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जालौर, वर्षों से बंद पड़ा केदारेश्वर गौशाला चौरा अब गायों की सेवा के लिए पुनः खोल दिया है। ग्रामवासियों ने मिलकर गौरक्षा का प्रण लिया यह गौशाला वर्ष 2013 में बंद हो गई थी। लेकिन गायों की सेवा निरंतर जारी थी। इस गौशाला में पहले लगभग 2,000 से अधिक गाय थी उनके लिए हरे चारे की व्यवस्था एवं अन्य खाद्य सामग्री हमेशा ग्रामवासी उपलब्ध करवाते थे। फिर इस गौशाला में जितनी भी गाय थी उनको पथमेड़ा (विश्व की सबसे बड़ी गौशाला) भेज दिया गया। वर्तमान में गाय-बैल की एक स्थान पर सेवा नहीं हो पाती थी इसीलिए इस गौशाला को पुनः शुभारंभ किया गया।

गौशाला का शुभारंभ

इस शुभ अवसर पर हेमराज चौधरी पंचायत समिति सदस्य (प्रतिनिधि) ने कहा गौसेवा करने वाला व्यक्ति पुण्य का भागीदार बनता है। एक मात्र गाय की सेवा करने से ही मन, वाणी, कर्म और शरीर की पवित्रता संभव है। गौ सेवा से व्यक्ति अपने सम्पूर्ण कुल की रक्षा कर सकता है, सम्पूर्ण सृष्टि की सुरक्षा केवल गौमाता की रक्षा से ही संभव है। आजकल देखा जाता है कि कई पशु रोड पर आवारा घूमते हैं इसीलिए उनको एक स्थान मिलना आवश्यक है।

गौशाला का शुभारंभ

इसका मात्र एक ही उपाय है कि गौशाला का पुनः शुभारंभ हो। पूर्व सरपंच रतन देवासी ने कहा गाय की सेवा मनुष्य के लिए सबसे बड़ा पुण्य है। इस पुण्य से किसी को वंचित नहीं रहना चाहिए। इस जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को प्रभु का सुमिरन करना चाहिए। साहित्यकार गर्ग ने बताया हिन्दू धर्म के अनुसार गाय में 33 कोटि देवी-देवता निवास करते हैं।

गौशाला का शुभारंभ

इसका मतलब गाय में 33 प्रकार के देवता निवास करते हैं। ये देवता हैं- 12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र और 2 अश्‍विन कुमार। ये मिलकर कुल 33 होते हैं। पौराणिक मान्यताओं व श्रुतियों के अनुसार, गौएं साक्षात विष्णु रूप हैं, गौएं सर्व वेदमयी और वेद गौमय हैं। भगवान श्रीकृष्ण को सारा ज्ञानकोष गोचरण से ही प्राप्त हुआ। शास्त्रों के अनुसार कुछ पशु-पक्षी ऐसे हैं जो आत्मा की विकास यात्रा के अंतिम पड़ाव पर होते हैं। उनमें से गाय भी एक है। इसके बाद उस आत्मा को मनुष्य योनि में आना ही होता है। कत्लखाने जा रही गाय को छुड़ाकर उसके पालन-पोषण की व्यवस्था करने पर मनुष्य को गौयज्ञ का फल मिलता है।

गौशाला का शुभारंभ

इस अवसर पर पूर्व सरपंच प्रतिनिधि श्रवण बिश्नोई, अनूप सिंह राजपूत, नरेश देवासी, डूगरसिंह, लक्ष्मण सिंह कबावत, वीरमा राम चौधरी, पेमा राम बिश्नोई, भीखाराम रावणा, मेसा राम देवासी, डुगराराम, गणेशाराम, ईश्वर गर्ग, भगवाना राम, लक्ष्मणा राम, अरविंद गर्ग, जोराराम, पुनमाराम, उम्मेद सिंह राजपूत, रामजी राम, रुगा राम, कृष्ण सिंह, सावला राम, चमना राम, उदाजी चौधरी, श्रीराम, नरसी राम,भंवरलाल, गौदा राम, तुलसा राम, लुंभा राम समेत सैकड़ों ग्रामवासी उपस्थित थे।

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