मोटर दुर्घटना में मृत्यु के बाद दाखिल आयकर रिटर्न में बताई गई आय से मुआवजे की गणना
राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),मोटर दुर्घटना में मृत्यु के बाद दाखिल आयकर रिटर्न में बताई गई आय से मुआवजे की गणना। राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मुकेश राजपुरोहित ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए यह व्यवस्था दी है कि मोटर दुर्घटना में मृत्यु हो जाने के बाद भी दाखिल आयकर रिटर्न में बताई गई आय के हिसाब से मुआवजे की गणना होगी। अभी तक मृत्यु से पहले दाखिल आयकर रिटर्न के हिसाब से ही मुआवजे की गणना होती आई है। संभवत: राजस्थान उच्च न्यायालय के इस पहली नजीर से दावेदारों को काफी राहत मिलेगी।
फैसले के बाद टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी को बढ़ा हुआ मुआवजा राशि 9 लाख 45 हजार 387 रुपए मय 6 फीसदी ब्याज 4 सितम्बर 2019 से देना होगा। मोहन लाल और सरला देवी नागर ने अधिवक्ता सुनील भंडारी के माध्यम से अपील दायर कर कहा कि उनके पुत्र राकेश का 1 मई 2011 को मोटर दुर्घटना में निधन होने पर मोटर यान दुर्घटना दावा अधिकरण,पाली ने मृतक के मृत्यु के बाद दाखिल आयकर रिटर्न को मुआवजे के वास्ते नहीं मानकर वित्तीय वर्ष 2009-10 की आय 21741रुपए मानते हुए मुआवजा निर्धारित किया।
अधिवक्ता सुनील भंडारी ने बहस करते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2010-11 का आयकर रिटर्न वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पूर्व भरा ही नहीं जा सकता है तो मौत के बाद में दाखिल आयकर रिटर्न में बताई गई वार्षिक आय 269537 रुपए के हिसाब से मुआवजे की गणना होनी चाहिए। बीमा कंपनी की ओर से कहा गया कि अधिकरण ने मृत्यु से पहले का अंतिम आयकर रिटर्न मानकर सही मुआवजा दिया है सो अपील खारिज की जाए।
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राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मुकेश राजपुरोहित ने अपील मंजूर करते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2010-11 का आयकर रिटर्न नियमानुसार निर्धारित अवधि में दाखिल किया गया है और बीमा कंपनी यह साबित करने में अक्षम रही कि मृत्यु के बाद में भरा गया आयकर रिटर्न बनावटी या जाली है।
उन्होंने मृतक की वित्तीय वर्ष 2009-10 की आय 217741 रुपए के बजाए वित्तीय वर्ष 2010-11 की आय 269537 रुपए निर्धारित करते हुए मुआवजा राशि में 9 लाख 45 हजार 387 रुपए की बढ़ोतरी करते हुए 40 लाख 95 हजार 683 रुपए की जगह 50 लाख 41 हजार 70 रुपए मुआवजा पारित कर चार सितंबर 2019 से 6 फीसदी ब्याज भी अदा करने का आदेश दिया।
