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देश-दुनियां के भविष्य के बारे में ज्योतिर्विदों ने की भविष्यवाणियां

देश-दुनियां के भविष्य के बारे में ज्योतिर्विदों ने की भविष्यवाणियां

दो दिवसीय राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन सम्पन्न

जोधपुर,सूर्यनगरी ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान की ओर से वेलकम जोधपुर डवलपमेंट कल्चरल सोसायटी के सहयोग से सूचना केन्द्र के मिनी ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन ज्योतिष विज्ञान की विभिन्न विधाओं के संरक्षण-संवर्धन के लिए समर्पित प्रयासों के संकल्प के साथ रविवार शाम सम्पन्न हो गया। सम्मेलन में देश-दुनिया में विख्यात ज्योतिर्विदों ने भारत एवं वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भावी को लेकर कई भविष्यवाणियाँ की।

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मशहूर हस्तियों का सान्निध्य

सम्मेलन का समापन पूर्व महाराजा पद्मश्री डॉ.रघुवीरसिंह देवड़ा (सिरोही) के मुख्य आतिथ्य,सामुद्रिक ज्ञान के अन्तर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ कैप्टेन डॉ.लेख राज शर्मा की अध्यक्षता तथा ऋषिकुल आश्रम के महामण्डलेश्वर स्वामी डॉ.शिवस्वरूपानन्द सरस्वती, सेन भक्तिपीठ के महामण्डलेश्वर सैनाचार्य स्वामी अचलानंद गिरि, नेपाली बाबा (काठमाण्डू),लाल किताब के जाने-माने विशेषज्ञ जीडी वशिष्ठ,ज्योतिष पत्रिका ‘फ्यूचर समाचार’ के संपादक अरुण बंसल, शंख वैज्ञानिक एवं भविष्यवक्ता डॉ. सीताराम त्रिपाठी, रेल्वे मजिस्ट्रेट श्यामसुन्दर विश्नोई, ज्योतिर्विद विनायक पुलह (मोदीनगर),पं.कैलाश नाथ दाधीच(पुष्कर),पं.मोहनलाल शर्मा (जयपुर),पं.घनश्याम द्विवेदी,पं. एसके जोशी, पं.अनीश व्यास आदि के विशिष्ट आतिथ्य में आयोजित हुआ।

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कैप्टेन डॉ. लेखराज शर्मा को सामुद्रिक ऋषि रत्न अलंकरण

समारोह में संस्थान की ओर से सुप्रसिद्ध सामुद्रिक विज्ञान विशेषज्ञ कैप्टेन डॉ.लेखराज शर्मा (हिमाचल प्रदेश) को रजत श्रीफल प्रदान कर ‘सामुद्रिक ऋषि रत्न अलंकरण से विभूषित किया गया। इस अवसर पर संस्थान की ओर से देश के विभिन्न हिस्सों से आए 300 से अधिक विद्वानों को प्रशस्ति पत्र,स्मृति चिह्न एवं उपवस्त्र से सम्मानित किया गया।

ये भविष्यवाणियां रही खास

दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार में ज्योतिष की विभिन्न विधाओं के निष्णात विद्वानों एवं विदुषियों ने भारत एवं विश्व के सम सामयिक विषयों पर भविष्यवाणी करते हुए कई महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष सामने रखे।
इनमें मुख्य रूप से सितम्बर 2023 के पश्चात् ग्रह-नक्षत्रों के परिवर्तन के कारण अनुकूल परिस्थितियां बननी शुरू होने की बात कही गई। यह भी कहा कि इस समय से पहले तक सम्पूर्ण विश्व में कहीं अतिवृष्टि तो कहीं न्यून वृष्टि, अप्रिय घटनाओं के कारण अशान्ति का माहौल रहेगा। इसमें शासन एवं प्रशासन को सतर्क रहने की आवश्यकता जताई गई।

