आयुर्वेद विश्वविद्यालय के 24वें स्थापना दिवस पर गूँजे वेद मंत्र

  • 51 औषधीय पौधे
  • शास्त्रीय मराठी भाषा साहित्य अध्ययन केंद्र की स्थापना
  • आयुष चिकित्सा पद्धतियों को जन जन तक पहुंचाना ही विश्वविद्यालय का लक्ष्य
  • यज्ञ-हवन के साथ आयुर्घोष- 2026 के विजेताओं का सम्मान

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),आयुर्वेद विश्वविद्यालय के 24वें स्थापना दिवस पर गूँजे वेद मंत्र।डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय,जोधपुर का 24वां स्थापना दिवस मंगलवार को हर्षोल्लास के साथ गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो.(वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने की,जबकि मुख्य अतिथि के रूप में काजरी के निदेशक डॉ.सुरेश पाल सिंह तंवर उपस्थित थे।

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स्थापना पर वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ-हवन,वृक्षारोपण,सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पुरस्कार वितरण सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। विश्वविद्यालय में शास्त्रीय मराठी भाषा साहित्य अध्ययन केंद्र की स्थापना की घोषणा भी की गई।

हवन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ प्रातः 10:30 बजे प्रशासनिक भवन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन के साथ हुआ। कुलगुरु प्रो गोविंद सहाय शुक्ल के सानिध्य में आयोजित इस अनुष्ठान में विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों,अधिकारियों और कर्मचारियों ने आहुति देकर विश्वविद्यालय की उन्नति और जनकल्याण की कामना की।

51 अर्जुन पौधों का रोपण
हवन के उपरांत विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान कुलगुरु और मुख्य अतिथि ने मिलकर 51 अर्जुन के औषधीय पौधों का रोपण किया। कुलगुरु प्रो. शुक्ल ने कहा कि आयुर्वेद का मूल आधार प्रकृति है और औषधीय पौधों का संरक्षण भविष्य की चिकित्सा व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लगाए गए ये पौधे आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण और आयुर्वेदिक चिकित्सा दोनों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे।

मुख्य अतिथि डॉ.सुरेश पाल सिंह तंवर ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में यह संस्थान लगातार उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. गोविंद सहाय शुक्ल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने अपने 24 वर्षों की यात्रा में शिक्षा,चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल कुशल चिकित्सक तैयार करना नहीं,बल्कि अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करना भी है।

मराठा अध्ययन केंद्र व शास्त्रीय मराठी भाषा साहित्य अध्ययन केंद्र की स्थापना
सुश्रुत सभागार में आयोजित सांस्कृतिक एवं पारितोषिक वितरण समारोह के दौरान ‘मराठा अध्ययन केंद्र’ का उद्घाटन किया गया और मराठा इतिहास पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई। विश्वविद्यालय में शास्त्रीय मराठी भाषा साहित्य अध्ययन केंद्र की स्थापना की घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य मराठी भाषा, साहित्य और इतिहास के अध्ययन-अनुसंधान को बढ़ावा देना है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा समारोह
समारोह में आयुष संकाय के विद्यार्थियों (बीएएमएस,बीएचएम एस और बीएससी नर्सिंग) ने योग प्रदर्शन,गणेश वंदना और विभिन्न लोक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं,जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।

आयुर्घोष-2026 के विजेताओं का सम्मान
कार्यक्रम में छात्र कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रो.गोविंद प्रसाद गुप्ता ने ‘आयुर्घोष-2026’ खेलकूद प्रतियोगिता की रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके पश्चात विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पदक और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर कुल सचिव अखिलेश कुमार पीपल, प्राचार्य प्रो चंदन सिंह,डीन आयुर्वेद प्रो महेंद्र कुमार शर्मा,छात्र कल्याण बोर्ड के चेयरमैन प्रो गोविंद गुप्ता सहित सभी संकायो के प्राचार्य, सभी विभागाध्यक्ष,संकाय सदस्य तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।