानमंत्री ने केवल ग्रामीण क्षेत्र के लिए जल जीवन मिशन की शुरुआत की थी, लेकिन ऐसी ही चिंताओं को देखते हुए अब जल जीवन मिशन शहरी का प्रावधान बजट में किया गया है। ग्रामीण की तरह शहरी क्षेत्र में भी चुनौती वाले जिले और इलाके को प्राथमिकता देंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं दो साल में तो नहीं कहूंगा, लेकिन ये कहूंगा कि जहां ज्‍यादा चुनौती है, वहां प्राथमिकता दी जाए। आने वाले समय में एक भी घर ऐसा नहीं हो, जो गंदा पानी, बिसैला पानी पीने को मजबूर हो या किसी मां-बहन को घर के बाहर से पानी लाने का अभिशाप झेलना पड़े।
सांसदों से अपील जल उपलब्‍धता के लिए जहां-जहां फंड कराएं काम
केंद्रीय मंत्री ने भूजल दोहन को लेकर कहा कि हमारी सबसे अधिक निर्भरता भूमिगत जल पर है। इससे ना सिर्फ पानी कम हुआ है, बल्कि अति दोहन के कारण गुणवत्‍ता भी खराब हुई है। इस दिक्‍कत को दूर करने के लिए जलशक्ति अभियान चलाया था। इसमें पानी की बहुत जरूरत वाले जिलों को शामिल किया था। 252 जिलों में पिछली बार किया था तो अनेक सांसद साथियों ने पत्र लिखकर आग्रह किया था कि हमारे यहां के जिले को भी शामिल करें। इस वर्ष की योजना में देश के सभी जिलों को शामिल किया गया है। अभी तक आपूर्ति के पहलू पर काम कर रहे थे, अब मांग की तरफ से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि अटल भूजल योजना लागू की है, जिसमें 7 सबसे अधिक चुनौती वाले राज्‍यों को शामिल करके 6000 करोड़ रुपए की सहायता से भूजल सुधार पर काम कर रहे हैं। उन्‍होंने सांसदों से कहा कि अबकी बार 15वें वित्‍त आयोग ने केवल जल संबंधित मामलों के लिए करीब 18 हजार करोड़ रुपए की निधि दी है। पिछली बार करीब 15 हजार करोड़ रुपए की निधि दी थी। जिला स्‍तर पर यह ठीक तरह से लागू हो, इसमें सांसद सहयोग करें।

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