बायो टॉयलेट से हो रहा ट्रेनों में गंदगी का पर्यावरण अनुकूल निस्तारण

  • जोधपुर वर्कशॉप में लगेगा बायो डाइजेस्टर बैक्टीरिया उत्पादन संयंत्र
  • रेल पटरियां रहने लगी जंग रहित, गंदगी बिखरने से मुक्ति
  • स्वच्छ भारत मिशन को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),बायो टॉयलेट से हो रहा ट्रेनों में गंदगी का पर्यावरण अनुकूल निस्तारण।भारतीय रेलवे द्वारा स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों के अंतर्गत उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर रेल मंडल में संचालित ट्रेनों में आधुनिक बायो-टॉयलेट प्रणाली का सफलता पूर्वक उपयोग किया जा रहा है। इस प्रणाली से ट्रेनों में उत्पन्न मल-मूत्र एवं जैव अपशिष्ट का वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल तरीके से निस्तारण हो रहा है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि ट्रेनों में लगाए गए बायो- टॉयलेट में विशेष जैविक सूक्ष्मजीव कार्य करते हैं,जिन्हें बायो- डाइजेस्टर बैक्टीरिया कहा जाता है। ये बैक्टीरिया मल-मूत्र को विघटित कर उसे पानी,गैस एवं सुरक्षित कीचड़ में परिवर्तित कर देते हैं, जिससे पटरियों और स्टेशनों पर गंदगी फैलने की समस्या समाप्त हो गई है।

डीआरएम ने बताया कि बायो- टॉयलेट प्रणाली में एनारोबिक बैक्टीरिया,मीथेन उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया तथा अपघटक बैक्टीरिया सक्रिय रहते हैं,जो बिना ऑक्सीजन के भी प्रभावी ढंग से कार्य करते हैं। इस तकनीक से न केवल पटरियों को जंग लगने से बचाया जा रहा है बल्कि स्टेशन परिसरों की स्वच्छता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

जोधपुर वर्कशॉप में लगेगा बैक्टीरिया उत्पादन संयंत्र
मुख्य कारखाना प्रबंधक रवि मीणा ने बताया कि बायो-टॉयलेट के लिए इन बैक्टीरिया की खरीद अभी दिल्ली फर्म से की जा रही है लेकिन अब अजमेर वर्कशॉप की तर्ज पर जोधपुर वर्कशॉप में भी बायो- डाइजेस्टर बैक्टीरिया उत्पादन संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके स्थापित होने से संबंधित मंडल के सभी कोच डिपो को नियमित रूप से बैक्टीरिया की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। बोर्ड से मंजूरी के लिए यह प्रस्ताव जोनल मुख्यालय को प्रेषित किया जाएगा।

डीआरडीओ द्वारा विकसित तकनीक
डीआरएम ने बताया कि बायो- टॉयलेट में प्रयुक्त बैक्टीरिया रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित किए गए हैं,जो भारतीय जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल हैं और अत्यधिक गर्मी व ठंड में भी प्रभावी रहते हैं।

यात्रियों से सहयोग की अपील:-
डीआरएम ने यात्रियों से अपील की कि बायो-टॉयलेट में प्लास्टिक, कपड़े,बोतलें,सैनिटरी नैपकिन अथवा अन्य ठोस वस्तुएं न डालें, जिससे प्रणाली सुचारू रूप से कार्य करती रहे।

बायो-टॉयलेट प्रणाली के सफल क्रियान्वयन से कोचों में दुर्गंध में कमी आई है और रेलवे ट्रैक व स्टेशन क्षेत्र स्वच्छ बने हैं, जिससे स्वच्छ भारत मिशन को भी मजबूती मिली है।

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