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भारत अब रक्षा उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भर-शेखावत

भारत अब रक्षा उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भर-शेखावत

  • सेना देश के खिलाफ होने वाली हर गतिविधियों का यथेष्ट जवाब देने में समर्थ
  • परमवीर मेजर शैतानसिंह के बलिदान दिवस पर कवि सम्मेलन में शामिल हुए शेखावत

जोधपुर/लोहावाट,केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत आज रक्षा उपकरणों के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है। हमारी सेनाओं का मनोबल और सामर्थ्य इतना ऊंचा है कि देश के खिलाफ भीतर-बाहर होने वाली हर गतिविधि का समुचित और तुरंत जवाब दिया जाता है। शुक्रवार को लोहावाट में परमवीर मेजर शैतानसिंह के बलिदान दिवस पर उनकी जन्मस्थली शैतान सिंह नगर में आयोजित कवि सम्मेलन को केन्द्रीय मंत्री शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक समय था,जब हमारी सेना सीमित संसाधनों के साथ दुश्मन से युद्ध लड़ती थी,आज स्थितियां बदली हैं। सेना को सब तरह के संसाधन उपलब्ध होने लगे हैं। आधुनिक अस्त्र-शस्त्र सेना के पास हैं। रक्षा उपकरणों के निर्यात के मामले में भारत दुनिया के टॉप 10 देशों में शामिल हो गया है। इस मामले में भारत आत्मनिर्भर हो गया।

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शेखावत ने कहा कि देश पर सन 1962 चीन,1965 पाकिस्तान,1971पाकिस्तान और 1999 में कारगिल युद्ध थोपा गया। हमारे सैनिकों का शौर्य कभी सीमाओं पर नहीं हारा था लेकिन इस देश के राजनेताओं ने टेबल पर देश को हराने का काम किया। मैं अभिनंदन करता हूं भारत की जनता का,जिन्होंने एक ऐसे शेर को सिंहासन पर भेजा है,जो दुश्मन को यथेष्ट जवाब देना जानता है।

शेखावत ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक करके यह संदेश दिया गया कि भारत के खिलाफ चाहे कहीं भी गतिविधि हो, हमारी सेना उसका यथेष्ट जवाब देती है। आज भारत की सेनाओं का सम्मान और र्शार्य बढ़ा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं सीमाओं पर होली और दिवाली मनाते हैं।

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परमवीर मेजर शैतानसिंह का स्मरण करते हुए केन्द्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि आजाद भारत में जब कभी भी शौर्य और बलिदान का उल्लेख होगा तो निश्चित रूप से परमवीर मेजर शैतानसिंह का स्मरण सम्मान से किया जाएगा। वर्ष 1962 में चीन ने जब हमारी पीठ में छुरा घोंपा था, उस युद्ध में मेजर शैतानसिंह ने अदम्य साहस का प्रदर्शन किया और घायल होने के बावजूद पीछे नहीं हटे, बल्कि अपने साथी सैनिकों का भी हौसला बढ़ाते रहे।

रेजांगला जहां चीन ने हमला किया, उस युद्ध को दुनिया के 13 सबसे भयानक युद्धों में शामिल किया गया है। उस पलटन में और भी सैनिक शहीद हुए थे। उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया था। उस लड़ाई में भारत के सैनिकों के पास पर्याप्त साजो-सामान नहीं थे,लेकिन भारत के सैनिकों ने अपने खून से धरती को सींचकर चीनियों को भारत की धरती पर पैर रखने नहीं दिया। उनका शरीर कई माह बाद जोधपुर लाया गया।

शेखावत ने कहा कि मारवाड़ क्षेत्र की कोई जाति या समाज ऐसा नहीं होगा, जिसने सेना में शामिल होकर भारत माता को अपना रक्त समर्पित नहीं किया हो। यह वीर प्रसूता धरती है। आज वीरता को अमरत्व प्रदान करते वाले मेजर शैतानसिंह की पुण्यतिथि भले ही हो, लेकिन हम उन सब वीरों को याद करने के लिए एकत्र हुए हैं, जिन्होंने आजाद भारत के इतिहास के देश की सीमाओं का सम्मान बनाए रखने के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया।

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