गर्दन की नस से बिना चीरफाड़ बदल दिया सिकुड़ा वॉल्व
राज्य में संभवतः पहली बार हुआ एमडीएम अस्पताल में
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),गर्दन की नस से बिना चीरफाड़ बदला दिया सिकुड़ा वॉल्व। शहर के मथुरा दास माथुर अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक विभाग में एंडोवस्कुलर तकनीक-टावी(ट्रांस कैथेटर ऑर्टिक वाल्व इंप्लांटेशन/ रिप्लेसमेंट)के माध्यम से राजस्थान में पहली बार कार्डियो थोरेसिक सर्जनों की टीम ने गर्दन की महाधमनी केरॉटिड आर्टरी के रास्ते मरीज के हृदय के सिकुड़े हुए ऑर्टिक वाल्व से निजात दिलाई।
डॉ सुभाष बलारा (सीटीवीएस विभाग अध्यक्ष)ने बताया कि 63 वर्षीय शिवपुरा, खिंवसर निवासी मोहनी देवी गत दो वर्षों से सीने में दर्द,सांस फूलने तथा हृदय गति की अनियमिता से पीड़ित थी। जांचों (ईको कार्डियोग्राफी तथा सिटी ऑटोग्राम) के उपरांत यह पता चला कि उनके हृदय के ऑर्टिक वाल्व में काफी सिकुड़न (सिवियर अयोर्टिक स्टेनोसिस)है और यह खराब हो चुका है।
उन्होंने बताया कि परिजनों की सहमति, मरीज की बीमारी,उम्र तथा कोमौरबिड इलनेसेस को देखते हुए मरीज को टावी प्रोसीजर करने का निर्णय लिया गया। इस प्रोसीजर में मरीज के गर्दन की महाधमनी कैरोटिड आर्टरी के रास्ते इंट्री करके टावी तकनीक से खराब अयोरटिक वालव को नए वालव से रिप्लेस किया गया। यह संभवत संपूर्ण राजस्थान में पहला टावी प्रोसीजर है जो गर्दन की महाधमनी के रास्ते सफलता पूर्वक किया गया।
एमडीएमएच डॉ विकास राजपुरोहित ने बताया कि यह ऑपरेशन इसलिए भी विशेष है क्योंकि गरदन की महा धमनी ही खून को दिमाग तक ले जाने का काम करती है इसलिए इस ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों द्वारा सेरेब्रल ऑक्सीमीटर के सर्विलांस में इस प्रोसीजर को किया गया जिससे मरीज को न्यूरोवस्कुलर कॉम्प्लिकेशन (जैसे कि लकवा,दिमाग में खून का थक्का जमना या ब्लीडिंग )से बचाया जा सकता है तथा उसकी पहले ही रोकथाम की जा सकती है।
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पहले इस ऑपरेशन की प्रणाली के लिए मरीजों को अन्य राज्यों तथा मेट्रो शहरों में जाना पड़ता था जहां इलाज का खर्चा लगभग 20 लाख रुपए तक आता है,परंतु यह इलाज अब मथुरादास माथुर अस्पताल में राजस्थान सरकार की आरजीएचएस स्कीम के अंतर्गत निशुल्क प्रधान किया गया।
आपरेशन टीम
कार्डियोथोरेसिक विभाग के डॉ सुभाष बलारा,डॉ अभिनव सिंह,डॉ देवाराम,डॉ अमित कार्डियोलॉजी विभाग से डॉ रोहित माथुर,एनेस्थीसिया विभाग अध्यक्ष डॉ. राकेश करनावत,डॉ भरत चौधरी,डॉ कृति,डॉ अलीशा स्टाफ आसिफ,नीलम, प्रकाश।टेक्नीशियन धर्मेंद्र मरेठा और प्रेम इंचार्ज दिनेश गोस्वामी, परफ्यूशनिस्ट माधो सिंह और मनोज ने अपना सहयोग प्रदान किया।
डॉ.अभिनव सिंह (सह.आचार्य, कार्डियोथोरेसिक विभाग)ने बताया कि हृदय के अयोर्टिक वालव मे स्टेनोसिस एक बढ़ाते हुए उम्र की बीमारी है जिसका इनसीडियस 65 वर्ष के ऊपर के लोगों में 2 से 10% है और भारत में इसका मुख्य कारण रूमैटिक हार्ट डिजीज है अन्य कारणों में हाई ब्लड प्रेशर, वाल्व में चूना जमना (एथेरोसिलेरोसिस)है। इस बीमारी मे मरीज की सांस फूलना,छाती में दर्द, बेहोशी आना या धड़कन की अनियमित भी रह सकती है। अयोर्टिक वाल्व में सिकुड़न एक स्टेज के बाद आगे बढ़ जाने के बाद ओपन हार्ट सर्जरी करके वैलव रिप्लेसमेंट या आधुनिक तकनीक इंडो वैस्कुलर टावी प्रोसीजर के जरिए मरीज को बीमारी से निजात दिलाई जा सकती है,क्योंकि समय पर इलाज न होने से यह बीमारी प्राण घातक साबित हो सकती है। प्रोसीजर के उपरांत मरिज स्वस्थ है और सिटीवीएस विभाग में उपचाराधीन है।
डॉ एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल व नियंत्रक डॉ बीएस जोधा तथा एमडीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ विकास राजपुरोहित ने इस आधुनिक एवं सफल ऑपरेशन के लिए डॉक्टरों की टीम को बधाई दी।
