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शब्द संदर्भ:-(112) मानसून

लेखक:-पार्थसारथि थपलियाल

जिज्ञासा
नरेंद्र राणावत ने उदयपुर से पूछा है मॉनसून शब्द किस भाषा का है? इसका मतलब क्या है?

समाधान

मॉनसून शब्द अरबी भाषा का है। अरबी से ही यह शब्द फारसी, तुर्की, पुर्तगाली, अंग्रेज़ी आदि भाषाओं में गया है। अरबी में इसका मूल शब्द मोसिन है जिसका मतलब है मौसम। कहा जाता है कि इस शब्द को मल्लाहों ने शुरू किया था। वे इसे मॉवसिंन कहते थे, जो बाद में मॉनसून बन गया। भारत में आने वाली मॉनसून हवाएं दो प्रकार की होती हैं।

एक है ग्रीष्म कालीन मॉनसून जो जून से सितंबर तक भारत में सक्रिय रहती हैं। ये हवाएं दक्षिण पश्चिमी हिन्द महासागर से और अरब महासागर से भारतीय भू-भाग की ओर चलती हैं। उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र होने के कारण मार्च से जून तक दक्षणी एशिया में गर्मी के कारण स्थलीय भू-भाग पर वायु का दाब कम हो जाता है और समुद्र में वायु का दाब का क्षेत्र बन जाता है।

इस कारण हवाएं (वायु) समुद्र से स्थल की ओर बहनी शुरू हो जाती हैं। ये हवाएं समुद्र से नमी लेकर चलती है इस कारण जब इनके मार्ग में कोई पर्वत या उच्चस्थल आता है तो उससे हवाएं जो बादल बनकर पानी से भारी हो जाती हैं किसी उच्च स्थल से टकरा कर पानी बरसा देती हैं। साथ ही हिन्द महासागर से वाष्प कण लेकर आगे बहती रहती हैं। जब ये हवाएं (पवनें, वायु) कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र ओडिशा से होकर उत्तरपूर्व में हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं से टकराती हैं तब ये हवाएं पश्चिम की ओर मुड़ जाती हैं इस कारण उत्तर पश्चिम भारत तक पहुंचने में लगभग एक माह का समय लग जाता है।

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आमतौर पर दक्षिण पश्चिमी मॉनसून पहली जून तक केरल के पश्चिमी तट पर दस्तक दे देती हैं। यदि बीच-बीच में तापमान बढ़ता रहता है तो लगभग 4 माह तक भारत में वर्षा का मौसम बना रहता है। उत्तर भारत में इस वर्ष ऋतु को बोलचाल में “चौमासा” कहते हैं। इसी दौरान अरब सागर से उठने वाली मॉनसून हवाएं भारत के पश्चिमी भू-भाग को तरबतर कर देती हैं।

दूसरा, सर्दियों में अत्यधिक ठंड के कारण जब भारतीय भू-भाग पर वायु (हवा) का दाब बढ़ जाता है और समुद्र के ऊपर वायु का दाब अपेक्षाकृत कम होता है तब दक्षिण एशिया के भू-भाग से वायु (हवा) हिंद महासागर और अरब सागर की ओर बहती हैं, ये भी मॉनसून हवाएं कहलाई जाती हैं। ये हवाएं दिसंबर-जनवरी में चलती हैं। इन हवाओं के चलने से जो बारिश होती है, उसे शीत कालीन मॉनसून कहते हैं। उत्तर भारत में ग्रामीण अंचलों में लोग इसे “मावठ” भी कहते हैं। भारत में एक महान कृषि कवि हुए हैं, वे “घाघ” नाम से प्रसिद्ध हुए। उनके वचन ग्रामीण अंचल में बहुत प्रसिद्ध हैं। वे कहते हैं कि माघ-पूस जो दक्खिना चले तो सावन के लक्षण भले।

“यदि आप भी किसी हिंदी शब्द का अर्थ,भावार्थ जानना चाहते हैं तो अपना प्रश्न यहां पूछ सकते हैं”।

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