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जोधपुर,राजस्थान की पांचों विद्युत कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों की कोरोना की वजह से लगभग 70 से ज्यादा कर्मचारी अभी तक अपने जान गंवा चुके हैं। राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष जगदीश दाधीच ने बताया कि जहां विद्युत कर्मचारी 24 घंटे अपनी सेवाएं देकर कोरोना से ग्रसित जनता को बचाने के लिए अस्पतालों एवं उद्योगों व जनता को विद्युत आपूर्ति हेतु अपनी पूर्ण सेवाएं प्रदत कर रहे हैं।

जहां कोरोना की प्रथम लहर एवं दूसरी लहर में अपनी जान गंवा कर लगातार सेवाएं दे रहे हैं। वहीं राज्य सरकार विद्युत कर्मचारियों को अतिआवश्यक सेवाओं में न मानते हुए न तो फ्रंट लाइन कर्मचारी घोषित किया है और न ही उसकी सुविधाएं प्रदत्त कर रही है। दूसरी और विद्युत प्रशासन भी विद्युत कर्मचारियों के लिए सुरक्षा की दृष्टि से न के बराबर सुविधाएं उपलब्ध करवा पाया।

कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरणों के कारण कोरोना से ग्रसित हो रहे हैं साथ ही अपने पूरे परिवार को संक्रमित कर रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार व उच्चअधिकारियों को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। फ्रंटलाइन कर्मचारी घोषित करते हुए सर्वप्रथम शतप्रतिशत कर्मचारियों के टीकाकरण की सुचारू व्यवस्था करनी चाहिए।

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अभी तक राज्य सरकार द्वारा विद्युत कर्मियों के लिए किसी प्रकार की टीकाकरण के आदेश जारी नहीं किए हैं, न ही मृतक कर्मचारी के आश्रित को मुआवजे के तौर पर घोषित 50 लाख रुपए का भुगतान के आदेश भी नहीं किए गए।

ऐसे में विद्युत कर्मचारी अपनी निरंतर सेवाओं के बाद में अपनी जान देकर सेवाएं प्रदान कर रहा है। संगठन के उपाध्यक्ष जगदीश दाधीच ने बताया कि अगर सरकार फ्रंटलाइन कर्मचारी घोषित नहीं करती है एवं निगम प्रशासन कर्मचारियों को टीकाकरण करवाने एवं कोराना संक्रमण से बचाव हेतु सुरक्षा सामग्री उपलब्ध नहीं करवा पाती है तो ऐसे में कर्मचारी अपने कार्य करने एवं सेवाएं देने में असमर्थ रहेंगे। मजबूरन कार्य का बहिष्कार करना पड़ेगा जिसकी समस्त जिम्मेदारी विद्युत प्रशासन एवं राज्य सरकार की होगी।

दाधिच ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा जिनको कोराना फ्रंटलाइन कर्मचारी घोषित किया गया है उनकी मृत्यु दर को देखते हुए विद्युत कर्मचारियों की मृत्यु दर कई गुना अधिक है और वर्तमान में राजस्थान में 1000 से अधिक विद्युत कर्मचारी कोरोना की चपेट में हैं जो राज्य सरकार की गाइड लाइन के अनुसार इलाज ले रहे हैं।

ऐसे में विद्युत कर्मचारी दहशत के माहौल में है, उनका परिवार भी कर्मचारियों की दशा को लेकर दहशत में है। मृतक कर्मचारियों में कई ऐसे कर्मचारी हैं जिनके पिताजी विद्युत दुर्घटना में मृत्यु को प्राप्त हो गए थे उनके स्थान पर कार्य करने वाले कर्मचारी अब कोरोना की वजह से मृत्यु को प्राप्त हो गए हैं। ऐसे में उन परिवार की क्या स्थिति है उनका अहसास किया जा सकता है। दाधीच ने बताया कि समय रहते सरकार तुरंत निर्णय नहीं लेती है तो कर्मचारी संगठन विवश होकर अपनी सेवाएं देने के लिए असमर्थता जाहिर करेंगे एवं कार्य का बहिष्कार करने को मजबूर होंगे।

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