तकनीक ज़रूरी है लेकिन मानसिक संतुलन उससे भी ज़्यादा जरूरी- डॉ.महेन्द्र कुमार
- तीन दिवसीय राज्य स्तरीय सीआरई कार्यशाला संपन्न
- बच्चों में बढ़ती स्क्रीन लत पर मंथन
- डिजिटल व्यवहार प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),तकनीक ज़रूरी है लेकिन मानसिक संतुलन उससे भी ज़्यादा जरूरी-डॉ.महेन्द्र कुमार। नवज्योति मनोविकास स्पेशल टीचर ट्रेनिंगकॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय सतत पुनर्वास शिक्षा (सीआरई)कार्यशाला के अंतिम दिन की कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों में बढ़ती स्क्रीन निर्भरता, उससे उत्पन्न व्यवहार संबंधी समस्याओं तथा उनके व्यावहारिक समाधान पर विशेष शिक्षकों, अभिभावकों और प्रशिक्षकों को संवेदनशील एवं सक्षम बनाना था।
कार्यशाला के प्रथम एवं द्वितीय सत्र में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के टेप्स एवं हैप्सन केंद्र की सह आचार्य डॉ.चंद्रकला गोस्वामी ने कहा कि व्यक्तिगत शैक्षणिक योजना एवं व्यवहार योजनाओं में स्क्रीन प्रबंधन को कैसे शामिल किया जा सकता है? ताकि बच्चों के शैक्षिक और व्यवहारिक विकास को संतुलित किया जा सके और किस प्रकार अत्यधिक मोबाइल, टीवी औरटैबलेट के उपयोग से बच्चों में ध्यान की कमी, चिड़चिड़ापन,सामाजिक दूरी और व्यवहार संबंधी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। उन्होंने बहुस्तरीय हस्तक्षेप रणनीतियों के माध्यम से स्क्रीन आदतों में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उपाय बताए।
तीसरे सत्र में नवज्योति मनोविकास स्पेशल टीचर ट्रेनिंग कॉलेज की सहायक आचार्या डॉ.ममता रानी ने ‘कक्षा स्तर पर डिजिटल व्यवहार संबंधी चुनौतियों के प्रबंधन’ पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षकों को बताया कि कक्षा में बच्चों के स्क्रीन आधारित व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए किस प्रकार संरचित दिनचर्या,सकारात्मक व्यवहार समर्थन,वैकल्पिक गतिविधियों और स्पष्ट नियमों का उपयोग किया जा सकता है।
चौथे सत्र में सामाजिक कार्यकर्ता भाविका सालेचा ने बच्चों के स्क्रीन समय को कम करने में परिवार की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अभिभावकों को जागरूक करते हुए बताया कि घर का वातावरण,माता-पिता का स्वयं का डिजिटल व्यवहार,संवाद और संयुक्त पारिवारिक गतिविधियाँ बच्चों की स्क्रीन आदतों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
पांचवे सत्र में नवज्योति मनोविकास केंद्र के विशेष शिक्षक,स्पेशल ओलंपिक भारत के कोच एवं मास्टर ट्रेनर डॉ.महेश कुमार पारीक ने बच्चों में वैकल्पिक खेल कौशल एवं कार्यात्मक व्यवहारों के विकास पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि खेल,शारीरिक गतिविधियाँ और दैनिक जीवन कौशल बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने के प्रभावी माध्यम हैं,जिससे उनके सामाजिक, भावनात्मक एवं शारीरिक विकास को भी बढ़ावा मिलता है।
छठे सत्र में नवज्योति मनोविकास विशेष शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ.महेंद्र कुमार ने विविध अधिगम आवश्यकताओं वाले बच्चों में स्क्रीन लत और व्यवहार के बीच संतुलन स्थापित करने पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने संरचित रणनीतियों के माध्यम से स्क्रीन निर्भरता कम करने तथा डिजिटल के सकारात्मक और नियंत्रित उपयोग के तरीकों को स्पष्ट किया।
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कार्यक्रम के समापन अवसर पर द्वितीय दिवस की मूल्यांकन प्रश्नावली में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले शायर कंवर एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले चेतन राम को कार्यक्रम समन्वयक डॉ.महेंद्र कुमार ने पुरस्कृत किया गया।इसके पश्चात प्रतिभागियों से फीडबैक एवं प्रमाण पत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया। अंत मेंकार्यक्रम समन्वयक डॉ.महेंद्र कुमार ने सभी वक्ताओं,प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
