एनेस्थीसिया की बारीकियों का दिया प्रशिक्षण

दो दिवसीय एडवांस्ड कैडेवरिक वर्कशॉप

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),एनेस्थीसिया की बारीकियों का दिया प्रशिक्षण।डॉ एसएन मेडिकल कॉलेज में डिपार्टमेंट ऑफ़ एनेस्थीसिया द्वारा आईएसए जोधपुर सिटी ब्रांच के तत्वाधान में अल्ट्रासाउंड-गाइडेड रिजनल एनेस्थीसिया पर आधारित एडवांस कैडेवेरिक कार्यशाला का 24 -25 जनवरी को आयोजन किया गया। इस वर्कशॉप में युवा एनेस्थीसियोलॉजिस्ट,प्रशिक्षु और चिकित्सीय विशेषज्ञों ने भाग लिया।
इस शैक्षणिक कार्यक्रम का उद्घाटन प्रिसिंपल डॉ बीएस जोधा ने कैडेवेरिक शपथ दिला कर किया।

आयोजन अध्यक्ष डॉ राकेश कर्नावट ने बताया की कैडेवेरिक कार्यशालाएं मौजूदा समय में अत्यंत जरूरी हैं। इससे रेजिडेंट डॉक्टरों को सुरक्षित वातावरण में रिजनल एनेस्थीसिया की प्रक्रियाएं सीखने का अवसर मिलता है। कैडेवर आधारित प्रशिक्षण से एनाटॉमी की स्पष्ट समझ विकसित होती है। जटिलताओं की संभावना कम होती है। रोगी-सुरक्षा एवं दर्द प्रबंधन की गुणवत्ता में सुधार होता है। विशेषज्ञों ने रेजिडेंट को कैडेवर पर प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया। इसमें रिजनल एनेस्थीसिया की विभिन्न प्रक्रियाओं,सुरक्षित तकनीकों तथा पेन मैनेजमेंट में इनके प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।

डॉ.रश्मि सयाल,आयोजन सचिव, ने कार्यशाला के संचालन एवं समन्वय में प्रमुख भूमिका निभाई। डॉ रश्मि ने बताया कि कार्यशाला के प्रथम दिन कैडेवर पर प्रशिक्षण दिया गया व दूसरे दिन कैडेवर पर सिखाइ तकनीक को वालंटियर पर अभ्यास किया गया। इस कार्यशाला का शैक्षणिक नेतृत्व डॉ.संदीप दीवान,कोर्स डायरेक्टर CRAB- AORA (Cadaveric Regional Anaesthesia- Anatomy Oriented Regional Anaesthesia) द्वारा किया गया। यह एक उन्नत प्रशिक्षण अवधारणा है जिसमें कैडेवर पर क्षेत्रीय एनेस्थीसिया ब्लॉक्स को एनाटॉमी-आधारित दृष्टिकोण से सिखाया जाता है।

इसका उद्देश्य अल्ट्रासाउंड मार्ग दर्शन के साथ सटीक,सुरक्षित और प्रभावी नर्व ब्लॉक तकनीकों में दक्षता विकसित करना है। इस कार्यशाला में देश भर से आए हुए एक्सपर्ट डॉ वन्दना मंगल,डॉ देबेश भोइ,डॉ सचिन बंसल,डॉ अनुपम राज,डॉ राकेश कुमार,डॉ सादिक मोहम्मद व डॉ घनश्याम बिहानी ने रेजिडेंट डॉक्टरों को कैडेवर पर प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया,जिसमें रीजनल एनेस्थीसिया की विभिन्न प्रक्रियाओं,सुरक्षित तकनीकों तथा पेन मैनेजमेंट में इनके प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यशाला के सफल आयोजन में डॉ.एफएस भाटी,डॉ सरिता जनवेजा,डॉ गीता सिंगारिया,डॉ प्रमिला सोनी,डॉ वंदना,डॉ.मोनिका गुप्ता,डॉ गायत्री तंवर,डॉ अनिशा, डॉ भरत एवं डॉ आभास, एनेस्थीसिया कंसलटेंट,डॉ एसएन. मेडिकल कालेज ने भी अहम भूमिका निभाई। इंडियन सोसाइटी ऑफ़ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट अध्यक्ष डॉ विकास राजपुरोहित एवं सचिव डॉ शिखा सोनी ने कार्यशाला के सफल संचालन के लिए सबको बधाई व धन्यवाद दिया।

रिजनल एनेस्थीसिया से सर्जरी के दौरान और बाद में बेहतर दर्द नियंत्रण मिलता है,जिससे मरीज को कम दवाओं की आवश्यकता होती है।इससे सामान्य एनेस्थीसिया की तुलना में मतली,उल्टी और श्वसन संबंधी जटिलताओं का खतरा कम होता है। मरीज जल्दी चलने-फिरने लगता है और अस्पताल में रहने की अवधि भी कम हो जाती है।

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कैडेवर पर क्षेत्रीय एनेस्थीसिया का अभ्यास करने से चिकित्सकों को मानव शरीर की वास्तविक संरचना को सुरक्षित वातावरण में समझने का अवसर मिलता है। इससे अल्ट्रा साउंड-निर्देशित तकनीकों में हाथों की दक्षता बढ़ती है और वास्तविक मरीजों में जटिलताओं का जोखिम कम होता है। यह प्रशिक्षण आत्म विश्वास बढ़ाकर बेहतर और अधिक सुरक्षित एनेस्थीसिया अभ्यास में सहायक सिद्ध होता है।

वॉलंटियर पर बिना सुई लगाए क्षेत्रीय एनेस्थीसिया का अभ्यास करने से अल्ट्रासाउंड द्वारा सामान्य और रोग-रहित एनाटॉमी को स्पष्ट रूप से समझने का अवसर मिलता है। इससे प्रोब हैंडलिंग,इमेज ऑप्टिमाइजेशन और नर्व पहचान जैसी मूलभूत क्षमताएँ सुरक्षित वातावरण में विकसित होती हैं। यह तरीका सीखने वालों का आत्मविश्वास बढ़ाता है और वास्तविक मरीजों में सुई लगाने से पहले त्रुटियों व जटिलताओं की संभावना कम करता है।

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