स्टेट कोटा सीट के लिए अयोग्य घोषित करने को ठहराया मनमाना व अनुचित
- राजस्थान हाईकोर्ट
- नीट (यूजी)-2025 एमबीबीएस कोर्स एडमिशन का मामला
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),स्टेट कोटा सीट के लिए अयोग्य घोषित करने को ठहराया मनमाना व अनुचित।राजस्थान उच्च न्यायालय ने नीट (यूजी)-2025/एमबीबीएस कोर्स एडमिशन मामले पर सुनवाई करते हुए स्टेट कोटा सीट के लिए अयोग्य घोषित कर देने को मनमाना व अनुचित बताया है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग/एनएमसी, दिल्ली द्वारा दिव्यांगजन के लिए जारी गाइडलाइन ऑल इंडिया कोटा प्रवेश और स्टेट कोटा मेडिकल कोर्स प्रवेश दोनों ही मामलों में समान रूप से बाध्यकारी है। एनएमसी अधिकृत दिव्यांगता मेडिकल बोर्ड द्वारा दिव्यांग अभ्यर्थी को चिकित्सा कोर्स के लिए फ़िट प्रमाणित कर देने के बावजूद स्टेट कोटा सीट के लिए अयोग्य घोषित कर देने को ठहराया मनमाना व अनुचित बताया।
हाइकोर्ट एकलपीठ ने याचिका स्वीकारते हुए अहम निर्देश दिया कि द्वितिय राउंड काउन्सलिंग में दिव्यांगजन वर्ग मेरिट के अनुरूप याची को मेडिकल कॉलेज में अविलम्ब प्रवेश दिया जाए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने पैरवी की। राजस्थान हाइकोर्ट न्यायाधीश डॉ. नूपुर भाटी की एकलपीठ से भारी राहत मिली। याचिकाकर्ता को एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश से अयोग्य घोषित कर देने को लेकर रिट याचिका दायर हुई थी।
याचिका कर्ता (एक्स) की ओर से अधिवक्ता यशपाल ख़िलेरी ने रिट याचिका पेश कर बताया कि याची के बायें हाथ मे गैर-कार्यात्मक अंगूठा व दाएं हाथ के अंगूठे में अनुप्रस्थ कमी,बौनापन होने व कम दृष्टि होने से उसकी कुल स्थाई विकलांगता 72 प्रतिशत होने से वह विशेष योग्यजन श्रेणी से संबंधित हैं। याची ने राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित नीट (यूजी)- 2025 लिखित परीक्षा दी और 14 जून 2025 को घोषित रिजल्ट में याची ने विकलांग श्रेणी में अच्छी आल इंडिया रैंक हासिल की। ततपश्चात उसने यूडिआईडी नंबर प्राप्त करते हुए ऑनलाइन डिसएबिलिटी प्रमाण पत्र बनवाया।
वर्तमान नीट (यूजी)-2025 के लिए दिव्यांग बच्चों के एमबीबीएस कोर्स प्रवेश के लिए विकलांगता जांचने के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग/एनएमसी ने 18 जुलाई, 2025 की गाइड लाइन जारी की,जिसके अनुसार कुल 16 सरकारी मेडिकल कॉलेजो को अलग अलग विकलांगता जांचने के लिए प्राधिकृत किया गया।
राजस्थान राज्य काउंसलिंग बोर्ड (सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज, जयपुर) के समक्ष 04 अगस्त को याची ने सरकारी लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज,नई दिल्ली द्वारा मेडिकल कोर्स कर सकने में क्रियात्मक सक्षमता परखने के बाद जारी डिसएबिलिटी प्रमाण पत्र 28 जुलाई 2025 पेश कर दिया। जारी उक्त प्रमाण पत्र में याची को पीडब्ल्युडी(पर्सन विथडिसएबिलिटी) आरक्षण के लिए योग्य/पात्र माना। बावजूद इसके,राज्य काउंसलिंग बोर्ड ने हठधर्मिता दिखाते हुए एनएमसी की गाइडलाइंस के विपरीत जाकर एक मेडिकल बोर्ड बनाकर उससे द्वितीय ओपिनियन लेकर याची को अपात्र मानकर चयन प्रक्रिया से ही बाहर कर दिया।
याची के अधिवक्ता ख़िलेरी ने बताया कि हॉल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने ओम राठौड बनाम भारत संघ में विकलांग बच्चों को पीडब्ल्युडी (पर्सन विथ डिसएबिलिटी)आरक्षण के लिए विस्तृत निर्णय देते हुए यह सिद्धान्त प्रतिपादित किया कि केवल विकलांगता प्रतिशत के आधार पर और विकलांग व्यक्ति को बाहर से देखने मात्र के आधार पर उसे चयन प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता है और एमबीबीएस कोर्स कर सकने बाबत उसकी क्रियात्मक सक्षमता को जांचा परखा जाना चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय के उक्त आदेश की पालना में ही एनएमसी ने इस सत्र 2025-2026 में दिव्यांग जन वर्ग में मेडिकल कोर्सेज प्रवेश के लिए गाइडलाइन जारी की है और उक्त गाइडलाइन के अनुरूप ही दिव्यांगजन व्यक्तियों का शारीरिक परीक्षण किया जाकर ही उसे प्राधिकृत सरकारी मेडिकल कॉलेज द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया जाना है। एनएमसी के प्राधिकृत मेडिकल बोर्ड द्वारा याची को ‘कार्यात्मक दक्षताओं में दिए गए कौशल का कार्य कर सकने में सक्षम है,मानते हुए पीडब्ल्युडी (पर्सन विथ डिसएबिलिटी) आरक्षण के लिए पात्र माना गया।
