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भारत-फ्रांस की सेनाएं कर रही युद्धाभ्यास

गुरूड़ युद्धाभ्यास चलेगा 12 नवंबर तक

जोधपुर,शहर में भारत व फ्रांस की एयर फोर्स का संयुक्त युद्धाभ्यास गरुड़ शुरू हो चुका है। 26 अक्टूबर से शुरू हुआ युद्धाभ्यास 12 नवंबर तक चलेगा। इस वॉर प्रैक्टिस के जरिए दोनों देशों की एयरफोर्स के पायलट्स एक-दूसरे के साथ अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।

एयरफोर्स का युद्धाभ्यास थल सेना के युद्धाभ्यास से कई मायनों में अलग है। इसमें थल सेना के समान गोला बारूद काम में नहीं लिया जा रहा। तकनीक का इस्तेमाल ज्यादा किया जा रहा है। इस युद्धाभ्यास में भी टारगेट पर वर्चुअल हमले बोले जा रहे हैं। जिसमें डमी मिसाइलों के जरिये निशाना साधा जा रहा है। निशाना कितना सटीक रहा यह सब कुछ रिकॉर्ड किया जा रहा है। जमीन पर वापस आने के बाद डेटा निकाल कर इसकी जांच की जाती है। इसके बाद सभी पायलट्स को उनकी कमियों के बारे में बताया जाता है। एयरफोर्स और सेना के युद्धाभ्यास में जमीन-आसमान का अंतर है।

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एयरफोर्स के युद्धाभ्यास में सेना की तरह वास्तविक गोला-बारूद इस्तेमाल नहीं होता। टारगेट पर हमले डमी मिसाइल्स से होते हैं। हवा में टारगेट पर हमले होते हैं और सब कुछ रिकॉर्ड होता है। इसके माध्यम से परखा जाता है कि निशाना कितना सटीक था।

राफेल सहित कई लड़ाकू विमान हिस्सा का केंद्र

इस युद्धाभ्यास में फ्रांस के राफेल के अलावा भारतीय राफेल, सुखोई, जगुआर व तेजस के अलावा हल्का लड़ाकू हेलिकॉप्टर रुद्र,अवाक्स विमान व हवा में तेल भरने वाले टैंकर हिस्सा ले रहे हैं। इन विमानों के समूह को दो हिस्सों में बांटा गया है। एक दुश्मन का और एक मेजबान का। इसके बाद शुरू होती है आसमान में मशक्कत।

युद्धाभ्यास में काम ले रहे डमी मिसाइलें

युद्धाभ्यास के दौरान डमी मिसाइल काम में ली जाती है। ये डमी मिसाइल सही मायने में एक लेजर बीम की तरह होती है। इसे फाइटर जेट एक-दूसरे के ऊपर या अपने लक्ष्य की तरफ दागते हैं। लक्ष्य पर इसके टच होने का पूरा रिकॉर्ड होता है। इसी रिकॉर्ड के आधार पर पायलट की कुशलता को परखा जाता है। फाइटर जेट ऐसे तय करता है लक्ष्य

एयरक्राफ्ट की रफ्तार तेज

आसमान में दुश्मन के विमानों की पहचान कर उन पर हमला करना या अपने तय लक्ष्य पर बम गिराने के अलावा दुश्मन की मिसाइलों से स्वयं के फाइटर का बचाव करना सबसे महत्वपूर्ण है। एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल की रफ्तार भी फाइटर जेट से अधिक होती है। साथ ही पैंतरेबाजी में ये मिसाइलें फाइटर से तेज होती है। ऐसे में इन्हें गच्चा देना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

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