ट्रांसफार्मर के बाहर मेटल फेंसिंग को लेकर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
राजस्थान हाईकोर्ट
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),ट्रांसफार्मर के बाहर मेटल फेंसिंग को लेकर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब। राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बिजली के ट्रांसफार्मरों के चारों ओर लगाई जा रही मेटल फेंसिंग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने एडवोकेट जितेंद्र माहेश्वरी और एडवोकेट ललित परिहार द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि इन फेंसिंग की वजह से यदि कोई अनहोनी या हादसा हुआ,तो उसके लिए संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
दरअसल नगर निगम जोधपुर ने शहर की सुंदरता बढ़ाने की योजना के तहत पांचबत्ती चौराहा,सर्किट हाउस रोड,चौपासनी हाउसिंग बोर्ड, सूरसागर और सरदारपुरा सहित शहर के अधिकांश इलाकों में जैसे प्रमुख मार्गों पर लगे पुराने ट्रांसफार्मरों को रंगीन मेटल सीएनसी शीट से ढकने की शुरुआत की है। नगर निगम का तर्क है कि इससे न केवल शहर आकर्षक दिखेगा,बल्कि ये स्थान सेल्फी पॉइंट के रूप में भी विकसित होंगे। हालांकि,याचिकाकर्ताओं ने इसे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा और साइलेंट खतरा बताया है।
याचिका में कहा गया है कि धातु बिजली की सुचालक होती है। यदि ट्रांसफार्मर में ऑयल लीकेज, इन्सुलेशन फेलियर,अर्थिंग फॉल्ट या शॉर्ट सर्किट जैसी कोई भी तकनीकी खराबी आती है,तो पूरी मेटल शीट में करंट फैल सकता है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दलील दी कि यह पूरी परियोजना सावधानी के सिद्धांत का सीधा उल्लंघन है,जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। सुनवाई के दौरान एक्टिंग चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार,जोधपुर जिला कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
आयुक्तालय क्षेत्र में धारा 163 की निषेधाज्ञा लागू
सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता व अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने नोटिस स्वीकार करते हुए पक्ष रखने के लिए समय मांगा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में लगाई गई जालियों के कारण होने वाले किसी भी हादसे की पूरी जिम्मेदारी व्यक्तिगत रूप से संबंधित अधिकारियों की होगी। मामले की अगली सुनवाई अब दो सप्ताह बाद तय की गई है।
