रोज चाय नाश्ता करने ढाबे पर आता है बंदर

सेवाड़ी(दूरदृष्टीन्यूज),क्षेत्र के बारला बेरा चौक की रोज सुबह एक नजारा आम हो चला है,यहां रोज सूरज की पहली किरण के साथ ही एक मेहमान की एंट्री होती है। न बुलावा,न इंतजार,फिर भी 20 दिनों से उसकी हाजिरी पक्की है।

यह मेहमान कोई नेता या अफसर नहीं,बल्कि एक बंदर है जिसने चाय की थड़ी को अपना दूसरा घर बना लिया है।

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डर नहीं,दोस्ती
चाय की थड़ी पर आते ही यह बंदर सीधा बेंच पर कब्जा जमाता है। न चीखता है,न उछल-कूद। बस वीआईपी की तरह बैठकर नाश्ते का इंतजार करता है।

मेन्यू फिक्स
बिस्कुट को चाय में डुबोकर खाना और साथ में चाय की चुस्की लेना इसका फेवरेट है। दुकानदार खुद प्यार से चाय का कप थमा देता है, मानो सालों पुराना यार हो।

भीड़ का हीरो
राहगीर अपनी मंजिल भूलकर कुछ पल इसे निहारते हैं। मोबाइल निकलते हैं,फोटो क्लिक होती हैं, और चेहरे पर मुस्कान स्वतः ही आ जाती है।

यहां न कोई डंडा,न कोई दहशत यहां इंसान ने वन्य जीव को डराना नहीं,अपनाना सीखा है। बंदर ने भी भरोसा तोड़ा नहीं।

बारला बेरा चौक की यह छोटी सी चाय की थड़ी आज पूरे इलाके को बड़ा सबक दे रही है। सह-अस्तित्व का मतलब जंगल में नहीं, दिलों में जगह देना होता है।