पुस्तकालय परिषद की 27वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
- नई कार्यकारिणी का गठन
- डॉ एसडी व्यास अध्यक्ष,जगदीश यादव बने सचिव
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),पुस्तकालय परिषद की 27वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित। पुस्तकालय परिषद जोधपुर द्वारा पढ़ने की आदत चुनौतिया और परिवर्तन विषय पर एक दिवसीय 27वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन रविवार को ऐश्वर्या कॉलेज (ऑटोनोमस) जोधपुर के पुस्तकालय परिसर में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अथिती डॉ.ऋषि नेपालिया,प्राचार्य ऐश्वर्या कॉलेज ने विधार्थियों से तकनीकी युग में समय का सदुपयोग और मोबाइल फ़ोन के उचित उपयोग की बात कही। उन्होंने कहा कि पुस्तको को अपनाने से मानसिक शांति रहती है और एकांतता से मुक्ति,चित शांत रहता है। डॉ एसआर रंगनाथन की विचारधारा को आज के समय में भी प्रांसागिक बताया एवं इसे नवीन तकनीकी से जोड़कर पुस्तकालय सेवाएं पाठकों को प्रदान करने पर बल दिया।
पुस्तकालय परिषद के पूर्व अध्यक्ष और कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ आरएस राठौड़,फाउंडर पुस्तकालय परिषद ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पुस्तकालयाध्यक्ष को अध्ययन की आदत रखने और मोबाइल फ़ोन के उपयोग की सीमा से अवगत करवाया,तकनीकी युग में कागज के कम उपयोग की सहराना की जो समय की मांग है। आज के समय के अनुसार पाठकों को पुस्तकालय सेवांए प्रदान करने पर बल दिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बनस्थली विद्यापीठ यूनिवर्सिटी के पूर्व लाइब्रेरियन और पुस्तकालय परिषद के अध्यक्ष डॉ एसडी व्यास ने चिंतन मनन पर जोर देते हुए कहा कि पुस्तक पढ़ने से उस कालखंड में पहुँच जाते हैं जहा पुस्तक हमें ले जाती है। पुस्तकालय को स्वचालित करने,कॉपीराइट,इन्फ्लिब नेट की सेवाए उपयोग लेने तथा इ-रिसोर्सेज सेवाएं प्रदान करने पर बल दिया। आरएलए के जर्नल की प्रति सभी को भेट की और ऐश्वर्या कॉलेज में भी 10 प्रतियां भेट की।
पूर्व पुस्तकालयाध्यक्ष वीपी सिंह ने अनुशासन और सिखने की और जोर दिया कि आज के तकनीक युग में पुस्तकों को जरुर पढना चाहिए। ये आँखों और चित के लिए उपयोगी है। पूर्व पुस्तकालयाध्यक्ष वासूदेव मालवीय ने एआई के इमोशनल इंटेलिजेंस को समझाया साथ ही साथ पढने लिखने के तरीके बताए।
सुरेन्द्र सिंह राठौड लाइब्रेरियन, ऐश्वर्या कॉलेज ने ओपन एक्सेस सिस्टम से पुस्तकों को पाठकों से जोड़ने की बात कही जिसको तकनीक द्वारा अपनाया जा सकता है। ऑनलाइन माध्यम से डिजिटल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऑफ़ लाइब्रेरी रिसोर्स को अपनाने पर बल दिया। लाइब्रेरी डेवलपमेंट इन द मॉडर्न एरा विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया।
बीएसआई के वरिष्ठ पुस्तकालय अध्यक्ष जगदीश यादव ने तकनीक को अपनाने पर जोर दिया जो समय की मांग है। जिससे व्यक्ति कुशल और दक्ष हो सके ताकि तकनीक से वह उचित मंजिल तक पहुच सके। जो भी तकनीक अपनाई जाए उसका पूर्व परीक्षण कर अपनाने पर जोर दिया। डिजिटल साक्षरता पर जोर दिया कि शिक्षा मानव का अधिकार है लेकिन इंटरनेट,दृश्य संचार साधनों,OTT जैसे प्लेटफार्म ने पढ़ने की आदत खत्म कर दी है। रीडिंग हैबिट्स से याददास्त दुरस्त रहती है। श्रुति, स्मृति और पूर्व में लिखने पढने की जिज्ञासा पर प्रकाश डाला। वक्ता डॉ राजेश चौधरी ने क्रांफ्रेन्स में पत्र-वाचन किया।
सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष बालू राम ने कहा की रंगनाथन ने पुस्तकालय विज्ञानं के लिए बहुत प्रयास किये। चैटजीपिटी,एआई,जैमिनी आदि के बारे में जानकारी दी। पाठकों में रीडिंग हैबिट बढ़ाने के लिए पुस्तकालय का अपग्रेड करना होगा। कँवर लाल ने सूचना प्रौद्योगिकी के ज्ञान के बिना आज के समय में पुस्तकालय का प्रबंध करना संभव नहीं हैं तथा विभिन्न सेमिनार को अटेंड करना और ज्ञान प्राप्ति से उच्चाइयो पर पंहुचा जा सकता है। पुस्तकालय परिषद के कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह राठौड ने पुस्तकालय परिषद् की वार्षिक गतिविधियां एवमं वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
पुस्तकालय परिषद की नई कार्यकारिणी का गठन
इस अवसर पर पुस्तकालय परिषद की नई कार्यकारिणी का चुनाव किया गया। जिसमे डॉ एसडी व्यास अध्यक्ष,रतन सिंह सोलंकी उपाध्यक्ष, जगदीश यादव सचिव,सुरेन्द्र सिंह राठौड कोषाध्यक्ष,बालू राम संयुक्त सचिव एवं कँवर लाल पीआरओ निर्वाचित किये गए। निवर्तमान अध्यक्ष डॉ आरएस राठौर ने सभी नवनियुक्त सदस्यों का माला पहनकर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ऐश्वर्या कॉलेज के पुस्तकालयाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह राठौड ने ज्ञापित किया।
