आरपीएफ ने 69 बच्चों को दिया नया जीवन,170 बिछड़ों को अपनों से मिलाया

मानवता की पटरी पर दौड़ती रेलवे सुरक्षा बल

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),आरपीएफ ने 69 बच्चों को दिया नया जीवन, 170 बिछड़ों को अपनों से मिलाया। आमतौर पर सख्ती और कानून व्यवस्था के लिए पहचानी जाने वाली रेलवे सुरक्षा बल का एक संवेदनशील और मानवीय चेहरा भी है,जो जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है।वित्तीय वर्ष 2025-26 में जोधपुर मंडल की आरपीएफ ने जहां एक ओर कानून तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की,वहीं दूसरी ओर मानवीय सरोकारों को प्राथमिकता देते हुए कई जिंदगीयों को नई दिशा दी।

जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि विशेषकर भीड़भाड़ वाले रेलवे प्लेटफॉर्म पर खोए,डरे-सहमे और बेसहारा बच्चों के लिए आरपीएफ का “नन्हे फरिश्ते” अभियान किसी फरिश्ते से कम नहीं साबित हुआ। इस अभियान के तहत 69 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें न केवल संरक्षण दिया गया,बल्कि उनके पुनर्वास की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए। इन बच्चों की आंखों में डर की जगह अब भरोसा और मुस्कान लौट आई है।

उल्लेखनीय है कि सिर्फ बच्चे ही नहीं,बल्कि समाज से बिछड़े, निराश्रित और मानसिक रूप से अस्वस्थ 170 लोगों के लिए भी आरपीएफ ने सहारा बनने का काम किया। “ऑपरेशन डिग्निटी” के तहत ऐसे लोगों को उनके परिजनों या स्वयंसेवी संस्थाओं तक पहुंचा कर उन्हें फिर से एक सुरक्षित जीवन की ओर लौटाया गया। वर्षों से भटक रहे कई लोगों के लिए यह पहल अपने घर और अपनों तक लौटने का जरिया बनी।

जोधपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त(आरपीएफ) नीतीश शर्मा ने बताया कि इन सब के अलावा यात्रियों की मदद में भी आरपीएफ पीछे नहीं रही। “ऑपरेशन अमानत” के जरिए सैकड़ों यात्रियों का खोया सामान ढूंढकर उन्हें लौटाया गया,जिससे न केवल लोगों का भरोसा बढ़ा,बल्कि रेलवे की छवि भी मजबूत हुई।

सालासर सुपरफास्ट में अस्थाई अतिरिक्त कोच

हालांकि,इन मानवीय प्रयासों के साथ-साथ आरपीएफ ने कानून व्यवस्था पर भी पूरी सख्ती बनाए रखी। हजारों मामलों में कार्रवाई कर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया और रेल संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

यह आंकड़े सिर्फ उपलब्धियां नहीं, बल्कि उन अनगिनत कहानियों का आईना है,जहां वर्दी के पीछे छिपा एक संवेदनशील दिल जरूरतमंदों के लिए धड़कता है। आरपीएफ की यह पहल साबित करती है कि सुरक्षा के साथ-साथ संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है और जब दोनों साथ हों,तो बदलाव निश्चित है।

2025-2026 के दौरान ये किया आरपीएफ ने
यात्रियों की सुविधा के लिए संचालित ऑपरेशन “अमानत” के तहत 456 यात्रियों का खोया सामान,जिसकी कुल कीमत 91.26 लाख रुपए है,तलाश कर सुरक्षित उनके मालिकों को सुपुर्द किया गया। यह उपलब्धि गत वर्ष की तुलना में 43.17 प्रतिशत अधिक है।

अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए भी प्रभावी कार्रवाई की गई। ऑपरेशन “सतर्क” के तहत 22 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लगभग 10.45 लाख रुपए मूल्य की अवैध शराब जब्त की गई, जो गत वर्ष की तुलना में 93.19 प्रतिशत अधिक है।

इसके अतिरिक्त ऑपरेशन “नारकोस” के अंतर्गत ट्रेनों में मादक पदार्थों के 3 मामले पकड़े गए, जिनकी कुल कीमत लगभग 6.72 लाख रुपए आंकी गई। इन मामलों को अग्रिम कार्रवाई हेतु राजकीय रेलवे पुलिस को सुपुर्द किया गया।