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शंकराचार्य को संगम स्नान से रोका जाना सनातन परंपरा व संविधान का अपमान-जायलवाल

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),शंकराचार्य को संगम स्नान से रोका जाना सनातन परंपरा व संविधान का अपमान-जायलवाल। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर प्रयागराज संगम में ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम स्नान से रोके जाने तथा साधु-संतों के साथ मारपीट की घटना को लेकर देशभर में रोष व्याप्त है। इस गंभीर प्रकरण के विरोध में गौमाता राष्ट्रमाता अभियान एवं गो-संसद से जुड़े पदाधिकारियों ने इसका घोर विरोध किया है। जोधपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में गौ सांसद एवं शंकराचार्य के भक्त रामचन्द्र जायलवाल ने कहा कि सनातन धर्म का अपमान और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

जायलवाल(गौ सांसद)एवं शंकराचार्य प्रतिनिधि ने कहा कि शंकराचार्य कोई राजनीतिक पदाधिकारी नहीं,बल्कि एक प्राचीन सनातन मठ के पीठाधीश्वर हैं। उन्हें बिना किसी लिखित आदेश, निषेधाज्ञा अथवा स्पष्ट कारण के संगम स्नान से रोकना पूरी तरह मनमाना और असंवैधानिक है। यह घटना किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सनातन परंपरा के सम्मान से जुड़ा विषय है।

कथा वाचक जीवाराज ने बताया कि प्रशासन ने ‘प्रोटोकॉल’ और ‘भीड़ के खतरे’ का हवाला देकर शंकराचार्य को संगम क्षेत्र में प्रवेश से रोका,जबकि उपलब्ध वीडियो फुटेज एवं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उस समय वहां कोई असामान्य भीड़ नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उसी दौरान अन्य धार्मिक समूहों को संगम स्नान की अनुमति दी गई,जो प्रशासन की भेदभावपूर्ण नीति को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य को एक समय पर अकेला छोड़ दिया गया तथा बिना वर्दी वाले अज्ञात लोगों द्वारा घेरकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं गरिमा का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य के शिष्यों जिनमें महिलाएं,वृद्ध एवं नाबालिग शामिल थे के साथ दुर्व्यवहार और बल प्रयोग किया गया।

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प्रेस वार्ता में गो-संसद के प्रतिनिधियों ने वीडियो साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि एक वर्दीधारी पुलिसकर्मी द्वारा एक साधु की चोटी पकडक़र उन्हें जमीन पर घसीटते हुए मारपीट किए जाने के दृश्य स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। वक्ताओं ने कहा कि साधु की चोटी पकडऩा केवल शारीरिक हिंसा नहीं,बल्कि सनातन परंपराओं का जानबूझकर किया गया अपमान है, जिससे देशभर के श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।