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जोधपुर, जोधपुर में कोरोना संक्रमितों की बढ़ती मौतों ने लोगों को हिला कर रख दिया है। मौतों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पर्याप्त संसाधनों के बावजूद भी डॉक्टर अपने मरीजों को बचा नहीं पा रहे हैं। हर मौत पर डॉक्टरों की बेबसी झलक पड़ती है और मुंह से एक ही बात निकल पड़ती है कि काश ये कुछ दिन पहले आ गया होता? कोरोना वायरस ने अपना रूप पूरी तरह से बदल लिया है। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती दिन ही हैं। इलाज लेने में एक-एक दिन का विलम्ब अब बहुत भारी पड़ऩे लगा है।

जोधपुर के लिए पूरा अप्रैल माह बेहद मुश्किल भरा रहा था। अप्रैल माह में 32,826 संक्रमित मिले थे और 411 संक्रमितों की मौत हो गई थी। मई माह के पहले दिन 34 संक्रमितों की जान चली गई। मौतों की बढ़ती संख्या से डॉक्टर्स भी अचम्भित हैं। इस बारे में पड़ताल के दौरान बातचीत में सभी डॉक्टर्स इस बात पर एकमत थे कि कोरोना के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण कारक समय है। लक्षण नजर आने के कितने दिन में इलाज शुरू किया गया। पहले दो-तीन दिन सबसे अधिक मायने रखते है।

डॉक्टरों का कहना है कि खांसी, बदन दर्द, गले में खराश व बुखार जैसे कोई भी लक्षण आने पर तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श लेकर इलाज शुरू कर दें। वर्तमान में बुखार आने पर लोग उसे इग्नोर कर रहे हैं। अपने हिसाब से घरेलू इलाज शुरू कर देते हैं। इस बीच शरीर में संक्रमण बढ़ता रहता है। तीन-चार दिन इसी में निकल जाते है। तब तक संक्रमण गहरी पकड़ बना लेता है। डॉक्टरों का कहना है कि अस्सी फीसदी लोग अपनी बीमारी को बेहद हल्के में लेते हैं। उनके पास प्रत्येक बीमारी का कोई न कोई बहाना तैयार रहता है।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर आप में या आप के आसपास लोगों में कोरोना के लक्षण दिखे तो तुरंत ही होम आइसोलेट हो जाएं। दिन में पांच बार गरारे करें और स्टीम इन्हेलेशन सुबह शाम करें, ताकि वायरस से दूसरे लोग संक्रमित नही हों। अपने से संपर्क में आए लोगों को तुरंत बताएं और उन्हें भी सतर्क करें। अपने चिकित्सक को कोरोना के लक्षण के पहले दिन ही बताएं। उससे परामर्श के आधार पर इलाज शुरू करें। पहले दिन और अगले 3 से चार दिन तक मरीज बहुत संक्रामक होता है। इसलिए क्लोज कॉन्टैक्ट को पहचाना जाए और उसे भी सतर्क किया जाए ताकि इस कोरोना की संक्रमण की श्रंखला को तोड़ा जा सके। यह बहुत महत्वपूर्ण है।

यह है मौत का कारण

कोरोना का नया स्ट्रेन पहले की अपेक्षा बहुत अधिक घातक प्रहार हमारे फेफड़ों पर कर रहा है। चार दिन में सीटी स्कैन का स्कोर 0 से सीधे 10 से ऊपर पहुंच रहा है। ऐसे में डॉक्टर्स कोई भी लक्षण नजर आने के पहले चार दिन को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। इस दौरान यदि उचित इलाज शुरू कर दिया जाए तो संक्रमण का फैलाव थामा जा सकता है। एक बार फैलना शुरू होने पर इसे थामने में डॉक्टरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पांच-सात दिन तक घरेलू इलाज लेते रहने से स्थिति पूरी तरह से बिगड़ जाती है। ऐसे मरीजों पर दवा का असर भी कम व धीरे होता है।

भारी पड़ रहा है विलम्ब

कमला नेहरू चेस्ट अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सीआर चौधरी का कहना है कि बीमारी को जल्दी से पकड़ कर इलाज शुरू करवाने वाला ही जीत में है। एक-एक दिन का विलम्ब अब भारी पड़ रहा है। इस बार शरीर में संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है। विलम्ब होने पर यह काफी फैल जाता है। ऐसे में डॉक्टरों की भी एक सीमा होती है।

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