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हैंडीक्राफ्ट आयटम के प्रति यात्रियों में रुझान,कियोस्क की अवधि बढ़ाई

  • एक स्टेशन एक उत्पाद योजना
  • पहली कियोस्क से हस्तशिल्पी को एक लाख रुपये का संबल

जोधपुर, उत्तर-पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल पर एक स्टेशन एक उत्पाद पायलट प्रोजेक्ट के तहत लगाए गए वुडन-मेटल हैंडीक्राफ्ट कियोस्क के प्रति रेल यात्रियों के रुझान और उत्पादों की होने वाली बिक्री के मद्देनजर रेलवे बोर्ड ने कियोस्क संचालन की अवधि एक बार फिर बढा दी है ।

मंडल रेल प्रबंधक गीतिका पांडेय ने बताया कि केंद्र सरकार की स्थानीय उत्पाद व छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन देने की महत्वाकांक्षी नीति के अंतर्गत देश के सभी मंडलों के नोडल स्टेशनों पर स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए अस्थाई कियोस्क लगाए गए जिसके तहत रेलवे द्वारा उपलब्ध करवाए गए प्लेटफार्म पर उद्यमी अपने उत्पादों का प्रदर्शन व बिक्री कर रहे हैं।

डीआरएम ने बताया कि केंद्र की नीति और रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देशों की पालना में लगाए जा रहे कियोस्क के प्रति रेलयात्रियों व स्थानीय लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है जिसे देखते हुए इनके संचालन अवधि में तीसरी बार वृद्धि की गई है। उन्होंने बताया कि मंडल के मुख्य स्टेशन पर नौ अप्रैल को पहली कियोस्क केंद्रीय रेल राज्य मंत्री दर्शना जरदोश द्वारा उद्घाटन के साथ शुरू हुई थी।

पांडेय ने बताया कि स्टेशन पर लगाई गई पहली कियोस्क के प्रति यात्रियों में अच्छा रुझान देखा और निर्धारित पंद्रह दिनों की अवधि में ही वुडेन – मेटल हैंडीक्राफ्ट के करीब एक लाख रुपये के उत्पाद की बिक्री हुई जिससे कियोस्क संचालक को बड़ा संबल मिला।

इसी प्रकार इसके द्वितीय चरण में 24 अप्रैल से पुनः शुरू की गई कियोस्क संचालक उद्यमी को अब तक 35 हजार रुपये की आमदनी प्राप्त हो चुकी है। यात्रियों में जोधपुर में निर्मित प्रसिद्ध मेटल-हैंडीक्राफ्ट के उत्पादों की खरीद के प्रति आकर्षण को देखते हुए रेलवे ने अब इसे तीसरे चरण के लिए और अनुमति दी है। वर्तमान में संचालित कियोस्क की अवधि आठ मई तक है।

बिक रहे हैं सजावटी आयटम

हैंडीक्राफ्ट कियोस्क पर मेटल और लकड़ी से बने आयटम बिक्री के लिए उपलब्ध है जिसमें महात्मा गौतम बुद्ध,भगवान गणेश,मोटर साइकिल, खरबूजा पॉट,वाल आयटम प्रमुख हैं। ग्राहकों का कहना है कि स्थानीय उत्पादों के रेलवे स्टेशन जैसी जगह पर उपलब्ध होना बड़ी बात है और इससे भी बड़ी बात है कि यह उत्पाद छोटे उत्पादकों द्वारा निर्मित है। यह रेलवे की अच्छी पहल है।

इनका कहना है

रेलवे बोर्ड से प्राप्त दिशा-निर्देशों की पालना में कियोस्क का संचालन स्थानीय उद्यमियों द्वारा किया जा रहा है और इसके लिए पूर्व निर्धारित प्रकिया से ही कियोस्क का आवंटन किया जाता है। शुरू में ही इसके अच्छे परिणामों से स्थानीय छोटे व्यापारी उत्साहित हैं।

-जितेंद्र मीणा
सीनियर डीसीएम, जोधपुर।

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