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  • रविवार को लगेगा ठंडे का भोग  
  • इस बार मेला नही होगा,सिर्फ दर्शन कर सकेंगे

जोधपुर, प्राचीन शीतला माता के मंदिर में शनिवार शाम को मंदिर ट्रस्ट की ओर से ध्वजारोहण किया गया। कोरोना को देखते हुए इस बार मेला नहीं लगाया गया है। सिर्फ मंदिर में गाइड लाइन के तहत दर्शन की व्यवस्था की गई है। नाइट कर्फ्यू की अवधि के दौरान रात दस बजे से सुबह पांच बजे तक मंदिर बंद रहेगा। चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर कल घरों में ठंडे का भोग लगाकर सेवन किया जाएगा। इस दौरान रसोईघरों में अवकाश रहेगा और चूल्हा नहीं जलेगा।

Worship begins with flag hoisting at Sheetla Mata Temple

शीतला माता मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष निर्मल कच्छवाह ने बताया कि शाम साढ़े चार बजे को कोविड-गाइड लाइन पालना के साथ मंदिर पुजारियों, ट्रस्टीगणों की मौजूदगी में राज्यसभा सदस्य राजेन्द्र गहलोत, महापौर उत्तर कुंती परिहार व समाजसेवी जसवंत सिंह कच्छवाह ने ध्वजारोहण किया।

हालांकि आज सुबह से ही गांवों से श्रद्धालुओं ने आकर मंदिर में माता के दर्शन करने शुरू कर दिए थे। शहर में अष्टमी को माता को भोग लगाया जाएगा। शीतला माता पूजन पूरे भारत में केवल मारवाड़ के जोधपुर और नागौर में चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी के बजाए दूसरे दिन अष्टमी के दिन किया जाता है।

इसका प्रमुख कारण विक्रम संवत 1826 में सप्तमी तिथि के दिन जोधपुर के तत्कालीन महाराजा विजय सिंह के महाराज कुमार की आकस्मिक मृत्यु होने से अकता रखने की परम्परा चली आ रही है। इसी कारण यहां अष्टमी को शीतला माता को ठंडे का भोग लगाया जाता है।

उन्होंने बताया कि रात्रि 10 बजे से सुबह 5 बजे तक रात्रिकालीन कर्फ्यू के कारण मंदिर बंद रहेगा। मंदिर प्रशासन की ओर से सुरक्षा की दृष्टि से यहां कुल 35 सीसी टीवी कैमरों की व्यवस्था की गई है। मंदिर की सीढिय़ों से निकासी द्वार तक क्लोज सर्किट कैमरे लगाए गए हैं।

रविवार को लगेगा ठंडे का भोग

शहर में अधिकांश रसोई घरों में रविवार को अवकाश रहेगा। घरों में माताजी के भोग ‘ठंडा’ प्रसादी के रूप में मीठी-नमकीन पुड़ीय़ां, सोगरा, शक्कर पारे, पचकुटे व केरी-गूंदा की सब्जी, केरी पाक, लांजी, मठरी, सलेवड़े, खीचिए, पापड़, गुलगुले, खाजा, कांजी बड़े, दही बड़े आदि कई तरह के मारवाड़ के पारम्परिक पकवान बनाए गए।

कई घरों में शीतलाष्टमी को दो से तीन टाइम ठंडा सेवन तो कई घरों में अष्टमी से दो-तीन दिनों तक भी ठंडा भोजन करने की परम्परा निभाई जाती है। इस दौरान घरों में भी परिंडों व मंदिरों में प्रतीकात्मक रूप से शीतला माता के ठंडे भोजन का प्रसाद चढ़ाकर लोग उसका सेवन करेंगे। शीतलाष्टमी को घरों में शीतला माता, ओरी माता, अचपड़ाजी एवं पंथवारी माता का प्रतीक बनाकर पूजन किया जाएगा।

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