काजरी में जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पर 21 दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),काजरी में जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पर 21 दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान,जोधपुर में “जैविक एवं प्राकृतिक कृषि प्रणालियों में प्रगति और नवाचार” विषय पर 21 दिवसीय शीतकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 9 राज्यों से आए कुल 25 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। प्रतिभागियों में शिक्षक,वैज्ञानिक, शोधकर्ता तथा कृषि प्रसार के विषय विशेषज्ञ शामिल हैं,जो कृषि विज्ञान की 12 विभिन्न शाखाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.वी एस जैतावत,कुलगुरु,कृषि विश्वविद्यालय,जोधपुर थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ.सुरेश पाल सिंह तँवर निदेशक,काजरी ने की। समारोह का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन द्वारा हुआ। इसके पश्चात राष्ट्रीय गीत एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद गीत की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को गरिमामय बनाया।
स्वागत भाषण में डॉ.धीरज सिंह, अध्यक्ष,एकीकृत कृषि प्रणाली प्रभाग एवं सह-पाठ्यक्रम निदेशक, ने जैविक एवं प्राकृतिक कृषि की बढ़ती प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। पाठ्यक्रम निदेशक डॉ.एन. के.जाट ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण में जैविक पोषक तत्व प्रबंधन,जैविक कीट एवं रोग नियंत्रण,विविधीकृत फसल प्रणाली,संसाधन संरक्षण तथा सतत कृषि प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान,प्रायोगिक सत्र, क्षेत्र भ्रमण और संवादात्मक चर्चाएँ आयोजित की जाएँगी।
मुख्य अतिथि प्रो.जैतावत ने अपने उद्घाटन संबोधन में अवशेष-मुक्त एवं सुरक्षित खाद्य उत्पादों की राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग का उल्लेख किया। उन्होंने प्राकृतिक कृषि पद्धतियों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण तथा विश्वविद्यालयों,अनुसंधान संस्थानों और कृषि प्रसार तंत्र के बीच सुदृढ़ समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने प्रतिभागियों से उत्पादन,लाभप्रदता और पर्यावरणीय संतुलन के समेकित दृष्टिकोण को अपनाने का आह्वान किया।
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अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ.तंवर निदेशक,काजरी ने शुष्क क्षेत्रों के लिए जलवायु-सहिष्णु कृषि तकनीकों के विकास में संस्थान के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को स्थानीय कृषि-पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालना आवश्यक है। कार्यक्रम का समापन सह-पाठ्यक्रम निदेशक डॉ.ए. नाओरेम ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
यह शीतकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम 24 फरवरी से 16 मार्च 2026 तक आयोजित किया जाएगा और इसे क्षमता निर्माण,ज्ञान आदान-प्रदान तथा नीतिगत संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल देश के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में सतत कृषि विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।
