राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर विवाहित पुत्री को अनुकम्पा नियुक्ति

  • राज्य सरकार की अपील खारिज
  • दो साल बाद मिली अनुकंपा नौकरी

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर विवाहित पुत्री को अनुकम्पा नियुक्ति।राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना में दो साल बाद याचिकाकर्ता विवाहित पुत्री को अनुकम्पा नियुक्ति दी है। हाइकोर्ट खण्डपीठ ने राज्य सरकार की अपील को ख़ारिज करते हुए प्रतिपादित किया था कि जीवित पुत्र होने के बावजूद आश्रित विवाहिता पुत्री भी अनुकम्पा नियुक्ति की हकदार है। याचिकाकर्ता प्रियंका माथुर की ओर से अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने पैरवी की। पूर्व में भी इसी अवमानना याचिका में आदेशों की पालना नहीं करने और नोटिस तामील होने के बावजूद अवमाननाकर्ताओ के हाज़िर नहीं होने पर हाइकोर्ट ने किया जोधपुर तत्कालीन सीएमएचओ डॉ सुरेंद्र सिंह शेखावत को रुपये 20,000 के जमानतीय वारंट से व्यक्तिश: तलब किया था। अब अवमानना याचिका की अगली सुनवाई 22 जनवरी 2026 को होगी।

चिकित्सा विभाग में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता पद पर राजकीय सेवारत रहते हुए देहांत हो जाने पर कर्मचारी लीला माथुर के आश्रित पुत्र रवि माथुर ने अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था लेकिन अनुकम्पा नियुक्ति आदेश जारी होने पर उसने अपने व्यक्तिगत कारणों से जॉइन नहीं किया और निश्चित समय अवधि में जॉइन करने से इंकार कर दिया। जिसपर कर्मचारी की आश्रित विवाहिता पुत्री प्रियंका माथुर ने अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया,लेकिन चिकित्सा विभाग ने नियमों के विपरीत जाकर वर्ष 2022 और तत्पश्चात 2024 में अनुकम्पा नियुक्ति देने से इंकार कर दिया। जिसपर याचिकाकर्ता ने रिट याचिका दायर की,जो हाइकोर्ट एकलपीठ ने स्वीकार करते हुए अनुकंपा नियुक्ति के लिए कंसीडर करने का आदेश दिया,लेकिन राज्य सरकार ने उक्त एकलपीठ आदेश को स्पेशल अपील के जरिये हाइकोर्ट खण्डपीठ में चुनौती दी।

खण्डपीठ में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता यशपाल ख़िलेरी ने बहस करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने अनुकम्पा नियमों का सही विवेचना नही कर आवेदन अस्वीकार किया है जो अनुकम्पा नियम 1996 के प्रावधानों के विपरीत है। नियम 6(2) के परन्तुक अनुसार एक आश्रित के इंकार कर देने पर अन्य आश्रित अनुकम्पा नियुक्ति के लिए हकदार हैं। साथ ही विवाहित पुत्री भी अनुकम्पा नियुक्ति के लिए हकदार हैं बशर्ते वह मृतक कार्मिक पर 1996 के नियमानुसार आश्रित हो। अधिवक्ता ख़िलेरी ने न्यायालय का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि राजस्थान हाइकोर्ट की वृहदपीठ ने प्रियंका श्रीमाली प्रकरण में यह निर्धारित कर दिया कि विवाहिता पुत्री भी अनुकम्पा नियुक्ति के लिए हकदार हैं। अनुकम्पा नियम 1996 में वर्ष 2021 में राज्य सरकार द्वारा किये गए संशोधन से पूर्व याचिकाकर्ता अनुकम्पा नियुक्ति हेतु हकदार थी और उसका प्रकरण वर्ष 2020 का है लेकिन राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2021 में हुए संशोधन का हवाला देकर अनुकम्पा नियुक्ति देने से मना करना विधि विरुद्ध हैं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शुक्रवार को जोधपुर दौरे पर

हाइकोर्ट खण्डपीठ ने 06 मार्च 2025 को अहम निर्णय देते हुए याचिकाकर्ता को अनुकम्पा नियुक्ति देने के एकलपीठ निर्णय को सही मानते हुए राज्य सरकार की अपील ख़ारिज कर दी। उक्त निर्णय को राज्य सरकार ने आगे कोई चुनौती नहीं दी। बावजूद इसके,निर्णयों की पालना नही होने पर याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता यशपाल ख़िलेरी के मार्फ़त अवमानना याचिका पेश की।
अवमानना याचिका के नोटिस तामिल हो जाने के बाद भी और बारबार पालना रिपोर्ट पेश करने के अंतरिम आदेश देने के बाद अब जाकर राज्य सरकार ने अनुकम्पा नियुक्ति आदेश 24 दिसम्बर 2025 जारी कर याचिकाकर्ता को कनिष्क लिपिक पद पर नियुक्ति दी है, लेकिन पाँच साल के विलंब बाबत कोई अनुतोष नहीं दिया।