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बाल मेले के साथ जोधपुर रिफ का 20वां संस्करण शुरू

  • लोक कलाकारों ने दी प्रस्तुति
  • ओपनिंग नाइट सिटी कॉन्सर्ट आज शाम

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),बाल मेले के साथ जोधपुर रिफ का 20वां संस्करण शुरू। लोक संगीत और कलाकारों को समर्पित राजस्थान इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल (जोधपुर रिफ) का 20वां संस्करण गुरुवार से शुरू हो गयाा।

रिफ का आगाज आज सुबह वीर दुर्गादास मेमोरियल पार्क मसूरिया पहाड़ी पर बाल मेला व लोक कलाकारों की प्रस्तुति के साथ किया गया। मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस पांच दिवसीय रिफ में देश- विदेश के करीब 250 से अधिक कलाकार प्रस्तुति देंगे। महोत्सव का आयोजन मुख्य संरक्षक पूर्व नरेश गजसिंह के संरक्षण में किया जाएगा।

वीर दुर्गादास मेमोरियल पार्क मसूरिया पहाड़ी पर आयोजित कार्यक्रम में कचपुड़ी,कच्छी घोड़ी, यंग राजस्थान, म्यूजिशियन राजस्थानी सर्कस,भपंग,बहरूपिया, गरासिया नृत्य,चरी नृत्य व डांडियां गेर आदि की प्रस्तुति दी गई। इस आयोजन में जोधपुर के विभिन्न स्कूली बच्चों ने भाग लिया। सांय 7.30 से रात्रि 10 बजे तक मेहरानगढ़ पार्किंग एरिया में आयोजित नाइट कॉन्सर्ट में पारम्परिक राजस्थानी कलाकारों की लोक संगीत से लेकर फंक संगीत की शानदार परफॉर्मेन्स होगी।

वन भूमि पर किया गया अतिक्रमण खुर्द बुर्द

इस कार्यक्रम में प्रवेश नि:शुल्क रहेगा। इसमें पारंपरिक राजस्थानी कलाकारों की विविधता को दर्शाते हुए,राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे।

छह महाद्वीपों के कलाकार बिखेरेंगे लोक संगीत के रंग
जोधपुर रिफ महोत्सव के निदेशक दिव्य भाटिया ने बताया कि फेस्टिवल में विश्व के कई नामचीन संगीतकार व कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। फेस्टिवल का समापन 26 अक्टूबर को होगा। इस पांच दिन के संगीत महोत्सव में शहरवासी व अन्य लोग न केवल विश्व स्तरीय संगीत सुन पाएंगे बल्कि जड़ों को भी समझ पाएंगे।

इस वर्ष महोत्सव अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। इसमें छह महाद्वीपों के कलाकार,एक दर्जन से अधिक देशों के संगीतकार और राजस्थान की समृद्ध लोक संगीत परंपराओं से जुड़े 250 से अधिक लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इस बार कोलंबिया,चिली, पुर्तगाल,पोलैंड,स्कॉटलैंड और एस्टोनिया सहित विभिन्न देशों के कलाकार भाग लेंगे।

यहां अलग-अलग संस्कृतियों और संगीत परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। राजस्थान के मंगणियार, लंगा, मेघवाल,भोपा,कालबेलिया, मीणा,भील सहित विभिन्न समुदायों के कलाकार महोत्सव की प्रमुख आकर्षण होंगे। इन कलाकारों की पारंपरिक लोक धुनें अंतरराष्ट्रीय संगीतकारों के साथ संवाद और सहयोग के नए अवसर भी तैयार करेंगी।