श्रद्धा से मनाया समर्थ सदगुरु रामलाल सियाग का 100वां अवतरण दिवस
अवतरण शताब्दी वर्ष में देश विदेश में होगे विशेष कार्यक्रम
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),श्रद्धा से मनाया समर्थ सदगुरु रामलाल सियाग का 100वां अवतरण दिवस। समर्थ सद्गुरुदेव रामलाल सियाग के हजारों शिष्यों ने गुरुदेव का 100वां अवतरण दिवस श्रद्धा,उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया। भारत के 20 से अधिक राज्यों एवं नेपाल, इजराइल आदि देशों से आए पांच हजार से अधिक साधकों ने गुरुदेव सियाग की दिव्य वाणी में शक्तिपात दीक्षा से कुण्डलिनी जागरण के दर्शन की जानकारी ली और सामूहिक ध्यान किया।
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ध्यान के दौरान साधकों को स्वतरू यौगिक क्रियाएं जैसे आसन,बंध, प्राणायाम और मुद्राएं होने लगी जो तन,मन और आत्मा की शुद्धि के लिए मातृ शक्ति कुंडलिनी अपने अधीन करवाती है जिससे साधक के त्रिविधताप शांत होते हैं।समारोह का प्रारम्भ अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र जोधपुर के संरक्षक राजेंद्र चौधरी ने गुरुदेव सियाग की पूजा अर्चना से किया। केंद्र के अध्यक्ष डॉ कुलदीप रतनू ने महर्षि अरविन्द की अध्यात्मिक साधना की परिणिति के रूप में 24 नवम्बर 1926 को हुई सिद्धि एवं भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की अनुभूति के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने गुरुदेव सियाग द्वारा बीकानेर में की गयी अध्यात्मिक साधना की अनुभूतियाँ पांडिचेरी में महर्षि अरविन्द और उनकी फ्रांसीसी शिष्या श्रीमां मदर को होने की चर्चा की। सम्पूर्ण मानवता के दिव्य रूपांतरण का अद्भुत मार्ग प्रशस्त होकर भारतीय योगदर्शन के विश्व दर्शन के रूप में स्थापित होने की भविष्यवाणी सत्य प्रमाणित होने की तथ्यात्मक प्रस्तुति करते हुए डॉ रतनू ने साधकों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
गुरुदेव सियाग के शिष्यों द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों एवं विदेशों में योग एवं ध्यान के जो कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं उनकी विस्तृत जानकारी भी उपस्थित साधकों को दी गई।आगामी 21 दिसम्बर को अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिवस पर सामूहिक ध्यान के कार्यक्रम आयोजित करने की योजना भी तय की गयी। समारोह में संस्था द्वारा प्रकाशित वर्ष 2026 के कैलेंडर का विमोचन भी किया गया।
