राष्ट्रीय विज्ञान दिवस:आईआईटी में वैज्ञानिक नेतृत्व और राष्ट्र-निर्माण पर व्याख्यान
- प्रो.दिनेश कुमार असवाल ने प्रस्तुत किया असवाल मॉडल
- विज्ञान प्रबंधन,संस्थागत सशक्तिकरण और भारत के नवाचार तंत्र को मजबूती देने की रूपरेखा
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),आईआईटी जोधपुर में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 के अवसर पर एक प्रेरक संस्थान व्याख्यान का आयोजन किया गया,जिसमें वैज्ञानिक नेतृत्व, संस्थागत सुदृढ़ता और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की भूमिका को भारत के भविष्य निर्माण के संदर्भ में रेखांकित किया गया।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी को सीवी रमन द्वारा रमन प्रभाव की खोज की स्मृति में मनाया जाता है। इस ऐतिहासिक खोज के लिए उन्हें वर्ष 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया,जिसने भारत को वैश्विक वैज्ञानिक मानचित्र पर सशक्त पहचान दिलाई।
इस अवसर का मुख्य आकर्षण “Managing Science, Empowering India: The Aswal Model” विषय पर संस्थान व्याख्यान रहा,जिसे प्रो. दिनेश कुमार असवाल,सदस्य, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए),भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया।
अपने विस्तृत वैज्ञानिक प्रशासन, संस्थान निर्माण एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण के अनुभवों को साझा करते हुए प्रो.असवाल ने कहा कि भारत का वैज्ञानिक भविष्य केवल नई खोजों पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि इस बात पर भी समान रूप से निर्भर करता है कि विज्ञान को किस प्रकार संगठित,संचालित, वित्तपोषित और समाज की प्राथमिकताओं से जोड़ा जाता है।
उन्होंने आधुनिक जीवन की “अदृश्य आधारशिला”- मजबूत वैज्ञानिक संस्थान,विश्वसनीय मानक और सटीक मापन प्रणाली की भूमिका पर प्रकाश डाला,जो स्वास्थ्य सेवाओं,विनिर्माण,व्यापार, पर्यावरण संरक्षण,सार्वजनिक सुरक्षा और राष्ट्रीय तैयारी जैसे क्षेत्रों को निरंतर सशक्त बनाती है।
विज्ञान प्रशासन और राष्ट्रीय लचीलापन
अपने संबोधन में प्रो.असवाल ने प्रभावी शोध प्रबंधन और सुदृढ़ वैज्ञानिक प्रशासन की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि यह किसी भी राष्ट्र की जोखिमों का पूर्वानुमान लगाने,लचीलापन विकसित करने और संकटों का प्रभावी समाधान करने की क्षमता को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि जब विज्ञान का प्रशासन सुदृढ़ होता है,तो प्रौद्योगिकी वास्तव में जन-केंद्रित बनती है और समाज कल्याण में सार्थक योगदान देती है।
व्याख्यान का एक प्रमुख विषय “गुणवत्ता अवसंरचना” और “मेट्रोलॉजी”(मापन विज्ञान) की भूमिका रहा। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर मान्य मानक, परस्पर अनुकूल परीक्षण ढांचे और सटीक मापन प्रणाली औद्योगिक प्रतिस्पर्धा,सार्वजनिक स्वास्थ्य की विश्वसनीयता और सतत विकास की आधारशिला हैं।
भारत की ऐतिहासिक संस्थान- निर्माण यात्रा को वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से जोड़ते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि रणनीतिक नेतृत्व और तंत्र आधारित सोच के माध्यम से भारत तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ सकता है।
“असवाल मॉडल”-उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व की परिकल्पना
प्रो.असवाल ने “असवाल मॉडल” को वैज्ञानिक नेतृत्व और संस्थागत विकास की एक व्यावहारिक एवं अनुभव-आधारित रूपरेखा के रूप में प्रस्तुत किया।यह मॉडल टीमवर्क,जवाबदेही,स्पष्ट उद्देश्य और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण पर आधारित है,जो वैज्ञानिक प्रयासों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव से जोड़ता है।
उनका मुख्य संदेश स्पष्ट था जब विज्ञान का प्रबंधन प्रभावी ढंग से किया जाता है,तब वह राष्ट्र सशक्तिकरण का एक शक्तिशाली साधन बन जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रति आईआईटी जोधपुर की प्रतिबद्धता
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का यह आयोजन आईआईटी जोधपुर की वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने, शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने और युवा इंजीनियरों,शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को ईमानदारी और उद्देश्य के साथ उत्कृष्टता की ओर प्रेरित करने की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है।
वैज्ञानिक नेतृत्व और सुशासन पर ऐसे सार्थक संवादों के माध्यम से आईआईटी जोधपुर एक सशक्त, नवाचार-आधारित और आत्म विश्वासी भारत के निर्माण में निरंतर योगदान दे रहा है।
