देख बहारें होरी की…..

  • आकाशवाणी की प्रस्तुति
  • बृज रंग की होरी महोत्सव

(रिपोर्ट-पार्थसारथि थपलियाल)

दिल्ली(दूरदृष्टीन्यूज),देख बहारें होरी की…आकाशवाणी दिल्ली के रंग भवन में होली के अवसर पर ‘बृज रंग होरी’ महोत्सव में सुविख्यात गायिका विदुषी माधुरी शर्मा ने बृज की होरी के विविध रंगों से ऐसा रंग जमाया कि दर्शक भी गाने लगे..देख बहारें होरी की। 2 मार्च की दोपहर बाद दर्शकों से भरे सभागार में विदुषी माधुरी शर्मा ने आकाशवाणी महानिदेशक राजीव कुमार जैन,जितेंद्र पुरुथी, उपमहानिदेशक (अभियांत्रिकी) दिल्ली केंद्र की कार्यक्रम प्रमुख मनीषा जैन,सहायक निदेशक प्रमोद कुमार वत्स के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर विशेष कार्यक्रम बृज रंग होरी का शुभारंभ किया।

माधुरी ने रसिया गीतों के पितामह कहे जाने वाले घासी राम की रचना ‘बांके बिहारी बांकी मरोर,चित हर लीनों है चोर’ से बृज रंग होरी को मंच पर उतारा-राधा संग कृष्ण की होरी दृश्य मनमोहक नृत्य और गीत में अद्भुत रंग बिखेरे-होली खेलूंगी कन्हैया तोसे लाल होली खेलूंगी… आज होरी खेलूंगी कन्हैया होरी खेलूंगी..,राधा सखियों ने नटखट कन्हैया के प्रति पिचकारी इस तरह से मारी-कन्हैया रंग डारेगो सखी घूंघट नाय खोलूं…सखी घूंघट नाय खोलूं।

होली पर चैन्नई एग्मोर-जैसलमेर- चैन्नई सेंट्रल स्पेशल ट्रेन का संचालन

कान्हा धरे रे मुकुट खेलें होली…पारंपरिक गीत का अलग ही आनंद था। ऐसे गीत अब बहुत कम सुनाई देते हैं। आकाशवाणी ने ऐसे गीतों को अभी तक लुप्त नहीं होने दिया, यह हर्ष की बात है। मोरे श्याम! मोपे ऐसो चटक रंग डारियो… बृज में चौरासी कोसी परिक्रमा होती है,इस परिक्रमा का एक संगीत रूपक मंचस्थ कलाकारों ने प्रस्तुत किया-आज रंग बरसाने आये हैं नटवर नंद किशोर…बरसाने की लठ्ठमार होली प्रस्तुत की।

यह प्रस्तुति हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संजोने की प्रेरणा दे रही थी।कार्यक्रम का समापन फूलों की होली के साथ हुआ। सभागार में बैठे दर्शक मंच के आगे फूलों की होली में मस्त हो गये। बहुत देर तक परंपरा और आधुनिकता एक साथ जुड़ गए। होली के रसिक श्रोताओं ने इस कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया। विरासत के रूप में यह एक सफल आयोजन रहा।मंच संचालन नीलम मलकानिया ने किया।