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पूर्ण गुरु के बिना ब्रह्मज्ञान की खोज असम्भव-साध्वी

जोधपुर, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा मालियों की ढाणी, देदीपानाडा बेरू गांव में विगत तीन दिवसीय सत्संग का रविवार को सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के अंतिम दिन साध्वी द्वारा गुरु महिमा पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि आज हर ओर स्वार्थ पूर्ण लालसा में सांसारिक रिश्ते नाते देखने को मिलते हैं मगर सौभाग्य शाली वे लोग हैं जिन्हें समय रहते इन रिश्तो की नश्वरता का ज्ञान हो जाता है, तब स्वत: ही व्यक्ति के कदम संतों के पास पहुंचते हैं। हर मानव के जीवन के कल्याण का आधार गुरु ही होते हैं मगर पहले जरूरत इस बात की है कि ऐसे सच्चे सतगुरु की पहचान कैसे की जाए।

आजकल लोग लकीर के फकीर बने हुए हैं, गुरु की पहचान न होने के कारण अंधविश्वास में फस जाते हैं हमारे शास्त्र ग्रंथ सच्चे गुरु की कसौटी बताते हुए कहते हैं कि जो गुरु दीक्षा के समय ही इस मानव तन के भीतर ईश्वर के तत्व स्वरूप प्रकाश का दर्शन करा दे ऐसे गुरु ही अपनाने योग्य हैं। जैसे एक अंधा इंसान किसी रंग रूप की पहचान नहीं कर सकता, बहरा इंसान संगीत के बारे में नही बता सकता और गूंगा इंसान बोल नहीं सकता, इसी तरह अगर कोई चाहे कि गुरु के बिना ब्रह्मज्ञान की खोज कर लेगा तो यह असंभव है।

गुरु के बिना कोई भवसागर को पार नहीं कर सकता और वास्तव में भक्ति उसी समय शुरू होती है जब गुरु भक्त के भीतर परमात्मा की ज्योति को प्रकट करते हैं और उस तीसरे नेत्र को खोलते हैं तब हमें धार्मिक ग्रंथों की महिमा भी समझ में आती है। ईश्वर दर्शन की कसौटी को ध्यान में रखते हुए हमें सच्चे सद्गुरु की तलाश करनी चाहिए। साध्वी ने बताया कि गुरुदेव आशुतोष यह नहीं कहते कि आप मेरे पास आकर ज्ञान प्राप्त करो बल्कि उनका तो यह कहना है कि ऐसे गुरु की खोज करो, अगर आपको यह ज्ञान कहीं से भी नहीं मिलता है तो आप दिव्य ज्योति जागृति संस्थान में आकर दिव्य दृष्टि को प्राप्त कर सकते हैं।

यहां पर केवल यह नहीं कहा जाता कि आप केवल सुनकर ही विश्वास कर ले बल्कि उस कसौटी के आधार पर ब्रह्म ज्ञान को दिया जाता है। साध्वी ने कहा कि समाज को श्रेष्ठ बनाने के लिए गुरुदेव ने विश्व शांति का अभियान छेड़ा है जिसमें संस्थान मानव कल्याण हेतु ब्रह्म ज्ञान द्वारा आध्यात्मिक जाग्रति एवं सामाजिक कल्याण के कार्यों में सलंग्न है।
सत्संग के अंत में श्रदालुओं द्वारा पूर्ण आरती की गयी।

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