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लेखक:- पार्थसारथि थपलियाल

जिज्ञासा
बीकानेर से मुकेश गोस्वामी की जिज्ञासा है कि महिला को वामांगी क्यों कहा जाता है।

समाधान

हर महिला वामांगी नही होती है। सनातन संस्कृति में उस विवाहित महिला को वामांगी कहते हैं जिसका विवाह ब्रह्म विवाह के अंतर्गत पाणिग्रहण संस्कार के साथ हुआ हो।
वाम शब्द का अर्थ है बायां और अंगी का अर्थ है अंगवाली। वामांगी शब्द का अर्थ हुआ बायें अंग वाली। किसके बाएं अंगवाली? अपने पति के वामांगी।

पाणिग्रहण संस्कार के अंतर्गत विवाह मंडप में अग्नि (देवता) को साक्षी बना कर अग्नि प्रदक्षिणा (7 फेरे) पूरे करने के बाद सप्तपदी का होना अनिवार्य है। सनातन संस्कृति में लोगों ने विवाह पद्धति को एक औपचारिकता बना दिया है। वैभव का दिखावा बहुत हो गया। संस्कार का भाग गौण हो गया। कई लोगों को यह कहते सुना गया है कि पंडित जी फेरे 15 मिनट में कर दो। जब कि मंडप में कम से कम एक से डेढ़ घंटा समय लगना चाहिए।

प्रदक्षिणा या फेरों के बाद सप्तपदी अर्थात 7 वचन स्वीकार होने के बाद ही कोई महिला वामा या वामांगी कहलाई जाएगी। कर्मकांड में व्यवस्था है कि पाणिग्रहण संस्कार और अग्नि प्रदक्षिणा होने के बाद भी पत्नी तब तक अपने पति (वर) का आधा भाग नही बन पाएगी जब तक वह वामांगी न हो जाय। इसलिए कन्या (दुल्हन) वर के समक्ष अपने सात वचन रखती है जिन्हें सार रूप में इस प्रकार कहा जा सकता है-

1- आप तीर्थ, व्रत दान इत्यादि जो भी पुण्य कार्य करोगे उसमें सदैव मुझे अपने साथ रखोगे। 2- आप मेरे माता पिता का मान सम्मान अपने माता पिता की तरह करोगे। 3- तीनों अवस्थाओं(युवा,प्रौढ़ और वृद्धावस्था) में मेरा पालन करोगे। 4- परिवार का दायित्व को आप उपयुक्त तरीके से निभाओगे। 5- किसी भी प्रकार के लेनदेन में मेरी सहमति लेनी आवश्यक है। 6- किसी भी प्रकार का दुर्व्यसन जुवा, शराब व्यभिचार आदि नही करना होगा। 7- परस्त्री को अपनी माँ बहन जैसे ही मानना। यदि ये 7 वचन स्वीकार करते हो तो मैं वामांग में बैठने को तैयार हूं। वर द्वारा स्वीकारोक्ति देने और अपनी ओर से इस नए घर को उसकी मर्यादायों और परंपराओं के अनुसार साथ निभाने की वधु की स्वीकारोक्ति के बाद वधु वर के बाएं भाग में बैठती है। इस तरह से वह वामांगी कहलाई जाती है।

वामांग क्यों

पारस्कर गृह सूत्र के अनुसार- “अथो अर्थो वा एव अन्यतः यत पत्नी” पुरुष तब तक अधूरा ही है जब तक स्त्री उसके आधेपन को पूरा नही करती।
पौराणिक संदर्भ में ब्रह्मा जी के बाएं स्कंध से महिला की उत्पत्ति मानी गई है। विवाहित महिलाओं के बायें हाथ की कलाई पर रक्षा सूत्र कलावा बांधा जाता है। नाड़ी वैद्य भी महिलाओं की नाड़ी के लिए बाएं हाथ को ही पकड़ता है। हस्त रेखा के विशेषज्ञ विवाहित स्त्रियों के बाएं हाथ को ही देखते हैं।

यह महत्व इसलिए भी है कि मानव शरीर में दिल को वाम भाग में माना जाता है, बुद्धि के लिए भी ऐसा कहा जाता है। आदि अनेक बातें ज्ञान में और संज्ञान में हैं।

यदि आपको भी हिंदी शब्दों की व्याख्या व शब्दार्थ की जानकारी चाहिए तो अपना प्रश्न “शब्द संदर्भ” में पूछ सकते हैं।

ये भी पढ़े – शब्द संदर्भ-(78), वामपंथ और दक्षिण पंथ

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