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साइबर फ्रॉड की सूचना तीन दिन में देने पर नुकसान की भरपाई बैंक को करनी होगी

राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),साइबर फ्रॉड की सूचना तीन दिन में देने पर नुकसान की भरपाई बैंक को करनी होगी। साइबर फ्रॉड की सूचना तीन दिन में देने पर नुकसान की भरपाई बैंक को करनी होगी और ग्राहक का दायित्व शून्य होगा। राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के न्यायिक सदस्य अरुण कुमार अग्रवाल और सदस्य लियाकत अली ने यह महत्त्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए अपील मंजूर कर जिला आयोग जोधपुर द्वितीय के आदेश को उस हद तक निरस्त कर दिया कि आधी जवाब देही बैंक खाताधारक की भी है।

इसी के साथ देश की सबसे अग्रणी भारतीय स्टेट बैंक को पांच हजार रुपए हर्जाने के साथ ग्राहक के खाते से निकाली गई संपूर्ण राशि 49 हजार 960 रुपए मय ब्याज और परिवाद व्यय पांच हजार रुपए 30 दिन में चुकाने होंगे। चौपासनी हाउसिंग बोर्ड निवासी अशोक सिंघवी ने अधिवक्ता अनिल भंडारी के माध्यम से अपील दायर कर कहा कि उनका बचत खाता बैंक की पाल रोड शाखा में है और उसमें एटीएम सुविधा भी ली हुई है।

4 फरवरी 2022 को कुछ ही अंतराल में दो संदेश आए कि एटीएम के जरिए उनके खाते से 24 हजार 980 रुपए दो बार में कुल 49 हजार 960 रुपए निकल गए है,जिस पर उन्होंने तुरंत ही बैंक को सूचना देते हुए प्रथम सूचना रपट भी दर्ज करा दी कि उन्होंने किसी को न तो ओटीपी और न ही पासवर्ड दिया है।

गलती से दूसरे के खाते में डाले पांच लाख रुपए

अनाधिकृत रूप से निकाली गई राशि की अदायगी बैंक की तरफ से नहीं किए जाने पर दायर परिवाद में जिला आयोग ने ग्राहक और बैंक की संयुक्त लापरवाही मानते हुए आधी राशि के लिए ही बैंक को जवाबदेह माना। अपील पर बहस करते हुए अधिवक्ता भंडारी ने कहा कि बिना किसी साक्ष्य और सबूत के जिला आयोग ने यह निष्कर्ष देकर गंभीरतम भूल की है कि संभवत: उपभोक्ता ने ओटीपी नंबर दिए हो।

बैंक की तरफ से कहा गया कि अनाधिकृत निकासी तभी हो सकती है जब ग्राहक ही ओटीपी या पासवर्ड अनजान को बता दें। राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपील मंजूर करते हुए महत्वपूर्ण व्यवस्था दी कि अनाधिकृत व्यवहार से निकासी होने पर उपभोक्ता तीन दिन के भीतर बैंक को सूचना कर देता है तो बैंक उपभोक्ता की कोई जिम्मेदारी नहीं होकर हुए नुकसान की समस्त भरपाई की जवाबदेही और जिम्मेदारी बैंक की ही होगी।

उन्होंने बिना साक्ष्य और सबूत के परिवादी को भी जिला आयोग द्वारा बराबरी की लापरवाही मानकर आधी राशि ही दिलाने के निर्णय को रद्द करते हुए कहा कि बैंक यह साबित करने में नाकाम रही कि उपभोक्ता ने ओटीपी या पासवर्ड अनजान व्यक्ति को दिए हो। उन्होंने एसबीआई को आदेश दिया कि अपीलार्थी को 30 दिन में नुकसानित राशि 49 हजार 960 रुपए मय ब्याज 04 फरवरी 2022 से तथा 5-5 हजार रूपए हरजाना और परिवाद व्यय अदा करें।