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अहम भविष्यवाणियां

हिमाचल प्रदेश के हस्त रेखा विशेषज्ञ कैप्टन डॉ.लेखराज शर्मा,संत कमलकिशोर (सहारनपुर),मेरठ रत्न संजीव अग्रवाल,विनायक पुलह मोदी नगर, धर्मेन्द्र बंसल (पटवारी), मोहन लाल शर्मा (जयपुर),सीताराम त्रिपाठी (भीलवाड़ा),नन्दकिशोर पुरोहित (बीकानेर), पंडित घनश्याम द्विवेदी, पं.एसके जोशी, प्रश्नशास्त्री,पं.विजय दत्त पुरोहित जोधपुर के अलावा प्रीति राजगौर मुम्बई, डॉ.सतपाल भारद्वाज (जम्मू),डॉ.सन्तोष लोहिया (कोलकाता),डॉ.विद्या वर्मा, रत्न शर्मा, रत्ना मिश्रा आदि ज्योतिषियों ने विश्व वांगमय में घटित होने वाले घटनाक्रम में खगोलीय परिवर्तन पर अपने ज्योतिषीय आंकलन प्रस्तुत किया। साथ ही भविष्य में खगोलीय परिवर्तन के आधार पर भारत की वर्तमान परिस्थितियों एवं भविष्य में घटित होने वाले घटनाक्रम में ज्योतिषिय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

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संस्थान के संरक्षक पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी एवं संयोजक पं. खींवराज शर्मा ने बताया कि महिला सत्र में नोएडा से आई पं.उषा,अजमेर से पं.सुशीला,सपना सारस्वत,विद्या वर्मा,मोनिका करल,अर्चना प्रजापति आदि ने ज्योतिष ग्रह गोचर के अनुसार महिलाओं की दशा-महादशा एवं ज्योतिष में महिलाओं के योगदान पर अपने विचार प्रकट किए।

प्रबुद्ध ज्योतिषियों ने सितम्बर 2023 के पश्चात ग्रहों के परिवर्तन के साथ वर्तमान परिस्थिति में कुछ राहत एवं परिवर्तन होने की घोषणाएं की। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में ज्योतिषीय गणना अनुसार भारत में अशांति व संघर्ष का वातावरण बना रहेगा, जिसमें शासन, प्रशासन को सतर्क रहना होगा।

ज्योतिषियों ने आगामी 10 वर्षों में भारत एवं विश्व पर ज्योतिषीय दृष्टि से चिंतन मनन किया। आर्थिक, राजनीतिक एवं सामाजिक परिप्रेक्ष्य में भारत की स्थिति और भावी माहौल के बारे में विचार प्रकट किए। इस दौरान ज्योतिषियों ने आगामी विधानसभा चुनाव में राजस्थान में राजनैतिक रूप से सामने आने वाली स्थितियों और इसमें भी विशेषकर जोधपुर की भूूमिका पर निष्कर्षात्मक टिप्पणियों से रूबरू कराया।

शोध अनुसधान एवं समर्पित दायित्वों पर जोर

सम्मेलन को संबोधित करते हुए देश के जाने-माने ज्योतिर्विदों एवं अतिथियों ने ज्योतिष एवं इससे जुड़ी विधाओं में नित नए हो रहे नवाचारों पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए इसके शोध अध्ययन एवं वैज्ञानिक तत्वों को सामने लाने पर जोर दिया और कहा कि सहस्राब्दियों से प्रचलित इस ज्ञान-विज्ञान के प्रति समर्पित होकर आगे आने की आवश्यकता है।

इन्होंने किया अतिथियों का स्वागत व सम्मान

सूर्य नगरी ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान के संरक्षक पं.रमेश भोजराज द्विवेदी,अध्यक्ष डॉ.भैरूप्रकाश दाधीच, संयोजक पं.खींवराज शर्मा,समन्वयक विष्णुचन्द्र प्रजापत,डॉ.सपना सारस्वत,पं.ओमदत्त शंकर,पं. अभिषेक जोशी,पं.मुकेश दाधीच, मनोज मिश्रा,नवीन रामावत,यतीन्द्र प्रजापत,पं.गोपाल शर्मा,नारायण दाधीच,शिवम कांकड़ा,शुभम दाधीच, पं.ऋषिराज शर्मा(अजमेर), राकेश चावला (पंजाब),राकेश परिहार,डॉ. विद्या वर्मा,डॉ.मनोहर सोनी,डॉ. रेखा धनकानी आदि ने अतिथियों का स्वागत किया। समारोह का संचालन सम्मेलन संयोजक पं.खींवराज शर्मा तथा आभार अध्यक्ष एवं आयोजक डॉ.भैरूप्रकाश दाधीच ने व्यक्त किया।

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