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1.74 करोड़ के नकली नोट बोरानाडा इंडस्ट्रीयल एरिया में छापे गए

  • तीन लेबरों ने मिलकर कमीशन के आधार पर छापे नोट
  • एक आरोपी ने अपने मामा के मकान में छापे यह नोट
  • अब तक सात गिरफ्तार

जोधपुर,1.74 करोड़ के नकली नोट बोरानाडा इंडस्ट्रीयल एरिया में छापे गए। नकली नोट प्रकरण में अब विस्तृत तफ्तीश आरंभ हो गई है। यह नोट अक्टूबर महिने में एक मकान में छापे गए। पुलिस ने तीन लेबरों को पकड़ा है। इसमें एक व्यक्ति ने अपने मामा का मकान किराए पर देने की बात कहकर नकली नोट छाप डाले। मकान तीन हजार किराए पर देने की बात की। बदले में मोटा कमीशन मिलने वाला था। मगर उससे पहले ही तीनों पकड़े गए। जांच अधिकारी एसीपी पश्चिम नरेंद्र दायमा ने बताया कि नकली नोट प्रकरण में तीन और अभियुक्त पाल गांव के रहने वाले हीरालाल देवासी,महेंद्र चौहान के साथ सुमेरपुर पाली निवासी अर्जुन उर्फ गौतम को पकड़ा गया है। इन लोगों ने मिलकर नकली नोट बोरानाडा इंडस्ट्रीयल एरिया में एक मकान में छापे थे। यह मकान आरोपी महेंद्र चौहान के मामा का है जो पालनपुर गुजरात में रहते हैं। मकान खाली रहता है तब महेंद्र ने उसे किराए पर देने की बात की थी। मामा ने तीन हजार में किराए देने को कह दिया था। तब महेंंद्र ने खुद ही यह मकान किराए पर रख लिया।

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महेेंद्र को मिलने वाले थे चार लाख 
नकली नोट छपाई पर महेंद्र चौहान को चार लाख रुपए मिलने वाले थे। कुछ रुपए उसे दिए गए। इसका पूरा पता लगाया जा रहा है कि कितने रुपए प्राप्त किए। जबकि आरोपी अर्जुन को 1 लाख रुपए देना तय हुआ जिस पर उसे 60 हजार रुपए मिल गए थे। तीसरे आरोपी हीरालाल देवासी को 20-30 हजार रुपए मिलने वाले थे।

मुख्य सरगना संजय शाह,यूट्यूब पर सीखा नोट बनाना 
मामले में एसओजी,एटीएस के साथ अब एनआईए ने भी जांच शुरू कर दी है। 1.74 करोड़ रुपए नकली नोट के मामले में कई चौकाने वाले खुलासे हुए। पूरी टीम एक गैंग बनाकर काम कर रही थी। टीम के एक सदस्य संजय शाह ने यू ट्यूब से नकली नोट बनाना सीखा। इसे बनाने वाली गैंग में और भी कई लोग शामिल थे। नकली नोट की इतनी बड़ी खेप से नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी एनआइए के भी होश उड़ गए। जानकारी के अनुसार एनआइए ने पुलिस अधिकारियों से मामले की जानकारी ली है। इस मामले में और भी कई लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में पहले नागौर जिले के श्रीबालाजी गांव निवासी हनुवंतसिंह, गंगाणा में अरिहंत आदित्य निवासी संजय शाह, रातानाडा में हनुवंत नगर निवासी हेमंत कांकरिया और पाल गांव में देवासियों का बास निवासी भागीरथ उर्फ भगाराम देवासी को गिरफ्तार किया है जो रिमांड पर हैं।

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अब तक सात लोग गिरफ्तार 
एसीपी नरेंद्र दायमा ने बताया कि प्रकरण में अब तक सात लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं। फिलहाल इनका ही प्रकरण से संबंध सामने आ रहा है और कोई होगा तो उसे भी जल्द पकड़ लिया जाएगा। अभी मामले में तफ्तीश चल रही है। चार आरोपी आठ दिन की और तीन अभियुक्त पांच दिन की पुलिस अभिरक्षा में है।

यह है मामला और यूं खुल पाया 
दरअसल शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र में मुंबई के रहने वाले बालमुकुंद शर्मा और उनके बेटे नरेश शर्मा और राजू शर्मा ने आरोपी हेमंत काकरिया से 3.21 करोड़ रुपए में जमीन बेचने का सौदा हुआ था। दो महीने पहले ही जमीन का अनुबंध हो चुका था। जमीन का सौदा बिचौलिया संजय शाह निवासी गंगाणा अरिहंत अदिता ने कराया था। संजय शाह पहले भी धोखाधड़ी के मामले में जेल जा चुका है। जेल में ही संजय शाह की मुलाकात भागीरथ देवासी निवासी संचौर से हुई थी। भागीरथ नकली नोट मामले में उस समय जेल में था। मुंबई के व्यापारी से सौदा पहले ही हो रखा था। मुंबई में रह रहे जमीन मालिक बालमुकुंद शर्मा और उनके दोनों बेटों को ठगने की प्लानिंग से डेढ़ महीने पहले ही संजय शाह,भागीरथ और उसके साथियों ने कलर प्रिंटिंग मशीन से रुपए छापने शुरू कर दिए। आरोपियों ने जमीन अपने नाम करने के लिए जमीन के रुपए करीब एक करोड़ 40 लाख का चेक दे दिया। जमीन मालिक ने चेक बैंक में लगा दिया। बचे हुए रुपए नकद रजिस्ट्री के दिन देने की बात हुई। तीन दिन पहले रजिस्ट्री वाले दिन आरोपियों ने जमीन मालिक शर्मा को बुलाया। 4 बजे तक रजिस्ट्री होती है,इसलिए आरोपी 3 बजे करीब दो करोड़ रुपए लेकर आए। समय कम होने के कारण और चुनाव के दौरान इतनी बड़ी राशि पकड़ी न जाए इसलिए बंडल देखकर ही रुपए की अंदाजन गिनती कर ली। इसके बाद रजिस्ट्री करवा ली। जमीन नाम होने के बाद दूसरे दिन जब जमीन मालिक ने किसी को इन नोटों में से गड्डी किसी और को थमाई तो पता चला कि रुपए नकली हैं। इसके बाद जमीन मालिक घबरा गए। पहले तो आरोपियों को सूचना दी कि रुपए नकली दिए हैं। इस पर आरोपी बदल गए और उन्होंने रुपए देने से मना कर दिया। जमीन मालिक कमिश्नर कार्यालय भी पहुंचे लेकिन वहां कमिश्नर नहीं मिले। इन रुपयों को जमीन मालिक के दोस्त हनुवंत सिंह की गाड़ी  में रख दिए। इसकी सूचना पुलिस को लगी तो शिकायत के पहले ही पुलिस ने रुपए पकड़ लिए।

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