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अबुल असरार रमज़ी इटावी बहैसियत शाइर और नस्रनिगार पुस्तक का विमोचन

उर्दू साहित्य और पत्रकारिता का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज

नई दिल्ली, उर्दू पत्रकारिता की 200वीं वर्षगांठ के अवसर पर, बज़्मे अत्फ़ाल की मेज़बानी में डॉ. शाहिद अहमद जमाली लिखित अबुल असरार रमज़ी इटावी बहैसियत शाइर और नस्स्रनिगार पुस्तक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ शाइर बर्क़ी आज़मी ने कहा कि दाग़ देहलवी स्कूल की उर्दू साहित्य में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। रमज़ी इटावी ने उर्दू की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका शाइर के लिए साहित्यिक आलेखों की एक श्रृंखला लिखकर साहित्य और साहित्यिक पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट और उल्लेखनीय काम किया है।

अबुल असरार रमज़ी इटावी बहैसियत शाइर और नस्रनिगार पुस्तक का विमोचन

आगरा से दिल्ली आए मशहूर शाइर दिल ताज महली ने कहा कि मशहूर शाइर सीमाब अकबराबादी के शागिर्द रमज़ी इटावी 1932 में इटावा से जोधपुर चले गए थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान उर्दू अकादमी ने सहरा में भटकता चांद शीर्षक से उनका काव्य संग्रह प्रकाशित किया है। प्रो प्रेम शंकर श्रीवास्तव ने उन पर एक मोनोग्राफ संकलित किया है। प्रसिद्ध शाइरा चश्मा फ़ारूक़ी ने कहा है कि स्वतंत्रता संग्राम पर रमज़ी इटावी की लिखी नज़्में आलोचक डॉ फिरोज लिखित नग़माते आज़ादी पुस्तक में शामिल हैं।

अबुल असरार रमज़ी इटावी बहैसियत शाइर और नस्रनिगार पुस्तक का विमोचन

आलोचक डॉ. रिफत अख्तर की आलोचनात्मक पुस्तक अदब के जिहाद में भी उनका कलाम शामिल किया गया है। उनके बारे में यह जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है कि वे एक बहुत अच्छे गद्य लेखक भी थे। अज़ीज़ा मिर्जा ने कहा कि ऐसा महान शाइर पर उर्दू की एक संगोष्ठी होनी चाहिए। उर्दू समाचार पत्रों और साहित्यिक पत्रिकाओं में उनके व्यक्तित्व और नागरी पर विशेषांक प्रकाशित करना चाहिए।

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