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संविधान दिवस पर IIT जोधपुर ने दोहराई प्रतिबद्धता

राष्ट्रीय मूल्यों,नैतिक अनुसंधान और सामाजिक उत्थान के प्रति समर्पित

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),संविधान दिवस पर IIT जोधपुर ने दोहराई प्रतिबद्धता। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर ने संविधान दिवस को एक गरिमामय और प्रेरणादायी समारोह के साथ मनाया,जिसमें शिक्षा,अनुसंधान,नवाचार और सेवा के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को उजागर किया गया। इस अवसर पर संकाय सदस्यों,कर्मचारियों,विद्यार्थियों और विशिष्ट अतिथियों ने एकजुट होकर भारत के संविधान में निहित मूल्यों पर मनन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन से हुई,जिसके बाद प्रस्तावना (Preamble) का सामूहिक वाचन किया गया।सभी उपस्थित जन ने न्याय,स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के उन आदर्शों के प्रति पुनः अपनी आस्था व्यक्त की,जो भारत गणराज्य का आधार स्तंभ हैं।

IIT जोधपुर के निदेशक,प्रो. अविनाश के.अग्रवाल ने सभा को संबोधित करते हुए प्रेरक संदेश दिया और बताया कि संविधान एक जीवंत मार्गदर्शक है,जो प्रत्येक शैक्षणिक प्रयास को दिशा देता है और ज्ञान को जनहित में बदलने की प्रेरणा प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि संविधान हमें स्वतंत्रता,समानता,न्याय और बंधुत्व की प्रेरणा देता है। IIT जोधपुर में हम इस दृष्टि को अनुसंधान को सामाजिक उत्थान और नवाचार को राष्ट्रीय प्रगति में बदलकर सम्मान देते हैं। संविधान दिवस पर हम यह संकल्प दोहराते हैं कि हम ईमानदारी,संवेदनशीलता और उद्देश्यपूर्ण नवाचार को अपनाने वाले जिम्मेदार इंजीनियर,वैज्ञानिक और नेता तैयार करेंगे।

IIT जोधपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने उभरते डिजिटल प्रभावों के युग में संवैधानिक मूल्यों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि
एक नई तरह का उपनिवेशवाद उभर रहा है,जो भूमि का नहीं,बल्कि मन का है। हमारा संविधान हमें जागरूक रहने,भारत की सभ्यतागत बुद्धि में जड़ें बनाए रखने और प्रकृति व सभी जीवन के प्रति सम्मान रखने का आह्वान करता है। तभी हम इस नए युग में अपनी स्वतंत्रता सुरक्षित रख पाएंगे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि,प्रो. राकेश सिन्हा,पूर्व सांसद(राज्यसभा) ने संविधान की दार्शनिक और सांस्कृतिक आधारशिला पर गहन विचार प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा की भारत एक जीवंत लोकतंत्र होने के साथ-साथ गहरी सांस्कृतिक जड़ों वाला एक प्राचीन सभ्यता-समृद्ध राष्ट्र भी है। बाबासाहेब अम्बेडकर ने हमारे संविधान को ‘स्वराज’ की भावना में स्थापित किया,जो हमें अपनी बौद्धिक समृद्धि और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को पुनः खोजने का संदेश देता है। संविधान विचारों,भावनाओं और राष्ट्रीय संकल्प को एक सूत्र में पिरोता है, और हमें अपने राष्ट्र की शक्तियों को भविष्य के लिए पुनर्जीवित करने का मार्ग दिखाता है।

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कार्यक्रम ने IIT जोधपुर की उस भूमिका को रेखांकित किया,जो वह एक राष्ट्रीय महत्त्व संस्थान (National Institute of Importance) के रूप में निभा रहा है,जहाँ आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक नेतृत्व और नवाचार आधारित सामाजिक प्रभाव पर विशेष बल दिया जाता है। AI-आधारित प्रिसिजन हेल्थकेयर,सतत प्रौद्योगिकियों व उन्नत इंजीनियरिंग शिक्षा सहित अपने विश्व-स्तरीय अनुसंधान और शैक्षणिक पहलों के माध्यम से संस्थान संविधान में निहित राष्ट्रीय प्रगति के दायित्व को निरंतर निभा रहा है।

कार्यक्रम का समापन IIT जोधपुर के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत एक मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ,जिसमें संगीत और प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की विविधता में एकता की भावना को प्रदर्शित किया गया। समारोह का समापन राष्ट्रीय गान के साथ हुआ, जिसने संविधान में निहित आदर्शों और मूल्यों के प्रति संस्थान की सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया।