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अंधविश्वासों को तोड़ने के लिए हमें रूढ़िग्रस्त मानसिकता से टकराना होगा-डॉ मंजुला

  • दिव्यांगजन के लिए आमजन में संवेदनशीलता के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
  • मगरा पूंजला स्थित राजकीय कन्या महाविद्यालय में हुआ आयोजन
  • दिव्यांगजन के प्रति समाज की सोच में व्यापक बदलाव की आवश्यकता

जोधपुर, शहर के मगरा पूंजला स्थित राजकीय कन्या महाविद्यालय में शनिवार को विद्या विस्तार योजना के अंतर्गत दौलत राम महाविद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय की इनेबलिंग यूनिट द्वारा दिव्यांग जन के लिए आम जन में संवेदनशीलता पैदा करने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

विद्या विस्तार योजना प्रभारी डॉ चयन मेहता ने बताया कि मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। राजकीय कन्या महाविद्यालय मगरा पूंजला की प्राचार्य डॉ उषा चौहान ने स्वागत उद्बोधन दिया। दौलतराम महाविद्यालय की उप प्राचार्य प्रो सरिता नंदा ने ऑनलाइन शुभकामना संदेश दिया।

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दौलत राम महाविद्यालय की इनेबलिंग यूनिट तथा विद्या विस्तार योजना की सदस्य डॉ रितु खन्ना ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए उसके उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नेत्रहीन विकास संस्थान जोधपुर की संस्थापक एवं अध्यक्ष सुशीला बोहरा ने छात्राओं तथा महाविद्यालय के समस्त अधिकारियों,कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दिव्यांग जन को दया की नहीं,सहयोग की आवश्यकता है। यदि समाज में उनके प्रति सकारात्मक सोच रखी जाएगी तो वे अपने हीनता की ग्रंथि को दूर कर समाज में उत्कृष्ट स्थान हासिल कर सक्षम नागरिक बनने में समर्थ होंगे तथा समाज की उन्नति में बेहतर योगदान देंगे। दिव्यांग छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपने कौशल को निखारने के लिए आधुनिक तकनीक का योगदान भी लेना चाहिए। दिव्यांगता कोई बाधा नहीं, बाधा नकारात्मक सोच है। आज कोई ऐसा क्षेत्र नहीं जहां दिव्यांग जन की पहुंच नहीं। बैंक,अभियांत्रिकी, शिक्षण,गायन,नृत्य,गृहकला,प्रशासन,खेल सभी जगह इन्होंने अपनी पहचान बनाई है।

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विशिष्ट अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की राजनीति विज्ञान की आचार्य डॉ मीना बरड़िया ने कहा कि दिव्यांगजन के प्रति समाज की सोच में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है। परिवार उन्हें बोझ नहीं समझे, दिव्यांगजन को तनिक सा सहयोग चाहिए फिर ये असंभव को भी संभव बना देने का हौसला रखते हैं। अपनी बहन प्रज्ञा निकेतन संस्थान की प्रमुख डॉ कुसुमलता भंडारी का उदाहरण देते हुए उन्होंने अपनी बात कही। दौलतराम महाविद्यालय की विद्या विस्तार योजना की संयोजक डॉ मालिनी शर्मा व दिल्ली विश्वविद्यालय, शैक्षिक प्रकोष्ठ,अधिष्ठाता प्रो रत्नावली ने कार्यक्रम में ऑनलाइन सम्मिलित होकर,छात्राओं को संबोधित किया।

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वर्ल्ड ब्लाइंड एसोसिएशन की सदस्य तथा दौलत राम महाविद्यालय के दिव्यांग प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ मंजुला रथ ने कहा कि यह कार्यक्रम प्रारंभ है, इसके माध्यम से हम समाज में दिव्यांगजन के प्रति चली आ रही नकारात्मक मानसिकता को बदल कर उसे सकारात्मक स्वरूप देने का जिम्मा नई पीढ़ी को सौंप रहे हैं। समाज में दिव्यांगजन के लिए प्रचलित अंधविश्वासों को तोड़ने के लिए हमें रूढ़िग्रस्त मानसिकता से टकराना होगा। भाषाई प्रयोग जिनमें शारीरिक अक्षमता का मजाक बनाया जाता है, ऐसे शब्दों,मुहावरों, लोकोक्तियों को प्रचलन से बाहर करना होगा। दिव्यांग जन को आत्मविश्वास की भावना के साथ विभिन्न कौशलों के प्रशिक्षण लेना चाहिए। दिव्यांगजन विशेषकर छात्राएं परिवार का बोझ नहीं,बल्कि उत्तरदायित्व निर्वहन की अगुआ बनेगी,बशर्ते समाज उन्हें यथोचित सम्मान देकर उनमें हीनता की ग्रंथि नहीं पनपने दें।समाज की सकारात्मक सोच परिदृश्य में व्यापक परिवर्तन लाएगी और यह युवा पीढ़ी इसमें निर्णायक भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम में पैराओलंपिक में स्वर्ण पदक प्राप्त एथलीट संगीता विश्नोई ने भी अपने विचार व्यक्त कर ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता बताई तथा छात्राओं को संदेश दिया कि मन के हारे हार है मन के जीते जीत। विमर्श के बाद प्रज्ञाचक्षु छात्रा चमन के नृत्य ने आयोजन स्थल पर उपस्थित सर्वजन को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर सभी अतिथियों एवं दौलतराम महाविद्यालय की छात्राओं को स्मृति चिह्न भेंट किए गए। नेत्रहीन विकास संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा उनके लिए उपयोगी वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई गई।प्रदर्शनी अवलोकन के बाद नेत्रहीन विकास संस्थान तथा दौलत राम महाविद्यालय की दिव्यांग छात्राओं के मध्य मैत्री भाव से खेल खेले गए।

संस्थान की प्रज्ञा चक्षु छात्राओं द्वारा दिल्ली से आई छात्राओं के लिए विविध प्रकार के खाद्य व्यंजन भी पकाए गए। साहस,क्षमता, जीवट, उल्लास,जीवन की हर परिस्थिति को सहज भाव से स्वीकार कर समाज में उत्तरदायी जीवन के संदेश के साथ आयोजन सफलता पूर्वक संपन्न हुआ।

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