साइबर पुलिस की मुस्तैदी से 31 लाख की ठगी नाकाम
व्हाट्सएप वीडियो कॉल से डिजिटल अरेस्ट हुए बुजुर्ग को वक्त रहते बचाया
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),साइबर पुलिस की मुस्तैदी से 31 लाख की ठगी नाकाम। साइबर थाना पुलिस ने त्वरित और मुस्तैद कार्रवाई करते हुए डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसे एक बुजुर्ग को बचाकर उनके जीवनभर की जमा पूंजी 31 लाख रुपये ठगे जाने से सुरक्षित बचा लिए।
पुलिस आयुक्त अंशुमन भोमिया के आदेशानुसार एवं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत शनिवार को साइबर पुलिस को बड़ी सफलता मिली। यस बैंक की मैनेजर मनीषा पंवार को जब बैंक में एक बुजुर्ग द्वारा भारी-भरकम राशि के संदिग्ध ट्रांजेक्शन का अंदेशा हुआ,तो उन्होंने तुरंत साइबर पुलिस थाना जोधपुर को सूचित किया।
सूचना मिलते ही उप निरीक्षक राजेश कुमार और कांस्टेबल धीरेंद्र सिंह की टीम तत्काल यस बैंक पहुंची और बुजुर्ग को विश्वास में लेकर पूरी घटना की जानकारी ली। पीडि़त बुजुर्ग ने बताया कि 14 अक्टूबर को अनजान नंबर से आए एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताने वाले जालसाज ने उन्हें डराया था।
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ठगों ने आधार कार्ड और बैंक खातों से मनी लॉन्ड्रिंग व अवैध लेनदेन का फर्जी मामला दर्ज होने की धमकी दी और कहा कि गिरफ्तारी से बचना है तो खातों की पूरी राशि वेरिफिकेशन के लिए उनके बताए सरकारी खाते में जमा करानी होगी।
इस खौफ के कारण बुजुर्ग अपनी तीन अलग- अलग एफडी तुड़वाकर पूरे 31 लाख रुपये ठगों के बताए खाते में भेजने आए थे। साइबर पुलिस टीम ने मौके पर ही स्थिति को भांपते हुए बुजुर्ग को आश्वस्त किया और उन्हें डिजिटल अरेस्ट तथा साइबर ठगी के पैंतरों के बारे में विस्तार से समझाया।
पुलिस ने वक्त रहते बुजुर्ग को जालसाजों के चंगुल से मुक्त कराया और उनकी मेहनत की कमाई डूबने से बचा ली। इस सफल कार्रवाई के बाद जोधपुर पुलिस ने आम जन से अपील जारी की है कि पुलिस, सीबीआई, ईडी या क्राइम ब्रांच जैसी कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी व्हाट्सएप कॉल या वीडियो कॉल के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती है। किसी भी तरह की धमकी या पैसों की मांग वाले संदिग्ध कॉल आने पर घबराएं नहीं और तुरंत नजदीकी थाने या साइबर हेल्प लाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
