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सेवा में कमी पर बिल्डर पर लगाया जुर्माना

जिला उपभोक्ता आयोग

जोधपुर, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने नामी बिल्डर द्वारा बिना विक्रय पत्र निष्पादन किए ही कब्जा पत्र जारी किए जाने को सेवा में कमी और त्रुटि करार दिया है। आयोग ने दो महीने में परिवादी को विक्रय पत्र निष्पादित करके और पंजीयन करवाकर कब्जा सौंपने के आदेश दिए।

आयोग अध्यक्ष श्याम सुंदर लाटा और सदस्य अनुराधा व्यास और आनंद सिंह सोलंकी ने परिवाद मंजूर करते हुए यह भी निर्देश दिया कि बिल्डर परिवादी को परिवाद दायर करने की तारीख से हर माह 7 हज़ार रुपये बतौर क्षतिपूर्ति अदा करेगा। अब तक कि गणना के मुताबिक यह राशि 5 लाख 53 हजार रूपए बनती है।

इसके अलावा विक्रय पत्र निष्पादन व पंजीयन तक बिल्डर को हर महीने परिवादी को 7 हजार रुपए देने होंगे। साथ ही 25 हजार रूपए हर्जाना और परिवाद व्यय के पांच हजार रूपए भी परिवादी को दो माह में अदा करेगा, अन्यथा 9 फीसदी ब्याज भी चुकाना होगा।

अधिवक्ता राजेश परिहार की ओर से पैरवी करते हुए एडवोकेट अनिल भंडारी ने कहा कि परिवादी ने अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर के पास जोधपुर में आनंद लोक योजना में 13 लाख 75 हजार रुपए की कीमत का निकुंज विला आवास मई 2011 में आरक्षित करवाया और सभी किस्तें यथासमय जमा करवा दी। 17 अक्टूबर 2015 को बिल्डर ने परिवादी को निर्देश दिया कि मकान का भौतिक कब्जा प्राप्त कर लें। इस पर परिवादी ने उनसे कहा कि पहले विक्रय विलेख निष्पादित कर रजिस्ट्री होने के बाद ही वे आरक्षित विला का कब्जा लेंगे।

अधिवक्ता भंडारी ने कहा कि करार के मुताबिक बिना विक्रय विलेख निष्पादित किए उन्हें कब्जे के वास्ते बाध्य नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसके अभाव में परिवादी अपने ही आवास की समस्त राशि चुकाए जाने पर भी विधिक रूप से मकान मालिक नहीं होगा और कई प्रकार की परेशानियां हो जाएगी। अंसल प्रॉपर्टीज की ओर से कहा गया कि जोधपुर विकास प्राधिकरण से पट्टा जारी करवाने में अभी और समय लगेगा और वे कब्जा देने को तैयार हैं और परिवादी ने जेडीए को पक्षकार नहीं बनाया है सो परिवाद खारिज किया जाए।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने परिवाद मंजूर करते हुए कहा कि बिना विक्रय विलेख निष्पादित किए कब्जे के लिए कहा जाना विपक्षी की सेवा में कमी और त्रुटि है। उन्होंने कहा कि विपक्षी 18 नवंबर 2015 से प्रतिमाह सात हजार बतौर क्षतिपूर्ति कब्जा सुपुर्दगी तक परिवादी को अदा करें। उन्होंने यह भी आदेश दिया कि दो माह में मकान का विक्रय पत्र निष्पादित कर रजिस्ट्री व कब्जा सुपुर्द करें और बतौर हर्जाना 25 हजार रुपए और परिवाद व्यय पांच हजार रूपए भी दो माह में अदा करें अन्यथा समस्त राशि पर भुगतान किए जाने तक 9 फीसदी ब्याज भी चुकाना होगा।

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