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गोरखधंधा शब्द की व्याख्या

हिंदी शब्दों का बढ़ाएं ज्ञान,जिज्ञासा का करें समाधान

शब्द संदर्भ:-(102) गोरखधंधा

लेखक पार्थसारथि थपलियाल

जिज्ञासा

विश्नोईयों की ढाणी, मारवाड़ से हिम्मताराम जानना चाहते हैं गोरखधंधा कौन लोग करते हैं?

समाधान

गोरखधंधा कोई धंधा या रोज़गार नही है। इस शब्द को जानने के लिए हमें इसकी पृष्टभूमि जाननी आवश्यक है।
गोरख शब्द नाथ सम्प्रदाय का अति आदरणीय शब्द है। शब्द की व्याख्या समझें तो गोरख शब्द के तीन अर्थ हैं। एक है इंद्रियां और दूसरा गाय। इंद्रियों को रखनेवाला या इंद्रियों की रक्षा करनेवाला। गाय के संदर्भ में रख शब्द का अर्थ है रक्षा करनेवाला या गाय रखनेवाला। एक तीसरा अर्थ भी है नाथ सम्प्रदाय के प्रमुख योगी, जिनका नाम गोरखनाथ था। गोरखनाथ को शिव का अवतार माना जाता है। गोरखनाथ हठ योग के प्रवर्तक माने जाते हैं।

(अतिरिक्त जानकारी)

गोरखनाथ को योगी मत्स्येंन्द्रनाथ की सिद्धि का फल कहा जाता था। बड़ी रोचक कथा है इनके जन्म की। गुरु मत्स्येन्द्र नाथ एक बार भिक्षाटन पर निकले थे। एक घर पर अलख जगाई। एक महिला भिक्षा देने बाहर आई। उसकी उदासी का कारण पूछने पर पता चला कि उनका कोई बच्चा नही है। गुरु मत्स्येन्द्र नाथ ने एक चुटकी राख अपने कमंडल से निकाली, मंत्र पढ़कर उस महिला को दे दिया। कहा इसे खा लो, ईश्वर तुम्हारी मनोकामना पूरी करेगा। यह कहकर मत्स्येंद्रनाथ चले गए। 13 साल बाद एक बार फिर भिक्षा मांगने उसी घर पर पहुंचे। उन्होंने उस महिला से पूछा, बच्चा कहाँ है, अब तक 12 साल का हो गया होगा। महिला ने बताया कि उसे भय लगा और वह राख की चुटकी उसने नही खाई थी। पूछने पर महिला ने संकेत किया कि गोबर की उस ढेरी में फेंक दी थी। वहाँ जाकर देखा तो एक गाय अपना दूध निकालकर गड्ढे में गिरा रही है। गुरु ने आवाज़ दी तो बारह साल का लड़का बाहर निकल आया। नाम दिया गोरखनाथ। गुरु मत्स्येन्द्र नाथ उस बालक गोरखनाथ को अपने साथ ले गए और उन्हें कई योग और सिद्धियों की शिक्षाएं दी। गोरखनाथ जी ने गोरखपुर में गोरक्ष पीठ की स्थापना की। इसी परंपरा में वर्तमान में योगी आदित्यनाथ इस पीठ के महंत हैं।

गोरखनाथ ने ईश्वर प्राप्ति के लिए हठ योग और आसान क्रिया विधा में सिद्धि प्राप्त की, वे सिद्ध पुरुष हो गए थे। गुरु गोरखनाथ की साधना पद्धति समझनी काफी कठिन थी। वे कई प्रकार की क्रियाएं करते रहते थे जो आम आदमी के समझ में आसानी से नही आती थी। उनके बाद बहुत से बाबाओं ने लकड़ी के कुछ ऐसे उपकरण बनाये, जिनसे वे भोले भाले लोगों को आकर्षित कर धन कमाने में लग गए। ऐसा प्राचीन काल से चल रहा है कि जो असली न बना सके उन्होंने नकली को असली रूप देने की चेष्टा की। जैसे लकड़ी, कौड़ियों और तारों का ऐसा उपकरण बनाया जिसमे विभिन्न छेदों से कौड़ियों को सफलता पूर्वक निकलना होता था। एक तरह का भूल भुलैया। कुछ लोग इस कला से अपनी आजीविका चलाने लगे। इसी धंधे को गोरख धंधा कहा गया। वैसे किसी उलझन भरी प्रक्रिया को हाल करने को गोरख धंधा कहते हैं। आजकल तो पूरा देश ही गोरख धंधा चला रहा है। भारत की राजनीति इसका अच्छा उदाहरण है।

“यदि आप भी किसी हिंदी शब्द का अर्थ व व्याख्या चाहते हैं तो अपना प्रश्न यहां पूछ सकते हैं।”

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