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राजस्थान में सनातन संस्कृति की ग्रिलिंग

राष्ट्रप्रथम

लेखक:- पार्थसारथी थपलियाल

राष्ट्रीय संयोजक-भारतीय संस्कृति सम्मान अभियान

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान के ही भूतपूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भैरों सिंह शेखावत के बाद अत्यंत लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहे। किसी भी व्यक्ति की कोई कठिनाई हो वे उसे जरूर सुनते और जरूरतमंद की भरसक सहायता करते। लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों से लेकर अशोक जी की राजनीति में जो भय आच्छादित हुआ है वह अनिर्वचनीय है। उनकी अन्य पॉलिटिक्स पर चर्चा करना अभी उचित नही है लेकिन सचिन पायलट की बोई फसल के कृषक बनकर उसे हथियाने से आहत सचिन पायलट को राहत नही मिली और अब क्योंकि चुनाव फिर आनेवाले हैं उसके लिए अभी से ऐसी भूमिका बना दी जाय ताकि अशोक गहलोत राजस्थान के लिए “आवश्यकता” बने रहें। राष्ट्रीय कांग्रेस की वह स्थिति नही कि उसमे दुबारा वही सम्मान मिल सके। हरीश रावत की किसी समय वही मान्यता 10 जनपथ में थी जो अशोक गहलोत की।

अशोक गहलोत को मारवाड़ का गांधी कहा जाता है। उनके अपणायत भरा भाव दुश्मनों के दिल भी जीत लेता था लेकिन आसन्न संकट को देखकर वे इन दिनों तरह तरह की गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्हें मारवाड़ का गांधी के स्थान पर राजस्थान का गाज़ी कहा जाने लगा है।

इन दिनों जो सनातनधर्म विरोधी गतिविधियां राजस्थान में बढ़ी हैं वे निश्चय ही गांधीवादी तो नही हैं। करोली में रामनवमी के दिन हिन्दू समाज पर जिस तरह का पथराव और हिंसा की घटनाएं हुई वह राजस्थान का चरित्र तो नही। राजस्थान में हिन्दू और मुसलमान जितने प्यार और अपणायत के साथ रहते हैं वैसा तो हिंदुस्तान में कहीं भी नही। टोंक की घटनाएं, भीलवाड़ा की घटनाएं चौंकाती हैं। अलवर और भीलवाड़ा में अभियुक्त वर्ग के लोगों को सरकार बचाने के प्रयास में लगी रही।

क्या उनका एक वोट एक लाख का है? हाल ही में 30 शहरों में गाय पालन को लेकर जो निर्देश सरकार ने जारी किए हैं उसके तहत लोग गाय नही पाल सकते। गो मूत्र या गाय का गोबर जो विभिन्न संस्कारों में काम आते हैं उसके बिना ही काम चलाना पड़ेगा। आप इस बात की पाबंदी लगा सकते हैं कि आवारा गाय सड़कों पर न हो। ये क्या बात हुई कि सरकार द्वारा निर्धारित स्थान अगर है तो एक गाय पाल सकते हैं। गो पालक को सालाना शुल्क रुपये एक हज़ार देना होगा। ऐसा तो औरंगजेब के जमाने मे भी नही हुआ। वाह! अशोक जी आप तो मारवाड़ की जनता के दिलों में बसते थे क्या हो गया है?

क्या नेमीचंद जैन भावुक साहब की शिक्षाएं समाप्त हो गई हैं। आप राजनीति जमकर करें भाजपा से करें, वसुंधरा राजे या सचिन पायलट से करें, यह आपका विषय है लेकिन माननीय अलवर में 300 साल पुराना शिव मंदिर तोडना कहाँ का धर्मनिरपेक्ष विचार है? मेरी पीड़ा यह है कि मंदिर की मूर्तियों को बुरी तरह खंडित किया गया और शिवलिंग ग्रिलिंग मशीन से ध्वस्त किया यह अति निंदनीय कार्य है। राजगढ़ पालिका बोर्ड भाजपा का था या कोंग्रेस का। सरकार उसकी समीक्षा कर सकती थी।

राजस्थान धर्म परायण जनता का प्रदेश है जहां पाबू जी, हडबू जी, गोगा जी, रामदेव जी, जाम्बो जी, पीपा जी, बिग्गाजी, वीर तेजा जी, मीरां जी जैसी विभूतियों की चरण धूलि से मरुधरा पवित्र है उस धरती पर दो तक की राजनीति के लिए इतना बड़ा अत्याचार हो रहा है, यह चिंतनीय है। राजपाट आज तक किसी के साथ नही गया। मर जाने के बाद धर्म ही साथ जाता है, सत्ता नही। वह मंदिर हाल का नही बना था। हाल के बनाये नये मंदिरों पर कोई आपत्ति भी नही करता। अगर बहुत जरूरी था तो मंदिर को उठा कर दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता था। जोधपुर में अनेक मंदिर पूर्व में हटाये गए थे। कृपया सनातन संस्कृति को राजनीति से बाहर रहने दें।

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