घर में नही हैं दाने बुढ़िया चली भुनाने
राष्ट्रप्रथम
पार्थसारथि थपलियाल
हाल ही में पाकिस्तान के विदेशमंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में भाषण करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश सचिव डॉ.एस जयशंकर पर टिप्पणी कर अपना पप्पूपन उजागर किया। जिस अंदाज़ में बिलावल भुट्टो ने अपना वक्तव्य दिया इसमें पूरा ड्रामा था,जैसे कि वह एक बहुत बड़ा कुटिल राजनयिक अथवा दूरदृष्टिपूर्ण राजनीतिक वक्तव्य दे रहा हो। “पप्पू” छठे सातवे दसक में बच्चों का प्यार दुलार का नाम नाम होता था उस पप्पू में आज के बच्चों जैसा डिजिटल प्रभाव नही था,उसमें भोलापन होता था,उसमें नासमझी थी,लोगों की कही बताओं को दुहरा देता। जैसे अक्सर 3-5 वर्ष आयुवर्ग के बच्चे करते हैं।
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विलावल के बिलबिलाने की वजह यह थी कि किसी पत्रकार ने गत सप्ताह भारत के विदेशमंत्री एस.जयशंकर से पाकिस्तान,अफगानिस्तान में आतंकवाद पर सवाल पूछा था कि यह आतंकवाद कब तक चलता रहेगा। इस पर भारतीय विदेशमंत्री ने तपाक से कहा इसके लिए मैं उपयुक्त विदेशमंत्री नही हूँ आपको यह प्रश्न पाकिस्तानी विदेशमंत्री से पूछना चाहिए।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में एस जयशंकर ने पाकिस्तानी पूर्व विदेशमंत्री हिना रब्बानी और अमरीकी विदेश सचिव हिलेरी क्लिंटन के मध्य के एक प्रसंग का जिक्र किया जब हिलेरी क्लिंटन ने कहा था,पड़ोसियों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से घर के पीछे पाले गए सांप कभी पालने वाले को भी डस सकते हैं।
यह जगह पाकिस्तान की वह नस है जिस पर उंगली रखने पर उसे सर्वाधिक दर्द होता है। इसकी प्रतिक्रिया में पाकिस्तान के विदेशमंत्री बिलाल भुट्टो जरदारी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के प्रधानमंत्री पर अभद्र टिप्पणी कर दी। यह टिप्पणी इतनी ओछी (पप्पूपन की) थी कि बिलावल भुट्टो जरदारी की व्यापक खिल्ली उड़ने लगी।
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पाकिस्तान मीडिया और राजनीतिक हलकों में बिलावल के वक्तव्य की निंदा होने लगी। भारत में तीव्र प्रतिक्रिया होनी स्वाभाविक थी। यहां तक कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि बिलावल भुट्टो राजनीति में बच्चा है,उसको इतिहास मालूम ही नही है। उसको न हमारे देश के बारे में बात करनी चाहिए और न भारत के प्रधानमंत्री के बारे में।
यदि वह हमारे देश के प्रधानमंत्री के बारे में अनर्गल बोलते हैं तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारे पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं,हमारे उनके साथ राजनीतिक मत भेद हो सकते हैं,लेकिन जब देश के प्रधानमंत्री की बात आएगी तो पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
बिलावल भुट्टो जरदारी को याद रखना चाहिए कि भुट्टो उसके नाना थे,न कि दादा। उसके पिता जरदारी हैं जिन पर सरकार का मुखिया रहने के दौरान 10 प्रतिशत कमीशनखोरी का दाग लगा हुआ है। आखिर नाना के नाम को कब तक भुनाते रहोगे? पाकिस्तान में इमरान खान के प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देने के बाद बनी मौकापरस्त शाहनवाज शरीफ सरकार जिस बेचारेपन में चल रही है बिलावल को ज्ञान ही नही।
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अन्यथा पाकिस्तान में पाव पाव के परमाणु का प्रचार करने वाले पूर्व मंत्री शेख रशीद भी पाकिस्तान में रहते हैं,उन्होंने भी बिलावल के बयान की निंदा की है। विलावल भुट्टो को जानना चाहिए कि वर्तमान में भारत विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत के पास 550 अरब डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा भंडार है,जबकि पाकिस्तान के पास 6 अरब डॉलर के लगभग है। जो कि एक माह के विदेशी कर्ज़ के व्याज चुकाने को भी पर्याप्त नही है।
पाकिस्तान में रोजाना काम आनेवाली वस्तुओं के दाम अविश्वसनीय लगते हैं। आटा 125 से 150 रुपए किलो, टमाटर/प्याज 400-500 रुपये,आलू 120 रुपये किलो,हरि सब्जियां 100 रुपये किलो से अधिक,पेट्रोल 224 रुपये ली.।
चीन की सहायता भी कुछ समय से मंद पड़ी हुई है। ऐसे में जब पाकिस्तानी विदेशमंत्री भारत पर अवांछित टिप्पणी कर रहे हों,भारत के प्रधानमंत्री पर ओछी टिप्पणी कर रहे हों क्या उन्हें ससमझ नही आ रहा कि पाकिस्तान के ये हालात क्यों हुए हैं?
क्या पाकिस्तान का मुस्लिम उम्मा का फॉर्मूला फेल नही हो गया? क्या भारतीय प्रधानमंत्री का सम्मान उन बड़े देशों ने नही किया जो उम्मत के सदस्य हैं? क्या बिलावल इतना नही समझ पा रहा कि दुनिया की राजनीति भारत के बिना कुछ नही? क्या विलावल केवल बिलबिलाते ही हैं या समझते भी हैं?
रूस यूक्रेन युद्ध के बीच में भारत ने युद्ध रुकवाकर अपने नागरिकों को सुरक्षित निकlला था? उन्हें याद करना चाहिए पाकिस्तानी छात्र भी भारतीय झंडे को लहराते, अपनी जान बचाये थे। पाकिस्तान के गॉड फादर चीन को डोकलाम, गलवान और हाल में तवांग में जिस तरह भागना पड़ा उसे दुनिया ने देखा है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था उसे दिवालियेपन तक ले आई है, अगर अगले 4-5 महीने में कुछ दैवीय चमत्कार न हुए तो पाकिस्तान में हाहाकार मच जाएगा और वह दिवालिया भी हो सकता है। इसीलिये कहा है घर में नही हैं दाने बुढ़िया चली भुनाने।
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