आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिकों ने वेल्डिंग विज्ञान को दिया नया आयाम

परमाणु रिएक्टर से लेकर पुलों तक की संरचनाओं को सुरक्षित व टिकाऊ बनाने पर हो रहा शोध

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिकों ने वेल्डिंग विज्ञान को दिया नया आयाम। परमाणु रिएक्टरों,ताप विद्युत संयंत्रों,अपतटीय मंचों, ऊर्जा पाइपलाइनों,पुलों और अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक संरचनाओं की मजबूती एवं दीर्घायु में वेल्डेड जोड़ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर के वैज्ञानिक अत्याधुनिक वेल्डिंग तकनीक और उन्नत सामग्रियों के विकास पर शोध कर रहे हैं।

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यह अनुसंधान देश की महत्वपूर्ण अवसंरचना को अधिक सुरक्षित,मजबूत और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इस अनुसंधान का नेतृत्व आईआईटी जोधपुर के यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर राहुल छिब्बर कर रहे हैं। उनके वेल्डिंग एवं जॉइनिंग अनुसंधान समूह द्वारा उन्नत वेल्डिंग उपभोग्य सामग्री,नवीन जोड़ तकनीक तथा सामग्री अभियांत्रिकी से जुड़े समाधान विकसित किए जा रहे हैं।

इनका उपयोग अति-उच्च तापमान वाले ताप विद्युत संयंत्रों,परमाणु रिएक्टरों, समुद्री संरचनाओं और रणनीतिक ऊर्जा अवसंरचना जैसे संवेदन शील क्षेत्रों में किया जा सकता है। प्रोफेसर राहुल छिब्बर के अनुसार,किसी भी बड़ी संरचना की विश्वसनीयता उसके जोड़ की मजबूती पर निर्भर करती है।

वेल्डिंग की सूक्ष्म संरचना को समझने और उन्नत जोड़ तकनीक विकसित करने के माध्यम से अधिक सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ अवसंरचना तैयार करना अनुसंधान का प्रमुख उद्देश्य है। अगली पीढ़ी की वेल्डिंग सामग्री पर शोध अनुसंधान समूह द्वारा उन्नत वेल्डिंग फ्लक्स तथा इलेक्ट्रोड आवरण विकसित किए जा रहे हैं। इनका उपयोग विभिन्न औद्योगिक वेल्डिंग प्रक्रियाओं में किया जाता है। शोधकर्ता सांख्यिकीय प्रयोगात्मक डिजाइन, पूर्वानुमान आधारित मॉडलिंग तथा कृत्रिम तंत्रिका तंत्र की सहायता से बहु-घटक फ्लक्स प्रणालियों को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं।

इसके साथ ही प्राकृतिक एवं पर्यावरण-अनुकूल खनिजों,जैसे लाल गेरू, का उपयोग कर टिकाऊ और उच्च प्रदर्शन वाले वेल्डिंग इलेक्ट्रोड विकसित किए जा रहे हैं। वेल्ड पूल में पिघली धातु के प्रवाह और विभिन्न तत्वों के स्थानांतरण का सूक्ष्म अध्ययन कर यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि सूक्ष्म स्तर पर होने वाले परिवर्तन वेल्ड की मजबूती, कठोरता और टिकाऊपन को किस प्रकार प्रभावित करते हैं।

विभिन्न धातुओं को जोडऩे की चुनौती पर काम
आधुनिक अभियांत्रिकी में अलग-अलग प्रकार की धातुओं को एक साथ जोडऩा आवश्यक होता है। हालांकि,ऐसी असमान धातुओं की वेल्डिंग अत्यंत जटिल प्रक्रिया है। प्रोफेसर छिब्बर का अनुसंधान समूह डुप्लेक्स स्टेनलेस स्टील, इनकोनेल जैसे निकेल आधारित सुपरएलॉय तथा उच्च प्रदर्शन वाली पाइपलाइन स्टील की वेल्डिंग पर अध्ययन कर रहा है। शोध में अवशिष्ट तनाव, कार्बन के स्थानांतरण और सूक्ष्म संरचनात्मक अस्थिरता जैसी समस्याओं के समाधान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्नत इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शिकी, इलेक्ट्रॉन बैकस्कैटर विवर्तन,संक्षारण मूल्यांकन तकनीकों तथा परिमित तत्व मॉडलिंग आधारित संगणकीय अनुकरण के माध्यम से वेल्डेड जोड़ों की दीर्घ कालिक कार्य क्षमता और टूटने के व्यवहार का अध्ययन किया जा रहा है।

वेल्डिंग विज्ञान के साथ ही प्रोफेसर छिब्बर का शोध तंतु- प्रबलित बहुलक नैनो-समग्र पदार्थों पर भी केंद्रित है। विशेष रूप से कांच तंतु प्रबलित बहुलक-मृदा नैनो-समग्र पदार्थों को समुद्री एवं अपतटीय वातावरण के लिए विकसित किया जा रहा है।