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सूर्या के टीजर में चिकित्सकों के विरुद्ध हिंसा के चित्रण पर आईएमए जोधपुर का कड़ा विरोध

  • राजस्थान आईएमए ने उठाया मामला
  • जोधपुर शाखा भी कानूनी कार्रवाई और जनहित याचिका के विकल्प पर करेगी विचार

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),सूर्या के टीजर में चिकित्सकों के विरुद्ध हिंसा के चित्रण पर आईएमए जोधपुर का कड़ा विरोध। फिल्म ‘सूर्या-अंत से आरंभ तक’ के टीजर में चिकित्सकों एवं अस्पतालों के नकारात्मक चित्रण तथा स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध हिंसा दिखाए जाने पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन,जोधपुर ने कड़ी आपत्ति व्यक्त की है।

आईएमए जोधपुर के सचिव डॉ.प्रदीप जैन ने बताया कि राजस्थान राज्य आईएमए ने मामले को आगे बढ़ाते हुए फिल्म के निर्माता-निर्देशक एवं केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को औपचारिक पत्र भेजा है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ.महेश शर्मा एवं मानद राज्य सचिव डॉ.एनके अग्रवाल सहित राज्य पदाधिकारियों ने रिलीज से पहले विवादित सामग्री की निष्पक्ष समीक्षा, आपत्तिजनक दृश्यों में आवश्यक संशोधन और स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध हिंसा का महिमामंडन रोकने की मांग की है।

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अन्य स्तरों पर भी विरोध की पहल हुई है। हरियाणा आईएमए ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से फिल्म की रिलीज रोकने की मांग की है,जबकि राष्ट्रीय आईएमए ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर समीक्षा और सुधारात्मक कार्रवाई का आग्रह किया है।

जोधपुर आईएमए पदाधिकारियों ने रखे सुझाव
अध्यक्ष डॉ.सिद्धार्थ राज लोढ़ा ने कहा कि जोधपुर से भी इस विषय पर सशक्त आवाज उठनी चाहिए। उन्होंने कहा, यह चिकित्सकों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है,जिसे गंभीरता और मजबूती से उठाने की आवश्यकता है। मैं फिलहाल जोधपुर से बाहर हूं,लेकिन इस विषय में लगातार संपर्क में रहूंगा। उन्होंने कार्यकारिणी सदस्यों से विरोध की ठोस रूपरेखा तैयार करने का आह्वान किया।

सदस्य डॉ.प्रदीप शर्मा (निदेशक,विनायका हॉस्पिटल) ने सुझाव दिया कि जोधपुर आईएमए की ओर से जनहित याचिका (PIL) दायर करने की संभावना पर विधिक राय ली जानी चाहिए। इससे पूरे देश में जोधपुर आईएमए की दृढ़ प्रतिबद्धता का संदेश जाएगा।

पूर्व अध्यक्ष डॉ.संजय मकवाना (निदेशक, वसुंधरा हॉस्पिटल) ने फिल्म के निर्माता एवं निर्देशक के विरुद्ध उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर गंभीरता से विचार करने का सुझाव दिया।

वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट डॉ. एनएम मेहता ने सुझाव दिया कि आईएमए जोधपुर अथवा राजस्थान को फिल्म की रिलीज पर रोक के लिए न्यायालय में रिट याचिका दायर करने की पहल करनी चाहिए। यदि फिल्म रिलीज हो चुकी हो तो आगामी प्रदर्शनों पर रोक की मांग की जानी चाहिए।

डॉ.आरके बेहरा,डॉ. रामकिशन सोनी,डॉ. मुरलीधर पालीवाल,डॉ. लवलीन जनेवजा एवं डॉ. विजय बलानी ने भी फिल्म के हिंसापूर्ण टीजर की कड़ी निंदा की।

डॉ.प्रदीप जैन ने कहा कि किसी व्यक्ति के कथित अनैतिक आचरण के आधार पर पूरे चिकित्सा समुदाय को अविश्वसनीय दिखाना अनुचित है। चिकित्सकों तथा अस्पतालकर्मियों के विरुद्ध हिंसा को न्याय के स्वीकार्य माध्यम के रूप में प्रस्तुत करना चिंताजनक है। संगठन कार्यकारिणी में विचार- विमर्श और विधिक परामर्श के आधार पर आगे की रणनीति तय करेगा।