Doordrishti News Logo

बीमा कंपनी का दस्तावेज के अभाव में दावा खारिज किया जाना अनुचित

  • राज्य उपभोक्ता आयोग
  • बीमा कंपनी को दावा राशि 13 लाख 95 हजार 634 रुपए मय 9 फीसदी ब्याज और परिवाद व्यय दस हजार रुपए अदा करने के आदेश

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),बीमा कंपनी का दस्तावेज के अभाव में दावा खारिज किया जाना अनुचित। राज्य उपभोक्ता आयोग ने व्यवस्था दी है कि सर्वेयर द्वारा नुकसान आंकलन के बाद बीमा कंपनी का दस्तावेज के अभाव में दावा खारिज किया जाना अनुचित है। बीमा कंपनी की अपील निस्तारित करते हुए आयोग की न्यायिक सदस्य उर्मिला वर्मा और सदस्य लियाकत अली ने बीमा कंपनी की बैंक को पक्षकार के अभाव में परिवाद खारिज करने की मांग को यह कहकर ठुकरा दिया कि यह आपत्ति जिला आयोग के समक्ष नहीं उठाई गई। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनी को दावा राशि 13 लाख 95 हजार 634 रुपए मय 9 फीसदी ब्याज और परिवाद व्यय दस हजार रुपए अदा करने होंगे।
ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की ओर से अपील दायर कर कहा गया कि दावेदार की ओर से दावा दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने के कारण उन्होंने दावा सही खारिज किया है और एस बीआई से ऋण लेने पर आवश्यक पक्षकार होने के बावजूद परिवाद में पक्षकार नहीं बनाए जाने पर जिला आयोग ने परिवाद मंजूर कर गलत किया है इसलिए अपील मंजूर की जाए।

परिवादी की ओर से अधिवक्ता अनिल भंडारी ने कहा कि बैंक को पक्षकार नहीं बनाए जाने की आपत्ति जिला आयोग में नहीं लेने से अपील के समय तथ्यात्मक आपत्ति नहीं ली जा सकती है। उन्होंने कहा कि जब बीमा कंपनी के नियुक्त सर्वेयर ने नुकसान का आकलन कर लिया है तो दस्तावेज के अभाव में दावा खारिज किया जाना बीमा कंपनी का अनुचित व्यापार व्यवहार है। उन्होंने कहा कि जिला आयोग,जालोर ने परिवाद मंजूर कर कोई गलत नहीं किया है।

जोधपुर-गोरखपुर स्पेशल ट्रेन के समय में बदलाव
राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपील निस्तारित करते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि बीमा कंपनी को दस्तावेज परिवादी ने यदि उपलब्ध नहीं कराए है तो सर्वेयर ने किस आधार पर नुकसान का आकलन कर लिया है।उन्होंने कहा कि बीमा कंपनी यह साबित करने में अक्षम रही है कि परिवादी ने नुकसान नहीं होने पर भी झूठा दावा पेश कर दिया था।

उन्होंने कहा कि दावा आंकलन हो जाने पर दस्तावेज के अभाव में दावा खारिज किया जाना गलत और अनुचित है। उन्होंने बीमा कंपनी की बैंक को पक्षकार के अभाव में परिवाद खारिज करने की मांग को यह कहकर ठुकरा दिया कि यह आपत्ति जिला आयोग के समक्ष नहीं उठाई गई। उन्होंने दावा राशि 13 लाख 95 हजार 634 रुपए मय 9 फीसदी ब्याज तथा परिवाद व्यय दस हजार रुपए अदा करने का आदेश बीमा कंपनी को दिया।