फसलों व वृक्षों के परागण में कीट परागणकर्ताओं की भूमिका पर प्रशिक्षण

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),फसलों व वृक्षों के परागण में कीट परागण कर्ताओं की भूमिका पर प्रशिक्षण। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (भावाअशिप) के शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी),जोधपुर द्वारा कैम्पा- विस्तार द्वारा वित्त पोषित “कीट परागण कर्ताओं के महत्व एवं फसलो तथा वृक्षों के परागण में उनकी भूमिका पर जागरूकता” विषय पर एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 13 मार्च, 2026 को आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में वन विभाग के कर्मचारी एवं किसान प्रतिभागी एवं कॉलेज विद्यार्थी सम्मिलित हुए।

संस्थान के निदेशक डॉ.आशुतोष कुमार त्रिपाठी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कीट परागणकर्ताओ को बीज व फल निर्माण हेतु महत्वपूर्ण बताते हुए कीट नाशकों के उपयोग, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आवासों की क्षति से होने वाली परागणकर्ता की संख्या में कमी के प्रभावी निदान से ही कृषि उत्पादन,खाद्य सुरक्षा, वन संवर्धन एवं पारिस्थितिकी संतुलन में होने वाले दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है।आशा जताई कि इस प्रशिक्षण द्वारा प्राप्त जानकारी को अपने क्षेत्र में उपयोग लेकर लाभान्वित होंगे।

समूह समन्वयक(शोध) डॉ.संगीता सिंह ने आफरी में चल रही विभिन्न परियोजनाओ के बारे में बताया। पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ.शिवानी भट्नागर ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सभी चरणों को विस्तार पूर्वक बताया। कार्यक्रम में विभिन्न प्रभागाध्यक्ष उपस्थित थे। कार्यक्रम में अनुसंधान पेम्फलेट,ब्रोशर व बुक मेनुअल का भी विमोचन किया गया । प्रशिक्षण के तकनीकी सत्रों में डॉ. रीफत हुसैन रैना,वैज्ञानिक,जेडएसआई, डॉ.सतीश कुमार चारण,असिस्टेंट प्रोफ़ेसर,राजस्थान विश्व विद्यालय जयपुर, डॉ.एनएल डांगी,एसोसिएट प्रोफेसर,कृषि विश्व विद्यालय जोधपुर,डॉ.देश मीणा,वैज्ञानिक -डी,डॉ. शिवानी भट्नागर, प्रभागाध्यक्ष,वन संरक्षण प्रभाग एवं डॉ.अभिषेक राजपुरोहित,असिस्टेंट प्रोफ़ेसर,लाचू मेमोरियल कॉलेज आदि विषय विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए।

चिकित्सा शिक्षा में आधुनिक तकनीकों का समावेश समय की आवश्यकता-गर्ग

प्रतिभागियों ने अपने फीडबैक में प्राप्त प्रशिक्षण को महत्त्वपूर्ण बताया और इसे उत्साहपूर्वक अपनाने की बात कही। प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया । मीता सिंह तोमर ने कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।