जोधपुर में स्लीप एपनिया जांच के लिए दो मशीनें-चिकित्सा मंत्री
जयपुर(दूरदृष्टीन्यूज),जोधपुर में स्लीप एपनिया जांच के लिए दो मशीनें-चिकित्सा मंत्री। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि जोधपुर के मेडिकल कॉलेज में पॉलीसोम्नोग्राफी टेस्ट की सुविधाओं के लिए वर्तमान में दो मशीनें उपलब्ध हैं। इनमें से एक मशीन एमजी हॉस्पिटल में संचालित है। दूसरी मशीन कमला नेहरू टीबी हॉस्पिटल में स्थापित है, जिसे हाल ही में दुरुस्त कर पुनः चालू किया गया है।
चिकित्सा मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक देवेन्द्र जोशी द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि इन मशीनों का उपयोग स्लीप एपनिया और अनिद्रा जैसी बीमारियों की जांच के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच केवल 6 पॉलीसोम्नोग्राफी टेस्ट ही किए गए हैं,इसलिए फिलहाल दो मशीनें पर्याप्त हैं।
मंत्री सिंह ने बताया कि कमला नेहरू टीबी हॉस्पिटल की मशीन 13 अक्टूबर 2025 को खराब हो गई थी,जिसे रिपेयर कर 16 फरवरी 2026 को पुनः चालू कर दिया गया है और वर्तमान में यह मशीन भी सुचारू रूप से कार्य कर रही है।
इससे पहले मूल प्रश्न के लिखित उत्तर में चिकित्सा मंत्री ने बताया कि केन्द्र सरकार की ट्रोमा गाइड लाइन के अनुसार किसी भी घायल व्यक्ति को उपचार के लिए 50 किलोमीटर से अधिक दूरी तक परिवहन की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए। इसी क्रम में प्रत्येक 100 किलोमीटर पर एक ट्रोमा सेंटर स्थापित करने का प्रावधान है।
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उन्होंने बताया कि रानीवाड़ा से निकटतम ट्रोमा सेंटर सांचौर में स्थित है,जिसकी दूरी लगभग 45 किलोमीटर है। इसलिए वर्तमान में रानीवाड़ा में नया ट्रोमा सेंटर खोलने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। हालांकि जालौर जिले के रानीवाड़ा में वर्ष 2019-20 से प्राइमरी ट्रोमा सेंटर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध मानव संसाधनों से संचालित किया जा रहा है।
मंत्री सिंह ने बताया कि ग्राम सरनाउ,पंचायत समिति सरनाउ (जिला जालौर) में वर्तमान में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत है। भारत सरकार के मानदंडों के अनुसार 1 लाख ग्रामीण जनसंख्या पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) स्थापित करने का प्रावधान है।
वर्ष 2011 की अनुमानित ग्रामीण जनसंख्या के आधार पर पंचायत समिति सरनाउ में एक सीएचसी की आवश्यकता के बावजूद अभी तक कोई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत नहीं है। उन्होंने कहा कि आगामी वित्तीय वर्षों में वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर सरनाउ के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्रमोन्नत करने पर विचार किया जा सकता है।
