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उपभोक्ता आयोग ने हर्जाना सहित क्लेम राशि ब्याज सहित देने के दिए आदेश

जोधपुर, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम जोधपुर में न्यू इंडिया एश्योरेंस कम्पनी जोधपुर के खिलाफ चल रहे प्रकरण में जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कम्पनी को क्लेम खारिज करने का उपभोक्ता के साथ अन्याय मानते हुए बीमा राशि मय ब्याज और हर्जाना सहित देने का आदेश दिये। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम जोधपुर की अध्यक्ष चन्द्रकला जैन एवं सदस्य राजाराम सर्राफ व अफसाना खान के समक्ष परिवादी बचनाराम पुत्र अर्जूनाराम विरूद्ध न्यू इंडिया एश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड मण्डलीय कार्यालय जोधपुर के प्रकरण में परिवादी ने बताया कि बीमा कंपनी में उसका वाहन 10.07.2014 से 09.07.2015 तक अवधि के लिये 13 लाख रुपये तक की क्षति की सीमा तक बीमित था 28.06.2015 को भोपालगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र में एक मोटरसाईकिल के चालक की लापरवाही से सड़क़ दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो जाने पर वहाँ उपस्थित भीड़ ने बीमित वाहन बस में तोड़फ़ोड़ की और आग लगा कर जला दी। इस पर जांचकर्ता सहायक उपनिरीक्षक द्वारा उपद्रवियों के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई। बस जलाने की सूचना अप्रार्थी बीमा कम्पनी को भी दी गई और वाहन से सम्बन्धित दस्तावेज सुपुर्द करते हुए दावा राशि भुगतान करने का निवेदन किया गया। अप्रार्थी बीमा कंपनी ने सर्वे के पश्चात् वाहन को हुई हानि का विस्तृत आंकलन कराते हुए वाहन को पूर्णत: नकारा मानकर टोटल लोस करने का निर्णय किया और प्रार्थी से सम्बन्धित दस्तावेज भी हस्ताक्षर करवा कर रख लिये काफी समय तक कोई कार्यवाही नहीं करने पर प्रार्थी द्वारा जानकारी की गयी तो प्रार्थी को पत्र 05.04.2016 की प्रतिलिपी दी गई उसमें प्रार्थी का दावा निरस्त किया गया। इस प्रकार अप्रार्थी ने मनमाने आधार पर प्रार्थी का दावा निरस्त कर सेवा में कमी की है। अप्रार्थी की ओर से जवाब प्रस्तुत कर प्रारम्भिक आपत्तियों के प्रार्थी वाहन बीमित होना बताया गया।जिला उपभोक्ता आयोग प्रथम जोधपुर की अध्यक्ष चन्द्रकला जैन सदस्यगण राजाराम सर्राफ व अफसाना खान ने समस्त दस्तावेजों का अवलोकन कर राष्ट्र्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने समय-समय पर जारी किये अपने निर्णयों में परिस्थितियों और तकनीकी बिन्दुओं पर उदारता पूर्वक विचार करने का दिशा-निर्देश स्पष्ट किया है। अप्रार्थी ने प्रार्थी के नुकसान से इन्कार नहीं किया है और सर्वेयर ने भी रिपोर्ट पेश की है। प्रार्थी ने बीमा सुरक्षा प्राप्त करने के लिये आवश्यक प्रीमियम राशि अदा की है। तभी पॉलिसी जारी की है। ऐसी स्थिति में तकनीकी बहाना लेकर क्लेम खारिज करना उपभोक्ता के साथ अन्याय किया गया है। अत: प्रार्थी का परिवाद स्वीकार किया जाकर आदेश दिया जाता है कि अप्रार्थी निर्णय तारीख से दो माह के भीतर प्रार्थी को पॉलिसी में अंकितानुसार बीमा मूल्य राशि 13,00,000/-रूपये (तैरह लाख रूपये मात्र) मय 18 (अठारह) प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज के अदा करे । इसके अलावा मानसिक कष्ट एवं पीड़ा पेटे 10,000 रूपए एवं परिवाद व्यय पेटे 5000 रूपए भी अदा करे । उक्त 15,000 रूपए की राशि की अदायगी दो माह में नहीं करने पर प्रार्थी उक्त देय राशि पर 6 (छह) प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज निर्णय की दिनांक से तावसूली प्राप्त करने का भी अधिकारी होगा।

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