विवाहित महिलाएं भी सरकारी सेवाओं में ईडब्ल्यूएस आरक्षण की हक़दार
राजस्थान हाईकोर्ट
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),विवाहित महिलाएं भी सरकारी सेवाओं में ईडब्ल्यूएस आरक्षण की हक़दार।राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने रिपोर्टेबल निर्णय में कहा कि विवाहित महिलाएं भी सरकारी सेवाओं में ईडब्ल्यूएस आरक्षण की हक़दार हैं। हाईकोर्ट ने महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता और नर्सिंग ऑफिसर नियमित भर्ती 2023 में आर्थिक पिछड़ा वर्ग प्रवासित विवाहित महिलाओं को ईडब्ल्यूएस आरक्षण सुनवाई पर यह निर्णय दिया। कोट ने कहा कि अन्य राज्यों में जायी जन्मी लेकिन राजस्थान में विवाहित महिलाए भी सरकारी सेवाओं में ईडब्ल्यूएस आरक्षण की हक़दार हैं। एकलपीठ निर्णय के विरुद्ध दायर राज्य सरकार की विशेष अपीलो को खारिज कर अहम आदेश दिए गए।
डीडवाना (नागौर) निवासी याचिकाकर्ता पुनीता रानी और झालावाड़ निवासी रीना कुँवर राजपूत की ओर से अधिवक्ता यशपाल खि़लेरी ने अलग अलग रिट याचिका दायर कर बताया कि चिकित्सा विभाग द्वारा महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के 3384 पदों के लिए विज्ञप्ति 19 मई 2023 जारी की गई एवं नर्सिंग ऑफिसर के 6981 पदों के लिए विज्ञप्ति 05 मई 2023 जारी की गई, जिसमे आर्थिक कमजोर वर्ग/ ईडब्ल्यूस वर्ग के लिए 10 प्रतिशत पदों का आरक्षण किया गया।
याची पुनीता रानी ने महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता पद के लिए और रीना कुँवर राजपूत ने नर्सिंग ऑफिसर पद के लिए ईडब्ल्यूएस वर्ग में अपना आवेदन किया। चयन प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद जारी अंतरिम चयन सूची में याचीगण को चयनित किया गया लेकिन अंतिम चयन सूची से उनका नाम यह कहते हुए हटा दिया गया कि वह जन्मजात राजस्थान से बाहर अन्य राज्यों यथा हरियाणा/मध्य प्रदेश की होने और शादी राजस्थान में हो जाने से वह ईडब्ल्यूएस वर्ग आरक्षण की हकदार नहीं है। इसे लेकर अलग अलग रिट याचिका के माफऱ्त चुनोती दी गयी।
रिट याचिका में बताया गया कि याचिकाकर्ता का जन्म अन्य राज्य में हुआ और उनकी शादी राजस्थान के मूल निवासी से होने के बाद वे राजस्थान के मूल निवासी हों चुकी है विवाह पश्चात से ही वह राजस्थान में ही निवासरत है। राज्य के सक्षम अधिकारी द्वारा याचीगण की समस्त जांच पड़ताल कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद नियमानुसार मूल निवासी प्रमाण पत्र और आर्थिक कमजोर वर्ग/ ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी किया गया।
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राज्य सरकार के कार्मिक विभाग औऱ सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग द्वारा भी समय समय पर परिपत्र और अधिसूचनाए जारी करते हुए राज्य से बाहर की महिलाओं को विवाह पश्चात राजस्थान में आर्थिक कमजोर वर्ग/ ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी कर आरक्षण का फायदा देने के निर्देश जारी कर रखे हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता खि़लेरी ने बताया कि आर्थिक कमजोर वर्ग आरक्षण जाति आधारित आरक्षण नहीं होता है बल्कि यह देश के सामान्य जाति के गरीब व आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। यह आर्थिक कमजोर वर्ग/ आरक्षण केवल राजस्थान राज्य के मूल निवासी उन लोगों को देय है जिनकी परिवार की सकल वार्षिक आय 8 लाख रुपए से कम है तथा जिनकी जाति एससी,एसटी, ओबीसी या एमबीसी जाति में नहीं आती हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16 के मुताबिक किसी भी नागरिक को जन्म स्थान या निवास के आधार पर राज्य के अधीन किसी भी पद या रोजग़ार के लिए अपात्र नहीं ठहराया जा सकता और उससे भेदभाव नहीं किया जा सकता। इस कारण राज्य सरकार द्वारा राज्य के विवाहित महिला को सरकारी नौकरी में ईडब्ल्यूएस वर्ग आरक्षण से वंचित करना गैरकानूनी और असवैधानिक है। याचीगण के प्राप्तांक ईडब्ल्यूएस वर्ग के अंतिम कटऑफ से भी ज्यादा है।
हास्यास्पद स्थिति यह है कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर सभी भर्तियों में अन्य राज्य की मूल निवासी राजस्थान में विवाहित महिलाओं को ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ दे रहीं हैं लेकिन राजस्थान सरकार के चिकित्सा विभाग द्वारा की जा रही भर्तीयों में अन्य राज्यों की विवाहित महिलाओं को ईडब्ल्यूएस आरक्षण देने से मना किया जा रहा है।
अपीलकर्ता को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि राजस्थान राज्य से बाहर की मूल निवासी महिला शादी के बाद राजस्थान में राजकीय नौकरी में ईडब्ल्यूएस.आरक्षण की हकदार नहीं है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी रंजना कुमारी मामलें में अन्य राज्यों से प्रवासीत विवाहित महिलाओं को अन्य राज्य में एससी,एसटी, ओबीसी वर्गों में आरक्षण का हकदार नहीं माना हैं।
प्रकरण के तथ्यों और पूर्व न्यायिक दृष्टान्तो का समग्र परिशीलन पश्चात वरिष्ठ न्यायाधीश डॉ.पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायाधीश संदीप शाह की खण्डपीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश विशेष अपीलों को रिपोर्टेंबल निर्णय से खारिज करते हुए यह प्रतिपादित किया कि अन्य राज्यों में जायी जन्मी लेकिन राजस्थान में विवाहित महिलाएं भी सरकारी सेवाओं में ईडब्ल्यूएस. आरक्षण पाने की हक़दार हैं साथ ही पूर्व में निर्णीत प्रकरण अमन कुमारी एकलपीठ निर्णय को सही ठहराया।