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याचिकाकर्ता अधिवक्ता ने बताया कि नीट (यूजी)-2025/ एमबीबी एस कोर्स के लिए पर्सन विथ डिसएबिलिटी श्रेणी में सीट मैट्रिक्स के अनुसार राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजो में कुल 119 राजकीय सीट आरक्षित की गयी। जबकि लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण विकलांग छात्रों की संख्या केवल 81 ही रहीं,जिसमे याची को पहले पात्र मानते हुए दिनाँक 01.08.2025 को जारी लिस्ट में उसे शामिल किया गया। लेकिन बाद में दिनाँक 12.08.2025 को जारी दिव्यांगजन श्रेणी लिस्ट में से उसका नाम बिना किसी वजह के हटा दिया गया।
प्रथम कॉउंसलिंग बाद द्वितिय राउंड के दिव्यांग श्रेणी में कुल 51गवर्नमेंट सीट रिक्त रही। नीट (यूजी)-2025 की एनएमसी विकलांगता परीक्षण गाईडलाइन अनुसार प्राधिकृत मेडिकल कॉलेज द्वारा जारी प्रमाण पत्र को जानबूझकर कंसीडर नही कर उसे एमबीबीएस प्रवेश के लिए अपात्र घोषित करना राजस्थान राज्य काउंसलिंग बोर्ड (सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज,जयपुर) की मनमानी और सवेंदनहीनता को दर्शाता है।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गए दिशानिर्देशों के अनुरूप ही सरकारी लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज,नई दिल्ली द्वारा गठित बोर्ड के चिकित्सकों द्वारा विकलांग आरक्षण के लिए पात्र प्रमाण पत्र जारी किया गया है।। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि केंद्रीय काउन्सलिंग कमेटी ने एनएमसी की गाईडलाइन अनुसार प्राधिकृत मेडिकल कॉलेज बोर्ड द्वारा जारी उसी प्रमाण पत्र को सही मानते हुए ऑल इंडिया कोटे में राजस्थान के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दे दिया गया लेकिन उसी दिव्यांग प्रमाण पत्र दिनांकित 28जुलाई 2025 को राजस्थान राज्य की मेडिकल कॉउंसलिंग कमेटी द्वारा सही नहीं मानकर उसे मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए अपात्र घोषित करने का कृत्य मनमाना,गैरवाजिब, विधिविरुद्ध और असवैधानिक है।
राज्य सरकार और काउंसलिंग बोर्ड की ओर से याची के सम्बंध में राज्य के मेडिकल बोर्ड से द्वितिय राय लेकर याची को मेडिकल कोर्स करने के लिए अपात्र माने जाने के निर्णय को सही और उचित बताया गया। एनएमसी अधिवक्ता ने हाइकोर्ट का ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि एनएमसी की गाईडलाइन अनुसार प्राधिकृत 16 मेडिकल कॉलेज बोर्ड में से किसी एक बोर्ड द्वारा जारी प्रमाण पत्र को राज्य सरकार मानने के लिए बाध्य हैं और राज्य उसके विपरीत जाकर उलट निर्णय लेने के लिए सक्षम नहीं है।
याची अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए और रिकॉर्ड का परिशीलन करने के पश्चात हाइकोर्ट न्यायाधीश डॉ नूपुर भाटी की एकलपीठ ने अहम रिपोर्टेबल निर्णय पारित करते हुए यह प्रतिपादित किया कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग/एनएमसी, दिल्ली द्वारा दिव्यांगजन के लिए जारी गाइडलाइन ऑल इंडिया कोटा प्रवेश और स्टेट कोटा प्रवेश दोनों ही मामलों में समान रूप से बाध्यकारी है। साथ ही एनएमसी अधिकृत दिव्यांगता मेडिकल बोर्ड द्वारा दिव्यांग अभ्यर्थी को चिकित्सा कोर्स के लिए फ़िट प्रमाणित कर देने के बावजूद,स्टेट कोटा सीट हेतू अयोग्य घोषित कर देने के स्टेट काउंसलिंग बोर्ड के निर्णय को अपास्त करते हुए निर्देश दिए कि राज्य काउंसलिंग बोर्ड हाइकोर्ट के अंतरिम आदेश के अनुरूप द्वितिय राउंड काउन्सलिंग में रखी गई रिक्त सीट पर द्वितिय राउंड की दिव्यांगजन मेरिटनुसार सम्बंधित मेडिकल कॉलेज में याची को अविलम्ब प्रवेश देवें।
