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रिटायर महिला प्रिंसिपल से 1.85 करोड़ की धोखाधड़ी मास्टमाइंड समेत चार गिरफ्तार

  • फर्जी खातों की गैंग का खुलासा
  • मैकेनिक और बैंक कर्मचारी चलाते थे

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),रिटायर महिला प्रिंसिपल से 1.85 करोड़ की धोखाधड़ी मास्टमाइंड समेत चार गिरफ्तार।कमिश्ररेट में साइबर ठगी के बड़े मामले का खुलासा करते हुए साइबर थाना पुलिस ने फर्जी बैंक खातों की गैंग चलाने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों में एक मैकेनिक और एक बैंक कर्मचारी भी शामिल है,जिन्होंने मिलकर फर्जी खातों के जरिए एक रिटायर महिला प्रिंसिपल से करीब 1.85 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी को अंजाम दिया था।

फर्जी अकाउंट खुलवाकर फ्रॉड 
पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह संगठित तरीके से फर्जी अकाउंट खुलवा कर ठगी की रकम इधर-उधर ट्रांसफर करता था। जब पुलिस ने कड़ी से कड़ी जोड़ी तो एक खाताधारक का नाम सामने आया,जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुट गई है। आरोपियों ने ठगी की रकम अपने खातों में डलवाने के लिए किराए पर कमीशन के लालच में अपने खाते उपलब्ध करवाए थे। भारतीय स्टेट बैंक के संविदा कर्मचारी को भी गिरफ्तार किया गया है। जबकि मास्टर माइंड मोटर मैकेनिक का काम करता है।

यह आरोपी लगे हाथ,मास्टर मांइड भी साथ में 
मकान नंबर के.91,बलदेवनगर वीर दुर्गादास कॉलोनी मसूरिया निवासी मुकेश राव पुत्र पप्पूराम राव,मकान नंबर 168 शक्ति कॉलोनी, रातानाडा हाल गणेश चौराहा के पास,जोधपुर डेयरी के सामने, प्रतापनगर सदर निवासी तिलक सिंह पुत्र स्व.लाल सिंह,कुड़ी भगतासनी निवासी शिवम तोमर पुत्र हरिपाल सिंह तोमर और जगदंबा कॉलोनी,प्रतापनगर हाल संविदा कर्मी एसबीआई शाखा पाल रोड जोधपुर निवासी अजय पुत्र रूपाराम को गिरफ्तार किया।

कमीशन के लालच में दिया अपना खाता
साइबर थानाधिकारी सुरेश सारण ने बताया कि टीम की ओर से ठगी के मामले को लेकर जांच शुरू की गई थी। इसमें एक खाता धारक तिलक सिंह पुत्र लाल सिंह निवासी गणेश नगर प्रताप नगर सदर को दस्तयाब किया गया। उससे पूछताछ की गई तो सामने आया कि तिलक सिंह ने साइबर ठगी के लिए अपना खाता कमीशन के लालच में शिवम तोमर को देना बताया।शिवम को दस्तयाब कर पूछताछ करने में एसबीआई बैंक पाल रोड शाखा के संविदाकर्मी अजय पुत्र रूपाराम निवासी जगदंबा कॉलोनी प्रतापनगर का नाम सामने आया। उससे पूछताछ करने पर मास्टर माइंड मुकेश राव का नाम सामने आया। मुकेश ठगी के लिए किराए पर खाता खरीदता था। बाद में इनमें आने वाले पैसों को यूएसडीटी ओर अन्य ट्रांजेक्शन के जरिए चाइना में बैठे सरगना तक पहुंचाता था।

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ऐसे देते वारदात को अंजाम 
मुख्य आरोपी मुकेश राव संविदा कर्मचारी अजय कुमार को खाते पर कमीशन देता था। उसके जरिए मजदूर वर्ग के खाते खुलवाकर उनमें साइबर ठगी की राशि डलवाते थे। खास बात ये कि खाताधारकों को बैंक में कर्मचारी होने का झांसा देकर अजय विश्वास में लेता था कि उसके बैंक खाते में कोई दिक्कत नहीं आएगी। पूछताछ में सामने आया कि इसमें से एक आरोपी मुकेश राव जो मोटर मैकेनिक है और वह इस मामले का मास्टर माइंड है। वह गूगल ट्रांसलेट के जरिए एक विदेशी नंबर पर चीनी में बात भी करता था।

अंदेशा हैंडलर विदेश में बैठा 
पुलिस को अंदेशा है कि इस पूरे गिरोह का हैंडलर विदेश में बैठा हो सकता है। बैंक कर्मचारी अजय कुमार से भी पूछताछ की जा रही है,जो संविदा पर बैंक में कार्यरत था। पुलिस यह पता लगाने में जुटी हुई है कि उसके साथ बैंक का भी कोई कर्मचारी शामिल था या नहीं।

अब तक की पड़ताल में सामने आया कि आरोपी 10 से 15 प्रतिशत कमीशन के लालच में खाते किराए पर लेते थे और उसमें साइबर ठगी के रुपयों को डलवाते थे। गौरतलब है कि जोधपुर के कमला नेहरू नगर निवासी महिला सरस्वती माहेश्वरी को ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर 1 करोड़ 85 लाख रुपए ले लिए थे। 23 फरवरी को महिला के भतीजे राजेश माहेश्वरी ने साइबर थाने में मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारियों की सजगता की वजह से भी महिला के 22 लाख रुपए डिजिटल अरेस्ट होने से बच गए थे।